नए साल की शुरुआत के साथ ही असम सरकार ने अपने लाखों सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए बड़ा तोहफा दे दिया है। मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने घोषणा की है कि राज्य में 8वें राज्य वेतन आयोग का गठन किया जाएगा, जिससे असम देश का पहला ऐसा राज्य बन गया है जिसने 8वें वेतन आयोग के गठन की आधिकारिक घोषणा की है। यह कदम सरकारी कर्मचारियों के आर्थिक सशक्तिकरण और कल्याण की दिशा में एक ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण फैसला माना जा रहा है।
📌 कौन होगा आयोग का अध्यक्ष?
सीएम सरमा ने बताया कि 8वें वेतन आयोग की अध्यक्षता पूर्व अतिरिक्त मुख्य सचिव सुभाष दास करेंगे। केंद्र सरकार द्वारा 8वें केंद्रीय वेतन आयोग की दिशा में कदम बढ़ाने के बाद असम ने सबसे पहले राज्य स्तर पर इसे लागू करने का निर्णय लिया है।
किसे मिलेगा फायदा?
असम में गठित होने वाला यह वेतन आयोग राज्य सरकार के अधीन आने वाले करोड़ों कर्मचारियों और पेंशनरों के वेतन और भत्तों की समीक्षा करेगा। इसका लाभ निम्न कर्मचारियों को मिलेगा—
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राज्य सरकार के सभी सरकारी कर्मचारी
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राज्य पुलिस कर्मी
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सरकारी विभागों के स्थायी कर्मचारी
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सहायताप्राप्त स्कूल-कॉलेज के कर्मचारी
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पेंशनभोगी
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राज्य सरकार से जुड़े अन्य संस्थानों के कर्मचारी
इसके तहत वेतन संरचना, महंगाई भत्ता, पेंशन संशोधन और अन्य आर्थिक सुविधाओं की समीक्षा की जाएगी।
7वें वेतन आयोग के बाद 8वें वेतन आयोग पर नजर
7वें वेतन आयोग का कार्यकाल 31 दिसंबर 2025 को पूरा हुआ है। इसके बाद केंद्र सरकार ने 3 नवंबर 2025 को जस्टिस (रिटायर्ड) रंजना देसाई की अध्यक्षता में 8वें केंद्रीय वेतन आयोग का गठन किया। आयोग को अपनी रिपोर्ट देने के लिए 18 महीने का समय दिया गया है।
आमतौर पर हर 10 वर्ष में वेतन आयोग गठित होता है। माना जा रहा है कि 8वें वेतन आयोग के लागू होने के बाद कर्मचारियों के फिटमेंट फैक्टर, बेसिक पे, महंगाई भत्ता और सैलरी स्ट्रक्चर में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
आगे क्या होगा?
अब सभी की निगाहें आयोग की रिपोर्ट और राज्य कैबिनेट की मंजूरी पर टिकी हैं। उम्मीद जताई जा रही है कि 8वें वेतन आयोग के लागू होने के बाद कर्मचारियों को आर्थिक मजबूती मिलेगी, पेंशनभोगियों को राहत मिलेगी और आर्थिक गतिविधियों पर भी सकारात्मक प्रभाव देखने को मिलेगा।