बिहार के नालंदा जिले के मघड़ा गांव स्थित शीतला मंदिर में हुए हादसे ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। इस घटना को लेकर बिहार राज्य धार्मिक न्यास पर्षद के अध्यक्ष प्रो. रणबीर नंदन आज मौके पर पहुंचे और हालात का जायजा लिया।
📍 मौके पर पहुंचे न्यास पर्षद अध्यक्ष
प्रो. रणबीर नंदन ने घटनास्थल का निरीक्षण किया और पूरे मामले की जानकारी ली।
निरीक्षण के दौरान उन्होंने साफ कहा कि यह हादसा कहीं न कहीं बड़ी लापरवाही का परिणाम है।
👉 उन्होंने कहा:
- शीतला मंदिर धार्मिक न्यास में पंजीकृत नहीं है
- इसके बावजूद निगरानी की जिम्मेदारी न्यास पर्षद की बनती है
- मंदिर प्रबंधन को लेकर जल्द ठोस फैसला लिया जाएगा
⚠️ “बड़ी चूक का नतीजा है हादसा”
प्रो. रणबीर नंदन ने बयान देते हुए कहा:
“यह घटना कहीं न कहीं बड़ी लापरवाही का परिणाम है। मंदिर के प्रबंधन को लेकर हम आवश्यक निर्णय लेंगे, जिससे ऐसी घटनाएं दोबारा न हों।”
उनके इस बयान के बाद प्रशासनिक व्यवस्था पर भी सवाल उठने लगे हैं।
👮♂️ पुलिस कार्रवाई पर ग्रामीणों में नाराजगी
घटना के बाद पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई को लेकर स्थानीय ग्रामीणों में भारी नाराजगी देखी जा रही है।
👉 ग्रामीणों का आरोप:
- देर रात पुलिस ने छापेमारी की
- 5 पंडाओं को गिरफ्तार किया गया
- जबकि मामले में 20 लोगों को नामजद किया गया है
ग्रामीणों का कहना है कि:
- दोषियों पर कार्रवाई जरूर हो
- लेकिन निर्दोष लोगों को परेशान न किया जाए
😨 गांव में तनाव और दहशत का माहौल
पुलिस कार्रवाई के बाद पूरे गांव में डर और तनाव का माहौल बन गया है।
📌 स्थिति यह है कि:
- कई दुकानदारों ने अपनी दुकानें बंद कर दी हैं
- गांव में सन्नाटा और तनाव बना हुआ है
- लोग खुलकर बोलने से भी डर रहे हैं
❓ जिम्मेदार कौन – प्रशासन या पंडा कमिटी?
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल अभी भी अनुत्तरित है:
👉 शीतला मंदिर में हुई भगदड़ के लिए जिम्मेदार कौन है?
- क्या यह प्रशासनिक लापरवाही थी?
- या फिर मंदिर प्रबंधन (पंडा कमिटी) की गलती?
इस सवाल का जवाब ही तय करेगा कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को कैसे रोका जा सकता है।
📢 निष्कर्ष
नालंदा का यह हादसा सिर्फ एक घटना नहीं, बल्कि एक चेतावनी है। धार्मिक स्थलों पर सुरक्षा और प्रबंधन की जिम्मेदारी तय करना बेहद जरूरी है, ताकि श्रद्धालुओं की जान सुरक्षित रह सके।