झारखंड की राजनीति में एक बार फिर नया विवाद खड़ा हो गया है। झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (जेएलकेएम) के प्रमुख और डुमरी विधायक जयराम महतो ने राज्य में प्रस्तावित नए मुख्यमंत्री आवास के निर्माण को लेकर सरकार पर तीखा हमला बोला है।
उन्होंने इस परियोजना को सीधे तौर पर जनता के पैसे की बर्बादी करार देते हुए सरकार की प्राथमिकताओं पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
💰 “67 करोड़ का महल क्यों?” – जयराम महतो का सवाल
जयराम महतो ने कहा कि जब राज्य में पहले से ही मुख्यमंत्री आवास मौजूद है, तो फिर 67 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि खर्च कर नया आवास बनाने की जरूरत क्यों पड़ गई?
उनका कहना है कि यह खर्च आम जनता के हितों के खिलाफ है, खासकर तब जब राज्य के ग्रामीण इलाकों में लोग बुनियादी जरूरतों के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
📊 100 करोड़ के पार जा सकती है लागत
विधायक ने दावा किया कि यह परियोजना पूरी होने तक इसकी लागत 100 करोड़ रुपये से भी अधिक हो सकती है।
उन्होंने यह भी बताया कि पिछले 25 वर्षों में मौजूदा मुख्यमंत्री आवास के रखरखाव और मरम्मत पर ही करीब 100 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं।
👉 ऐसे में सवाल उठता है कि:
- हर साल 2 से 4 करोड़ रुपये की मरम्मत किस काम में खर्च होती रही?
- अगर इतना खर्च हुआ, तो फिर नया आवास क्यों?
⚠️ भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप
जयराम महतो ने इस पूरे मामले में भ्रष्टाचार का भी आरोप लगाया है।
उनका दावा है कि मुख्यमंत्री आवास की मरम्मत के नाम पर अभियंताओं द्वारा 40 से 50 प्रतिशत तक कमीशन लिया जाता है।
उन्होंने सरकार से इस मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है, ताकि सच्चाई सामने आ सके।
📚 “शिक्षा और स्वास्थ्य पर खर्च हो पैसा”
जयराम महतो ने सरकार को सुझाव देते हुए कहा कि इस तरह के खर्च को रोककर पैसा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं में लगाया जाना चाहिए।
उन्होंने राज्य की जमीनी हकीकत का जिक्र करते हुए कहा:
- ग्रामीण इलाकों में लोग दो वक्त की रोटी के लिए संघर्ष कर रहे हैं
- छात्रवृत्ति न मिलने से गरीब छात्र अपनी जमीन और गहने गिरवी रखकर पढ़ाई कर रहे हैं
👉 ऐसे में सरकार को प्राथमिकताएं तय करनी चाहिए।
🏫 बड़े प्रोजेक्ट्स की मांग
जयराम महतो ने सरकार के सामने कुछ अहम प्रस्ताव भी रखे:
- बरहेट में नेतरहाट मॉडल पर स्कूल खोला जाए
- संथाल परगना के बच्चों को प्राथमिकता दी जाए
- रांची में RIMS-2 का निर्माण किया जाए
- स्वास्थ्य मंत्री से मॉडल अस्पताल की समयसीमा स्पष्ट करने की मांग
🔍 क्या कहती है यह पूरी बहस?
यह मुद्दा सिर्फ एक भवन निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह राज्य की विकास प्राथमिकताओं, पारदर्शिता और सरकारी खर्च पर बड़ी बहस को जन्म दे रहा है।
एक तरफ सरकार बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की बात कर रही है, वहीं विपक्ष और अन्य नेता इसे फिजूलखर्ची और संभावित भ्रष्टाचार से जोड़कर देख रहे हैं।
📢 निष्कर्ष
झारखंड में नए मुख्यमंत्री आवास को लेकर उठे सवाल आने वाले दिनों में और तूल पकड़ सकते हैं। अब देखना यह होगा कि सरकार इन आरोपों पर क्या जवाब देती है और क्या वाकई इस मामले की जांच होती है या नहीं।