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पटना में खुला नाला बना मासूम की मौत की वजह, फिर उठी कड़ी कार्रवाई की मांग

पटना में खुले नालों में गिरकर बच्चों की मौत का सिलसिला थम नहीं रहा। सरासत गांव की ताजा घटना समेत पिछले 8 वर्षों में कई मासूमों की जान जा चुकी है। प्रशासन पर उठ रहे हैं गंभीर सवाल

पटना: पटना में खुले नालों में गिरकर मासूमों की मौत का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। ताजा मामला थाना क्षेत्र के सरासत गांव का है, जहां गुरुवार को घर से निकली एक बच्ची देर शाम तक वापस नहीं लौटी। परिजनों और ग्रामीणों ने खोजबीन शुरू की तो गांव के एक खुले नाले के चैंबर पर उनकी नजर पड़ी।

स्वजनों को आशंका हुई कि कहीं बच्ची नाले में तो नहीं गिर गई। संदेह के आधार पर जब डंडा डालकर देखा गया तो बच्ची का कपड़ा दिखाई दिया। इसके बाद ग्रामीणों की मदद से मोटर लगाकर नाले का पानी निकाला गया। पानी निकलने के बाद बच्ची कीचड़ में फंसी मिली। आनन-फानन में उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

पुलिस कर रही जांच

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी। प्रारंभिक तौर पर इसे हादसा माना जा रहा है, लेकिन पुलिस सभी पहलुओं पर छानबीन कर रही है।

इधर, घटना के बाद ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। लोगों ने प्रशासन से खुले नालों को तत्काल ढकने और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की मांग की है, ताकि भविष्य में ऐसी दर्दनाक घटनाएं दोबारा न हों। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।

8 साल में कई मासूमों की मौत

पटना में खुले नालों में गिरकर बच्चों की मौत की यह कोई पहली घटना नहीं है। पिछले आठ वर्षों में कई मासूम अपनी जान गंवा चुके हैं—

  • फरवरी 2026: फुलवारी शरीफ के ईसापुर इलाके में खुले नाले में गिरकर दो साल की बच्ची की मौत।

  • मई 2024: दीघा थाना क्षेत्र के रामजी चक में निजी नाले से सात साल के बच्चे का शव बरामद।

  • अगस्त 2025: बुद्धा कालोनी क्षेत्र में खेल रही पांच साल की बच्ची खुले नाले में गिरी, मौत।

  • नवंबर 2022: राजीव नगर थाना क्षेत्र में चार साल का बच्चा खुले नाले में गिरा, इलाज के दौरान मौत।

  • जुलाई 2021: चौक थाना क्षेत्र में चार साल की बच्ची की खुले नाले में गिरने से जान गई।

  • नवंबर 2018: एसके पुरी थाना क्षेत्र के मोहनपुर-पुनाईचक नाले में दस साल का बच्चा गिरा, कई दिनों की खोजबीन के बाद भी नहीं मिला।

लगातार हो रही इन घटनाओं ने नगर निगम और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। हर हादसे के बाद आश्वासन तो दिए जाते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर ठोस कार्रवाई अब तक नजर नहीं आई है। शहरवासियों का कहना है कि जब तक खुले नालों को पूरी तरह ढका नहीं जाएगा, तब तक मासूमों की जान पर खतरा बना रहेगा।

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