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“पहचान दो, अधिकार दो” के नारों से गूंजा रांची, कुड़मी समाज ने दिखाई ताकत

रांची के प्रभात तारा मैदान में कुड़मी समाज की महारैली, एसटी सूची में शामिल करने और कुड़माली भाषा को संविधान की 8वीं अनुसूची में स्थान देने की मांग। हजारों लोग हुए शामिल, आंदोलन को राज्यव्यापी बनाने की चेतावनी।

रांची: रांची के धुर्वा स्थित प्रभात तारा मैदान में रविवार को कुड़मी समाज की भव्य महारैली का आयोजन किया गया। “कुड़मी अधिकार महारैली” में हजारों की संख्या में महिला-पुरुष और युवा शामिल हुए। रैली का मुख्य उद्देश्य कुड़मी समुदाय को अनुसूचित जनजाति (एसटी) सूची में शामिल करने और कुड़माली भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में स्थान दिलाने की मांग को मजबूत करना था।

पारंपरिक वेशभूषा और सांस्कृतिक झलक

रैली में शामिल लोग पारंपरिक वेशभूषा में पहुंचे थे। ढोल-नगाड़ों और मांदर की थाप पर पूरा मैदान गूंज उठा। “पहचान दो, अधिकार दो” जैसे नारों से सभा स्थल गूंजता रहा।
रांची, रामगढ़, बोकारो, हजारीबाग, गिरिडीह, धनबाद, सरायकेला-खरसावां और दुमका सहित कई जिलों से समाज के लोग बड़ी संख्या में पहुंचे। खास बात यह रही कि युवाओं और महिलाओं की भागीदारी उल्लेखनीय रही।

नेताओं ने रखी अपनी बात

सभा को संबोधित करते हुए विधायक नागेंद्र महतो ने कहा कि यह आंदोलन किसी समुदाय के खिलाफ नहीं, बल्कि अपनी ऐतिहासिक पहचान की पुनर्स्थापना के लिए है।
वहीं शीतल ओहदार ने इसे वर्षों की उपेक्षा का परिणाम बताया और कहा कि कुड़मी समाज अब अपने अधिकारों के लिए संगठित हो चुका है।

झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा के केंद्रीय उपाध्यक्ष देवेंद्र नाथ महतो ने सरकार पर आरोप लगाया कि कुड़मी समाज की एकजुटता को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने मांग दोहराई कि कुड़मी समुदाय को एसटी सूची में शामिल किया जाए और कुड़माली भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में स्थान दिया जाए।

नेताओं ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो आंदोलन को राज्यव्यापी रूप दिया जाएगा।

कई वक्ताओं ने किया संबोधन

जनसभा को शीतल अहदार, नागेंद्र महतो, लम्बोदर महतो, जयमुनी महतो, शखीचंद महतो, राजेंद्र महतो, रामपदो महतो, रणधीर चौधरी, अमरनाथ चौधरी, अमित महतो (दिल्ली), जोशोदा देवी, सुषमा देवी, पार्वती देवी, ओमप्रकाश महतो, सोनालाल महतो, राजकिशोर महतो, हरिकृष्ण महतो और रंजीत महतो समेत कई वक्ताओं ने संबोधित किया।

सभा के माध्यम से कुड़मी समाज ने यह संदेश दिया कि वे अपनी पहचान और संवैधानिक अधिकारों के लिए संगठित और प्रतिबद्ध हैं।

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