हजारीबाग: हजारीबाग जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में जंगली हाथियों का बढ़ता उत्पात अब जानलेवा साबित हो रहा है। बीते तीन दिनों के भीतर हाथी के हमले में दो ग्रामीणों की मौत हो चुकी है, जिससे इलाके में दहशत का माहौल बन गया है। ताजा घटना शुक्रवार अहले सुबह कटकमदाग प्रखंड के बनहा गांव की है, जहां एक जंगली हाथी ने किसान को कुचलकर मार डाला।
🧑🌾 तालाब जाते समय किसान की दर्दनाक मौत
मृतक किसान की पहचान गणेश गोप के रूप में हुई है। ग्रामीणों के अनुसार, शुक्रवार सुबह घना कोहरा छाया हुआ था। इसी दौरान गणेश गोप रोजमर्रा के काम से तालाब की ओर जा रहे थे। तभी अचानक इलाके में विचरण कर रहे जंगली हाथी ने उन पर हमला कर दिया। हाथी के हमले से गणेश गोप को गंभीर चोटें आईं और मौके पर ही उनकी मौत हो गई।
घटना की खबर मिलते ही गांव में अफरा-तफरी मच गई और बड़ी संख्या में ग्रामीण घटनास्थल पर जुट गए।
⚠️ पहले भी जा चुकी है एक जान
इससे पहले बुधवार देर रात करीब 11 बजे दारू रेंज क्षेत्र के चुटियारो गांव में भी ऐसी ही दर्दनाक घटना हुई थी। एक झुंड से बिछड़ा जंगली हाथी टमाटर के खेत में जा पहुंचा, जहां खेत में सो रहे किसान आदित्य राणा को हाथी ने कुचलकर मार डाला। इस हमले में उनकी पत्नी भी गंभीर रूप से घायल हो गई थीं, जिनका इलाज अभी जारी है।
लगातार हो रही इन घटनाओं से यह साफ है कि इलाके में हाथियों की आवाजाही काफी बढ़ गई है।
🌲 ग्रामीणों का आरोप – वन विभाग ने नहीं की ठोस कार्रवाई
ग्रामीणों का कहना है कि बीते कई दिनों से जंगली हाथियों का झुंड आसपास के इलाकों में घूम रहा है। इसकी सूचना कई बार वन विभाग को दी गई थी, लेकिन हाथियों को गांवों से दूर रखने या उन्हें नियंत्रित करने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
लगातार हो रही मौतों के बाद ग्रामीणों में वन विभाग के प्रति गहरा आक्रोश देखा जा रहा है।
🏢 वन विभाग का बयान
हजारीबाग प्रक्षेत्र के वन क्षेत्र पदाधिकारी सतेंद्र कुमार चौधरी ने बताया कि पीड़ित परिवार को दाह संस्कार के लिए तत्काल आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।
उन्होंने कहा कि वन विभाग की टीम मौके पर सक्रिय है और हाथी को जंगल की ओर खदेड़ने का प्रयास किया जा रहा है। साथ ही ग्रामीणों से अपील की गई है कि वे सतर्क रहें और हाथियों के करीब न जाएं।
📌 बढ़ती घटनाएं बन रहीं चिंता का विषय
लगातार हो रहे हाथी हमले न सिर्फ ग्रामीणों की जान के लिए खतरा बनते जा रहे हैं, बल्कि वन विभाग और प्रशासन की तैयारियों पर भी सवाल खड़े कर रहे हैं। अगर समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले दिनों में हालात और गंभीर हो सकते हैं।