रांची: रांची स्थित झारखंड जगुआर मुख्यालय में झारखंड पुलिस की विशेष एंटी नक्सल इकाई झारखंड जगुआर का 18वां स्थापना दिवस धूमधाम से मनाया गया। समारोह की शुरुआत शहीद जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित कर की गई। इस अवसर पर जवानों ने आकर्षक परेड और आधुनिक हथियारों का प्रदर्शन किया, जिसने उपस्थित अधिकारियों और अतिथियों का मन मोह लिया।
कार्यक्रम में झारखंड की डीजीपी तदाशा मिश्रा सहित कई वरीय पुलिस अधिकारी, जवानों के परिजन और गणमान्य लोग मौजूद रहे। डीजीपी ने मीडिया से बातचीत में झारखंड जगुआर के सभी पदाधिकारियों और जवानों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह दिन उन वीर सपूतों को याद करने का है, जिन्होंने राज्य की सुरक्षा और शांति के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया।
उन्होंने बताया कि एक समय राज्य में नक्सल गतिविधियां चरम पर थीं। ऐसे चुनौतीपूर्ण दौर में 19 फरवरी 2008 को झारखंड जगुआर का गठन किया गया था। नक्सल उन्मूलन अभियान में इस विशेष बल की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रही है।
डीजीपी ने जानकारी दी कि फिलहाल सारंडा जंगल (चाईबासा) क्षेत्र में कुछ नक्सली सक्रिय हैं, जिनके खिलाफ झारखंड जगुआर और पुलिस की संयुक्त टीम लगातार अभियान चला रही है। लगातार रणनीतिक कार्रवाई के कारण झारखंड अब लगभग नक्सल मुक्त होने की दिशा में आगे बढ़ चुका है।
उन्होंने यह भी बताया कि जवानों के बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए 10 बेड के अस्पताल के निर्माण की तैयारी की जा रही है।
वहीं झारखंड जगुआर के आईजी अनूप बिरथरे ने कहा कि गठन के बाद से इस विशेष बल ने राज्य में शांति स्थापना में अहम योगदान दिया है। अब तक जगुआर के 24 वीर जवान शहीद हुए हैं, जिन्हें पूरे सम्मान के साथ नमन किया गया।
आईजी ने विश्वास जताया कि पुलिस और जगुआर के समर्पित प्रयासों से नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में जल्द ही पूरी तरह शांति स्थापित होगी। एंटी नक्सल ऑपरेशन के उद्देश्य से गठित यह विशेष बल अपने लक्ष्य की दिशा में बड़ी सफलता हासिल कर चुका है, जो झारखंड के लिए गर्व की बात है।