रांची: रांची में चल रहे झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के दूसरे दिन प्रश्नकाल के दौरान विधायकों ने जनहित से जुड़े कई अहम मुद्दे उठाए, जिन पर संबंधित मंत्रियों ने जवाब दिया। सदन में पुनर्वास, सिंचाई और राशन वितरण जैसे विषयों पर तीखी बहस देखने को मिली।
ईचागढ़ की विधायक सबिता महतो ने चांडिल डैम से प्रभावित विस्थापितों के पुनर्वास का मुद्दा उठाते हुए कहा कि अब तक सभी प्रभावितों का समुचित पुनर्वास नहीं हुआ है और पिछले दो वर्षों से इस संबंध में कोई बैठक भी नहीं हुई। इस पर जल संसाधन मंत्री हफीजुल अंसारी ने जवाब दिया कि 13 स्थानों पर विस्थापितों को मुआवजा राशि दी जा चुकी है और शेष को भी नियमानुसार भुगतान किया जा रहा है। विधायक ने दावा किया कि केवल 116 गांवों के विस्थापितों को ही भुगतान हुआ है, जबकि अन्य अब भी प्रतीक्षा में हैं। मंत्री ने आश्वस्त किया कि सभी को नियम के तहत भुगतान किया जाएगा।
डुमरी विधायक जयराम महतो ने किसानों की सिंचाई व्यवस्था को लेकर सवाल उठाया। उन्होंने पूछा कि यदि डैम सिंचाई के लिए बनाए गए हैं तो ऐसे गांवों के नाम बताए जाएं, जहां वास्तव में डैम के पानी से खेतों की सिंचाई हो रही है। इस पर मंत्री हफीजुल हसन ने कहा कि वर्तमान में 4 लाख एकड़ से अधिक भूमि की सिंचाई डैम के पानी से की जा रही है।
जयराम महतो ने यह भी कहा कि डैम निर्माण के लिए किसानों की जमीन ली जाती है, लेकिन पानी उद्योगों और कंपनियों को उपलब्ध कराया जाता है। ऐसे में किसानों के पुनर्वास में देरी और बाधाएं क्यों आती हैं? इस पर मंत्री ने कहा कि सरकार छोटे तालाबों के निर्माण पर भी जोर दे रही है और वर्ष 2029-30 तक 4 लाख हेक्टेयर भूमि की सिंचाई का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। साथ ही अंडरग्राउंड पाइपलाइन सिस्टम के जरिए किसानों तक पानी पहुंचाने की योजना पर काम चल रहा है।
वहीं विधायक हेमलाल मुर्मू ने खाद्य आपूर्ति विभाग से जुड़ा मुद्दा उठाते हुए कहा कि प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारियों की नियुक्ति नहीं होने से ग्रामीणों को परेशानी हो रही है। दूरदराज क्षेत्रों में इंटरनेट की कमी के कारण बायोमेट्रिक प्रणाली से राशन वितरण बाधित हो रहा है।
इस पर मंत्री इरफान अंसारी ने जवाब दिया कि सत्यापन की प्रक्रिया जारी है और सरकार ने 2जी के स्थान पर 4जी मशीनें उपलब्ध कराई हैं, ताकि राशन वितरण में किसी प्रकार की बाधा न आए। उन्होंने भरोसा दिलाया कि पात्र लाभुकों को समय पर अनाज उपलब्ध कराया जा रहा है।
प्रश्नकाल के दौरान उठे इन मुद्दों से स्पष्ट है कि बजट सत्र में सरकार की योजनाओं और जमीनी हकीकत को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच गंभीर चर्चा जारी है।