झारखंड में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। कुख्यात अपराधी प्रिंस खान के गुर्गे को अंगरक्षक मुहैया कराए जाने के खुलासे के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है। इस मामले के सामने आते ही झारखंड पुलिस मुख्यालय ने राज्यभर में अंगरक्षक व्यवस्था की समीक्षा शुरू कर दी है।
🔍 क्या है पूरा मामला?
हाल ही में रांची के एयरपोर्ट थाना क्षेत्र में एक होटल में हुई फायरिंग में मनीष गोप नामक युवक की हत्या के बाद पुलिस जांच में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए।
जांच के दौरान गिरफ्तार आरोपी कुबेर ने पूछताछ में गैंगस्टर प्रिंस खान के गुर्गे राणा राहुल प्रताप और कौशल पांडेय का नाम लिया।
पुलिस को जांच में यह भी पता चला कि:
- राणा राहुल प्रताप को पुलिस द्वारा अंगरक्षक उपलब्ध कराया गया था
- वह गाड़ियों के काफिले के साथ चलता था
- उसके साथ 3-4 अंगरक्षक भी देखे गए
🚨 अपराधी को कैसे मिला अंगरक्षक?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि एक अपराधी गिरोह से जुड़े व्यक्ति को आखिर किस आधार पर अंगरक्षक दिया गया?
जानकारी के अनुसार:
- राणा राहुल प्रताप प्रिंस खान के लिए काम करता था
- वह कारोबारियों की रेकी कर वीडियो गैंगस्टर तक पहुंचाता था
- उसके पास हथियार का लाइसेंस भी था
अब पुलिस मुख्यालय ने रांची पुलिस से इस पूरे मामले पर जवाब मांगा है कि आखिर उसे हथियार और सुरक्षा किस परिस्थिति में दी गई।
📊 राज्यभर में अंगरक्षकों की होगी समीक्षा
इस मामले के बाद झारखंड पुलिस मुख्यालय ने सभी जिलों के एसएसपी और एसपी को पत्र लिखकर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।
👉 रिपोर्ट में मांगी गई जानकारी:
- किस व्यक्ति को कितने अंगरक्षक दिए गए हैं
- अंगरक्षक कब से तैनात हैं
- उनके पास कौन-कौन से हथियार हैं
- सुरक्षा देने का आधार क्या है
⚖️ बदले जा सकते हैं अंगरक्षक, घट सकती है संख्या
मुख्यालय ने साफ किया है कि समीक्षा के बाद:
- जरूरत से ज्यादा अंगरक्षक हटाए जाएंगे
- जहां आवश्यकता नहीं होगी, वहां सुरक्षा खत्म होगी
- लंबे समय से एक ही जगह तैनात अंगरक्षकों का तबादला किया जाएगा
❗ पहले भी मिलती रही हैं शिकायतें
यह पहला मामला नहीं है जब अंगरक्षकों को लेकर सवाल उठे हों। इससे पहले भी कई बार शिकायतें सामने आई हैं कि:
- अंगरक्षक के नाम पर दबाव और धमकी दी जाती है
- कुछ अंगरक्षक गैरकानूनी गतिविधियों में शामिल पाए गए
- लंबे समय तक एक ही व्यक्ति के साथ तैनाती से सिस्टम कमजोर होता है
🗣️ क्यों जरूरी है यह कार्रवाई?
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम सुरक्षा व्यवस्था को पारदर्शी और प्रभावी बनाने के लिए बेहद जरूरी है।
अगर समय रहते ऐसी गड़बड़ियों पर रोक नहीं लगाई गई, तो यह कानून-व्यवस्था के लिए बड़ा खतरा बन सकता है।
📢 निष्कर्ष
प्रिंस खान गैंग से जुड़े व्यक्ति को अंगरक्षक मिलने का मामला झारखंड पुलिस के लिए गंभीर चेतावनी है। अब देखना होगा कि जांच में क्या सामने आता है और दोषियों पर क्या कार्रवाई होती है।