रांची: झारखंड विधानसभा के बजट सत्र में सहिया बहनों को लेकर बड़ा ऐलान किया गया है। स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी ने घोषणा की कि आगामी महिला दिवस के अवसर पर राज्य की सभी सहिया बहनों को एक साल का एकमुश्त ₹24,000 का भुगतान किया जाएगा।
यह घोषणा उन्होंने मांडू विधायक निर्मल महतो के सवालों का जवाब देते हुए की।
विधानसभा के बाहर धरने पर बैठीं सहिया बहनें
विधानसभा सत्र के दौरान यह मुद्दा जोर-शोर से उठा। विधायक निर्मल महतो ने सदन में कहा कि राज्य की सहिया बहनें अपने बकाया भुगतान को लेकर विधानसभा के बाहर धरने पर बैठी हैं।
उन्होंने सरकार से मांग की कि:
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सहिया बहनों को हर महीने मिलने वाली राशि का नियमित भुगतान किया जाए
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लंबित भुगतान जल्द से जल्द जारी हो
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उनके सम्मान और सुरक्षा का भी ध्यान रखा जाए
निर्मल महतो ने कहा कि सहिया बहनें ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था की रीढ़ हैं, ऐसे में उनकी अनदेखी नहीं होनी चाहिए।
क्या बोले स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी?
स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी ने सदन में जवाब देते हुए कहा कि सरकार सहिया बहनों की भूमिका को समझती है और उनके योगदान का सम्मान करती है।
उन्होंने घोषणा की कि:
✔ महिला दिवस के अवसर पर एक साल की राशि एकमुश्त ₹24,000 दी जाएगी
✔ भुगतान की प्रक्रिया को पारदर्शी और समयबद्ध बनाया जाएगा
✔ भविष्य में नियमित भुगतान सुनिश्चित करने के लिए विभागीय स्तर पर व्यवस्था की जा रही है
मंत्री के इस ऐलान के बाद सदन में हलचल देखने को मिली और इसे सहिया बहनों के लिए राहत भरी खबर माना जा रहा है।
कौन हैं सहिया बहनें और क्यों हैं महत्वपूर्ण?
झारखंड में सहिया बहनें (ASHA कार्यकर्ता) ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। उनकी प्रमुख जिम्मेदारियाँ होती हैं:
ग्रामीण क्षेत्रों में प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित करने में सहिया बहनों की भूमिका बेहद अहम मानी जाती है।
धरने की वजह क्या थी?
सहिया बहनों का आरोप था कि उन्हें मिलने वाली प्रोत्साहन राशि और मासिक भुगतान समय पर नहीं मिल रहा है।
उनकी मुख्य मांगें थीं:
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बकाया राशि का भुगतान
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नियमित वेतन व्यवस्था
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मानदेय में वृद्धि
इसी मुद्दे को लेकर वे विधानसभा के बाहर धरने पर बैठी थीं, जिस पर अब सरकार की ओर से सकारात्मक संकेत मिला है।
क्या यह घोषणा धरना खत्म कराएगी?
अब बड़ा सवाल यह है कि क्या ₹24,000 की एकमुश्त राशि का ऐलान सहिया बहनों के आंदोलन को समाप्त कराएगा?
विशेषज्ञों का मानना है कि:
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एकमुश्त भुगतान राहत जरूर देगा
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लेकिन स्थायी समाधान नियमित और समय पर भुगतान ही है
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सरकार को दीर्घकालिक नीति बनानी होगी
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निष्कर्ष
झारखंड विधानसभा बजट सत्र में सहिया बहनों को लेकर की गई ₹24,000 की घोषणा को बड़ा कदम माना जा रहा है। महिला दिवस के अवसर पर यह सौगात जहां एक ओर राहत दे सकती है, वहीं सरकार के सामने चुनौती है कि भविष्य में भुगतान व्यवस्था को पूरी तरह नियमित और पारदर्शी बनाया जाए।
सहिया बहनों की भूमिका को देखते हुए यह जरूरी है कि उन्हें समय पर मानदेय और सम्मान दोनों मिले