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झारखंड की बेटी का बड़ा कारनामा! सबसे कम उम्र की ट्राइबल PHD स्कॉलर से मिले CM हेमंत सोरेन, दी 2 लाख की मदद

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने ट्रिपल आईटी रांची की सबसे कम उम्र की ट्राइबल पीएचडी स्कॉलर सविता कच्छप को 2 लाख की प्रोत्साहन राशि देकर सम्मानित किया।

रांची से जुड़ी एक प्रेरणादायक खबर सामने आई है, जिसने पूरे झारखंड को गर्व से भर दिया है। मुख्यमंत्री श्री हेमंत सोरेन से कांके रोड स्थित मुख्यमंत्री आवासीय कार्यालय में ट्रिपल आईटी, रांची में चयनित आदिवासी समुदाय की सबसे कम उम्र की पीएचडी अभ्यर्थी सुश्री सविता कच्छप ने मुलाकात कर राज्य का मान बढ़ाया। इस खास मौके पर मुख्यमंत्री ने उन्हें दिल से बधाई देते हुए उज्जवल भविष्य की शुभकामनाएं दीं।


सरकार ने बढ़ाया कदम, दी 2 लाख की प्रोत्साहन राशि

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सविता कच्छप के साहस, मेहनत और संघर्ष को सलाम करते हुए उनकी पीएचडी की पढ़ाई के लिए झारखंड सरकार की ओर से ₹2 लाख की प्रोत्साहन राशि का चेक उनके परिजनों को सौंपा। यह न सिर्फ एक आर्थिक मदद है, बल्कि एक संदेश भी है कि राज्य सरकार प्रतिभाओं के साथ हमेशा खड़ी है।


कौन हैं Savita Kachhap?

सविता कच्छप मूल रूप से डूंगरी टोली, अरगोड़ा (रांची) की निवासी हैं और वर्तमान में मधुकम स्थित अपनी नानी के घर रहकर पढ़ाई कर रही हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री को बताया कि वे 24 वर्ष की उम्र में आदिवासी समुदाय की सबसे कम उम्र की पीएचडी स्कॉलर बनी हैं, जिनका चयन ट्रिपल आईटी रांची के Electronic Communication Engineering विभाग में हुआ है।

इसके साथ ही वे टेक्निकल फील्ड की पहली Tribal Research Scholar हैं और इंटरनेशनल प्लेटफॉर्म IEEE में अपना रिसर्च वर्क भी प्रस्तुत कर चुकी हैं। यह उपलब्धि न सिर्फ उनके लिए, बल्कि पूरे आदिवासी समाज और झारखंड राज्य के लिए गर्व का क्षण है।


Hemant Soren ने बढ़ाया हौसला

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सविता की प्रशंसा करते हुए कहा कि झारखंड की बेटियां लगातार नई ऊंचाइयां छू रही हैं और राज्य सरकार उनके साथ मजबूती से खड़ी है। उन्होंने सविता को आगे भी पढ़ाई व रिसर्च जारी रखने के लिए प्रेरित किया और कहा कि सरकार हर संभव मदद उपलब्ध कराएगी।


परिवार और समाज के लिए मिसाल बनी Savita

सविता कच्छप की सफलता उन सभी युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो साधारण परिस्थितियों में रहकर भी बड़े सपने देखते हैं। उनका यह सफर साबित करता है कि मेहनत, लगन और सही मार्गदर्शन से हर सपना सच हो सकता है।


निष्कर्ष

यह उपलब्धि न सिर्फ सविता की व्यक्तिगत जीत है, बल्कि झारखंड के लिए गर्व का क्षण है। यह कहानी बताती है कि सही समर्थन और सरकार की पहल से प्रतिभाएं वैश्विक मंच पर चमक सकती हैं। सविता कच्छप आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं और अब पूरा झारखंड उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना कर रहा है।

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