रांची: झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के दूसरे दिन मांडू विधायक ने राज्य में जंगली हाथियों के हमले से हो रही मौतों को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। हाल ही में हाथियों के हमले में सात लोगों की मौत के बाद सियासी हलचल तेज हो गई है। इसी मुद्दे को उठाते हुए मांडू विधायक निर्मल महतो ने विधानसभा परिसर की सीढ़ियों पर बैनर के साथ धरना दिया और सरकार तथा वन विभाग पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया।
विधायक ने कहा कि राज्य में हाथियों का आतंक लगातार बढ़ रहा है, लेकिन वन विभाग उनकी गतिविधियों पर निगरानी रखने में पूरी तरह विफल साबित हुआ है। उनका आरोप है कि कई दिनों तक हाथियों की मौजूदगी की सूचना रहने के बावजूद समय पर कार्रवाई नहीं की जाती, जिससे वे अचानक गांवों और शहरी इलाकों में घुसकर जान-माल का नुकसान पहुंचाते हैं। उन्होंने इसे सरकार की उदासीनता का परिणाम बताया।
खनन और अवैध गतिविधियों पर सवाल
धरने के दौरान विधायक ने खनन क्षेत्रों में अवैध कोयला और लौह अयस्क की चोरी तथा रात में होने वाली ब्लास्टिंग पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि इससे हाथियों का प्राकृतिक आवास प्रभावित हो रहा है और वे जंगल छोड़कर आबादी वाले क्षेत्रों की ओर रुख कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि “जल-जंगल-जमीन” की रक्षा का दावा करने वाली सरकार इन संसाधनों की सुरक्षा में नाकाम रही है।
मुआवजा बढ़ाने और नौकरी की मांग
हाथी हमलों में मारे गए लोगों के परिजनों को वर्तमान में दी जा रही चार लाख रुपये की सहायता राशि पर भी विधायक ने नाराजगी जताई। उन्होंने मुआवजा बढ़ाकर 20 से 30 लाख रुपये करने और पीड़ित परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की मांग की।
इसके अलावा, हाथी हमलों में क्षतिग्रस्त घरों के मामले में भी सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाया गया। विधायक का कहना है कि पूर्ण पुनर्निर्माण के बजाय नाम मात्र की राशि देकर औपचारिकता निभाई जा रही है, जो प्रभावित परिवारों के साथ अन्याय है।
हालांकि सरकार ने सदन में इस मुद्दे पर चर्चा के लिए समय देने की बात कही है, लेकिन विधायक ने स्पष्ट किया कि जब तक ठोस कार्रवाई और लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं की जाती, उनका विरोध जारी रहेगा।