झारखंड के पोटका से विधायक संजीव सरदार पर स्वर्णरेखा परियोजना के दो इंजीनियरों के साथ मारपीट करने का आरोप लगा है। आरोप लगाने वालों में चांडिल नहर प्रमंडल के कार्यपालक अभियंता शिवराम गागराई और सहायक अभियंता विजय तिर्की शामिल हैं। दोनों के अनुसार, सोमवार को वे सुंदरनगर की खरकई दायीं यूजीपीएल योजना के संबंध में चर्चा करने विधायक के तुरामडीह स्थित आवास पहुंचे थे। इस दौरान विवाद हुआ और विधायक ने उनके साथ मारपीट की। हालांकि, विधायक संजीव सरदार ने मारपीट के आरोप को खारिज करते हुए इसे मनगढ़ंत बताया है।

योजना की जानकारी और शिलान्यास को लेकर हुआ विवाद

डिप्लोमा अभियंता संघ की मंगलवार शाम निर्मल भवन में हुई आपात बैठक में दोनों इंजीनियरों ने घटना की जानकारी दी। उनके अनुसार, सोमवार सुबह करीब 11 बजे वे विधायक से मिलने पहुंचे थे। बातचीत के दौरान विधायक ने योजनाओं की जानकारी नहीं देने और शिलान्यास नहीं कराने पर नाराजगी जताई। इंजीनियरों ने बताया कि संबंधित योजना का शिलान्यास वर्ष 2021 में ही हो चुका है। आरोप है कि इसके बाद विधायक ने सहायक अभियंता विजय तिर्की को दो-तीन थप्पड़ मारे। कार्यपालक अभियंता शिवराम गागराई ने बीच-बचाव करने की कोशिश की तो उनके साथ भी मारपीट की गई।

विधायक ने आरोपों को बताया मनगढ़ंत

विधायक संजीव सरदार ने इंजीनियरों के आरोपों का खंडन किया है। उनका कहना है कि उन्होंने अधिकारियों को फटकार लगाई थी, लेकिन मारपीट नहीं की। उन्होंने आरोप लगाने वालों से इसका प्रमाण प्रस्तुत करने को कहा। विधायक के अनुसार, विवाद पुड़ीहासा में नहर के पास बन रही चहारदीवारी और रास्ते से जुड़ा था। ग्रामीणों ने शिकायत की थी कि कुछ लोगों के लिए रास्ता छोड़ा गया है, जबकि अन्य लोगों के रास्ते बंद किए जा रहे हैं। इस शिकायत के बाद उन्होंने सैनिक कॉलोनी के लोगों और ग्रामीणों के सामने इंजीनियरों को बैठाकर मामले पर चर्चा की थी। विधायक ने यह भी कहा कि जिस योजना के शिलान्यास के बारे में सवाल किया गया, वह अलग योजना थी।

माफी तक आंदोलन जारी रखने का ऐलान

घटना को लेकर डिप्लोमा अभियंता संघ ने नाराजगी जताई है। मंगलवार को हुई बैठक में संघ ने कथित मारपीट की निंदा करते हुए आंदोलन जारी रखने का निर्णय लिया। संघ का कहना है कि विधायक के माफी मांगने तक विरोध जारी रहेगा। इसके तहत अगले एक सप्ताह तक इंजीनियर काला बिल्ला लगाकर काम करेंगे।

सरकारी कार्य में बाधा डालने का लगाया आरोप

संघ ने इस घटना को सरकारी कार्य में बाधा डालने से जुड़ा मामला बताया है। बैठक में आगे की आंदोलनात्मक रणनीति पर भी चर्चा हुई। तय किया गया कि एक सप्ताह तक काला बिल्ला लगाकर विरोध दर्ज कराने के बाद संघ की दोबारा बैठक होगी। इसमें आंदोलन के अगले चरण पर निर्णय लिया जाएगा। फिलहाल, मामले में इंजीनियरों के आरोप और विधायक के खंडन के बीच विवाद गहराता नजर आ रहा है।