रांची: झारखंड में महिलाओं को त्वरित और सुलभ न्याय दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए राज्य सरकार ने ‘नारी अदालत’ का पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने का निर्णय लिया है। पंचायत स्तर पर आयोजित होने वाली इस व्यवस्था के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाएं घरेलू हिंसा, दहेज, भरण-पोषण, तलाक और संपत्ति विवाद जैसे मामलों का समाधान अपनी ही पंचायत में करा सकेंगी।
इस पहल का उद्देश्य महिलाओं को न्याय के लिए लंबी और खर्चीली कानूनी प्रक्रिया से राहत दिलाना है। ग्रामीण क्षेत्रों में सामाजिक दबाव और कानूनी जटिलताओं के कारण कई महिलाएं शिकायत दर्ज कराने से हिचकिचाती हैं। ‘नारी अदालत’ स्थानीय स्तर पर संवाद और आपसी सहमति के आधार पर विवादों के समाधान का मंच उपलब्ध कराएगी।
न्याय सखी करेंगी संचालन
प्रत्येक पंचायत में सात से 11 सामाजिक रूप से सम्मानित महिलाओं की एक समिति गठित की जाएगी, जिन्हें ‘न्याय सखी’ कहा जाएगा। समिति की प्रमुख ‘मुख्य न्याय सखी’ होंगी, जो पूरी प्रक्रिया का संचालन करेंगी। यह समिति हर पखवाड़े बैठक करेगी और यह सुनिश्चित करेगी कि कोई भी मामला 15 दिनों से अधिक लंबित न रहे।
सुनवाई पंचायत भवन, आंगनबाड़ी केंद्र या अन्य सरकारी भवनों में आयोजित की जाएगी। जरूरत पड़ने पर मामलों को औपचारिक न्यायालय या संबंधित संस्थाओं को भी भेजा जा सकेगा। हालांकि ‘नारी अदालत’ को कानूनी दर्जा नहीं दिया गया है, इसका मुख्य उद्देश्य आपसी सहमति से विवादों का समाधान और महिलाओं को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करना है।
बरहेट से होगी शुरुआत
पायलट प्रोजेक्ट के तहत राज्य की 10 चयनित ग्राम पंचायतों में ‘नारी अदालत’ शुरू की जाएगी। इनमें मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के विधानसभा क्षेत्र बरहेट की बरहेट बाजार पंचायत भी शामिल है।
चयनित पंचायतों में रांची जिला के नामकुम प्रखंड की रामपुर, पलामू के चैनपुर प्रखंड की बसरिया कला, साहिबगंज के बरहेट प्रखंड की बरहेट बाजार, खूंटी के अड़की प्रखंड की सिंदरी, लोहरदगा के भंडरा प्रखंड की भंडरा, रामगढ़ के गोला प्रखंड की गोला, गुमला के सिसई प्रखंड की लखिया, पश्चिमी सिंहभूम के नोआमुंडी प्रखंड की किरीबुरू (पश्चिम), गिरिडीह के गांडेय प्रखंड की मेनियाडीह तथा पूर्वी सिंहभूम के घाटशिला प्रखंड की कसीदा पंचायत शामिल हैं।
इस संबंध में 20 फरवरी को कलेक्ट्रेट में उपायुक्त हेमंत सती की अध्यक्षता में बैठक आयोजित की जाएगी, जिसमें समिति गठन और कार्यप्रणाली पर चर्चा होगी।
महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में कदम
विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल ग्रामीण क्षेत्रों में महिला सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगी। स्थानीय स्तर पर विवादों के समाधान से पुलिस और न्यायालयों पर भार भी कम होगा।
जिला समाज कल्याण पदाधिकारी संजय कुमार दास ने बताया कि प्रत्येक माह पहले या तीसरे सोमवार को ‘नारी अदालत’ की बैठक आयोजित की जाएगी। बैठक में योजना की रूपरेखा को अंतिम रूप दिया जाएगा।
‘नारी अदालत’ न केवल त्वरित न्याय का माध्यम बनेगी, बल्कि महिलाओं में आत्मविश्वास और उनके अधिकारों के प्रति जागरूकता भी बढ़ाएगी।