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बिहार में बाढ़ से बचाव का बड़ा प्लान, 216 योजनाओं पर करोड़ रुपये खर्च करेगी नीतीश सरकार

बिहार में बाढ़ और कटाव से निपटने के लिए नीतीश सरकार का बड़ा फैसला। 216 योजनाओं पर 447.36 करोड़ रुपये खर्च होंगे। सिंचाई, पेयजल और बाढ़ नियंत्रण से जुड़ी सभी बड़ी योजनाओं की पूरी जानकारी पढ़ें।

पटना। बाढ़ और सुखाड़ बिहार के लिए हर साल आने वाली बड़ी प्राकृतिक आपदाएं हैं। शायद ही कोई ऐसा वर्ष गुजरता हो, जब राज्य के किसी न किसी हिस्से में बाढ़ या सूखे की मार न पड़ी हो। इसे केवल नियति मानने के बजाय नीतीश सरकार ने इससे निपटने के लिए पहले से ठोस तैयारी शुरू कर दी है, जिसका स्पष्ट उल्लेख बजट प्रस्ताव में किया गया है।

वित्त मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने जानकारी दी कि वर्ष 2026 में बाढ़ और नदी कटाव से सुरक्षा के लिए कुल 216 योजनाएं तैयार की गई हैं। इन योजनाओं पर सरकार द्वारा 447.36 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। जल संसाधन विभाग को निर्देश दिया गया है कि अधिकतर योजनाओं को मानसून से पहले पूरा कर लिया जाए, ताकि उत्तर बिहार के बाढ़ प्रभावित जिलों को बड़ी राहत मिल सके।

उत्तर बिहार को मिलेगी राहत

उत्तर बिहार के अधिकांश जिले हर साल बाढ़ की चपेट में आते हैं, जिससे जान-माल का भारी नुकसान होता है। सरकार का मानना है कि इन योजनाओं के पूरा होने से बाढ़ नियंत्रण के साथ-साथ कटाव की समस्या पर भी काफी हद तक काबू पाया जा सकेगा।


सिंचाई योजनाओं पर अरबों रुपये का निवेश

बाढ़ नियंत्रण के साथ-साथ सिंचाई परियोजनाओं को भी तेज़ी से आगे बढ़ाया जा रहा है। जल संसाधन विभाग द्वारा कई बड़ी परियोजनाओं पर काम शुरू कर दिया गया है।

  • कोसी नहर परियोजना (प्रथम चरण)

    • लागत: 3484.24 करोड़ रुपये

    • लक्ष्य: मार्च 2029 तक पूर्ण

    • लाभ: दरभंगा के 16 और मधुबनी के 20 प्रखंडों में

      • कुल 5 लाख हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में सिंचाई सुविधा

  • कोसी-मेची लिंक परियोजना (प्रथम भाग)

    • लागत: 2682.74 करोड़ रुपये

    • लाभ: अररिया, किशनगंज, पूर्णिया और कटिहार

    • सिंचाई क्षेत्र: 2.15 लाख हेक्टेयर

  • बरनार जलाशय, जमुई

    • लागत: 2579.38 करोड़ रुपये

    • सिंचाई लाभ: 22.22 हजार हेक्टेयर

  • गंगा के अधिशेष जल से सिंचाई योजना

    • बांका और मुंगेर में बटुआ व खड़गपुर जलाशय तक पानी पहुंचाया जाएगा

    • लागत: 1866.11 करोड़ रुपये

    • लक्ष्य: 51.16 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई

  • सारण मुख्य नहर का पुनर्स्थापन

    • अनुमानित खर्च: 2061.82 करोड़ रुपये


कई शहरों को मिलेगा शुद्ध पेयजल

जल प्रबंधन योजनाओं से केवल बाढ़ नियंत्रण और सिंचाई ही नहीं, बल्कि पेयजल आपूर्ति भी सुनिश्चित की जा रही है।

  • गंगा जल आपूर्ति योजना (द्वितीय चरण)

    • लागत: 1110.27 करोड़ रुपये

    • मधुबन जलाशय से

    • नवादा और बिहारशरीफ को मिलेगा शुद्ध पेयजल

  • जल-जीवन-हरियाली अभियान के तहत

    • सोन नदी से औरंगाबाद, डेहरी और सासाराम को पेयजल

    • लागत: 1347.32 करोड़ रुपये

  • दुर्गावती जलाशय योजना

    • भभुआ और मोहनियां को मिलेगा पानी

    • लागत: 198.58 करोड़ रुपये


निष्कर्ष

नीतीश सरकार की ये योजनाएं साफ संकेत देती हैं कि बिहार में बाढ़, सिंचाई और पेयजल की समस्या से स्थायी समाधान की दिशा में बड़े कदम उठाए जा रहे हैं। यदि योजनाएं समय पर पूरी होती हैं, तो इससे करोड़ों लोगों को राहत मिलेगी और राज्य की कृषि व जल प्रबंधन व्यवस्था को मजबूती मिलेगी।

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