झारखंड के गढ़वा जिले में परमाणु खनिज यूरेनियम के संभावित भंडार को लेकर बड़ा संकेत मिला है। केंद्र सरकार की प्रमुख एजेंसी परमाणु खनिज अन्वेषण एवं अनुसंधान निदेशालय (AMD) की टीम जिले के विभिन्न इलाकों में ड्रिलिंग के जरिए सर्वेक्षण कार्य कर रही है।

यह सर्वे रमना और डंडई प्रखंड के कई क्षेत्रों में चल रहा है, जिससे जिले के भविष्य में बड़े औद्योगिक और आर्थिक बदलाव की उम्मीद जताई जा रही है।


किन इलाकों में चल रहा है सर्वे कार्य

AMD की टीम द्वारा रमना प्रखंड के

  • चुंदी

  • भागोडीह

  • जिरुआ

और डंडई प्रखंड के

  • करके

इलाकों में यूरेनियम की मौजूदगी की जांच की जा रही है।


G-4 से G-2 चरण तक चल रहा है सर्वे

यूरेनियम की खोज G-4 से G-2 चरण तक की जा रही है:

🔹 G-4 चरण

  • प्रारंभिक स्तर पर ड्रिलिंग

  • यूरेनियम की संभावित मौजूदगी की पुष्टि

🔹 G-2 चरण

  • गहन ड्रिलिंग प्रक्रिया

  • खनिज भंडार के आकार और ग्रेड का प्रारंभिक आकलन

यदि इस चरण में सकारात्मक परिणाम मिलते हैं, तो AMD द्वारा व्यवहारिक रिपोर्ट (Feasibility Report) तैयार कर राज्य सरकार को सौंपी जाएगी। इसके बाद खनन पट्टे से जुड़ी कानूनी प्रक्रिया शुरू हो सकती है।


AMD की 5 वर्षीय कार्य योजना के तहत सर्वे

यह पूरा सर्वे AMD की 5-वर्षीय कार्य योजना (2024–2029) के अंतर्गत किया जा रहा है। योजना का उद्देश्य:

  • यूरेनियम के संभावित भंडारों की पहचान

  • उनकी मात्रा और गुणवत्ता का वैज्ञानिक मूल्यांकन

  • तकनीकी मानकों और सुरक्षा नियमों का पालन

फिलहाल गढ़वा जिले में यूरेनियम खनन को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन यह खोज भविष्य की बड़ी परियोजनाओं की ओर संकेत कर रही है।


झारखंड में पहले कहां होता है यूरेनियम खनन

वर्तमान में झारखंड में यूरेनियम खनन मुख्य रूप से पूर्वी सिंहभूम जिले के

  • जादूगोड़ा

  • नरवापहाड़

  • बादुहुरांग

इलाकों में केंद्रित है।


गढ़वा में यूरेनियम मिलने से क्या होंगे फायदे

यदि गढ़वा में यूरेनियम भंडार की पुष्टि होती है, तो इसके कई बड़े फायदे हो सकते हैं:

  • ✔️ जिले में औद्योगिक विकास

  • ✔️ रोजगार के नए अवसर

  • ✔️ झारखंड की आर्थिक मजबूती

  • ✔️ देश के परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम को स्वदेशी यूरेनियम आपूर्ति

  • ✔️ आत्मनिर्भर भारत की दिशा में बड़ा कदम