रांची में एक बार फिर नगर निगम की टीम एक्शन मोड में नजर आई। शहर के चडरी तालाब के पास अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाया गया, जिसमें बुलडोजर चलाकर कई दुकानों को हटा दिया गया।
इस कार्रवाई के बाद इलाके में तनाव का माहौल बन गया और स्थानीय दुकानदारों में भारी नाराजगी देखने को मिली।
⚠️ बुलडोजर चला, दुकानदारों में फूटा गुस्सा
नगर निगम की टीम ने चडरी तालाब के आसपास अतिक्रमण हटाने के लिए अभियान चलाया। इस दौरान कई वर्षों से लगी दुकानों को बुलडोजर से हटाया गया।
कार्रवाई के दौरान:
- कई अस्थायी और स्थायी दुकानें हटाई गईं
- मौके पर भारी संख्या में पुलिस बल तैनात रहा
- प्रशासन ने इलाके को खाली कराया
जैसे ही बुलडोजर चला, दुकानदारों का गुस्सा फूट पड़ा और उन्होंने विरोध जताना शुरू कर दिया।
😡 “बिना नोटिस तोड़ी दुकानें” — दुकानदारों का आरोप
दुकानदारों का कहना है कि उन्हें किसी तरह का कोई पूर्व नोटिस नहीं दिया गया। अचानक निगम की टीम पहुंची और उनकी दुकानों पर बुलडोजर चला दिया गया।
उनका आरोप है:
- बिना सूचना के कार्रवाई की गई
- वर्षों से चल रही दुकानों को एक झटके में हटा दिया गया
- प्रशासन ने संवाद करने की कोशिश नहीं की
💰 “पहले लोन दिया, अब रोजी-रोटी छीनी”
सबसे बड़ा आरोप यह है कि जिन दुकानों को हटाया गया, उन्हें लगाने के लिए पहले नगर निगम की ओर से ही लोन दिया गया था।
दुकानदारों का कहना है:
- निगम ने ही उन्हें व्यवसाय शुरू करने के लिए प्रोत्साहित किया
- अब वही निगम उनकी आजीविका खत्म कर रहा है
- यह उनके साथ अन्याय है
🧑🤝🧑 20-30 साल से चला रहे थे दुकान
स्थानीय दुकानदारों के अनुसार, वे पिछले 20 से 30 वर्षों से चडरी तालाब के पास दुकान लगाकर अपने परिवार का भरण-पोषण कर रहे थे।
अचानक हुई इस कार्रवाई से:
- सैकड़ों परिवार प्रभावित हुए हैं
- कई लोगों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है
- आर्थिक स्थिति बिगड़ने का खतरा है
📢 दुकानदारों की मांग — पहले वैकल्पिक व्यवस्था
प्रदर्शन कर रहे दुकानदारों ने प्रशासन से मांग की है कि:
- पहले उन्हें वैकल्पिक जगह दी जाए
- उसके बाद ही अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की जाए
- उनके पुनर्वास की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए
❓ उठ रहे हैं बड़े सवाल
- क्या बिना नोटिस अतिक्रमण हटाना उचित है?
- क्या दुकानदारों के पुनर्वास की कोई योजना है?
- क्या निगम ने मानवीय पहलुओं पर ध्यान दिया?
📢 निष्कर्ष
रांची में चडरी तालाब के पास चला यह बुलडोजर एक्शन सिर्फ अतिक्रमण हटाने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इससे कई परिवारों की आजीविका पर सीधा असर पड़ा है।
एक ओर प्रशासन शहर को अतिक्रमण मुक्त करने की कोशिश कर रहा है, वहीं दूसरी ओर प्रभावित लोग अपने अधिकार और पुनर्वास की मांग कर रहे हैं।
अब देखना होगा कि प्रशासन इस विवाद को कैसे सुलझाता है