भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने महंगाई पर काबू पाने के लिए रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट यानी 0.25 फीसदी की बढ़ोतरी कर दी है। इस फैसले के बाद रेपो रेट 5.25% से बढ़कर 5.50% हो गया है। RBI की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) ने यह फैसला सर्वसम्मति से लिया है। करीब चार साल बाद RBI ने रेपो रेट में बढ़ोतरी की है।
रेपो रेट बढ़ने का असर आम लोगों की जेब पर भी पड़ सकता है। खासकर फ्लोटिंग रेट वाले होम लोन, कार लोन और अन्य कर्ज लेने वाले ग्राहकों की EMI बढ़ सकती है या फिर बैंक लोन की अवधि बढ़ा सकते हैं।
क्यों बढ़ाया गया रेपो रेट?
RBI के सामने इस समय महंगाई एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। अगस्त में खुदरा महंगाई दर बढ़कर 4.82% पहुंच गई, जो RBI के 4% के लक्ष्य से लगातार तीसरे महीने ऊपर रही।
इसके अलावा पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेजी भी चिंता का कारण बनी हुई है। भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है। ऐसे में क्रूड महंगा होने पर पेट्रोल-डीजल, ट्रांसपोर्ट और दूसरी चीजों की लागत बढ़ सकती है, जिसका असर महंगाई पर पड़ सकता है।
होम लोन लेने वालों को लगेगा झटका?
रेपो रेट बढ़ने का सबसे सीधा असर फ्लोटिंग रेट वाले लोन पर पड़ सकता है। रेपो रेट बढ़ने से बैंकों के लिए फंडिंग महंगी हो सकती है और इसका असर आगे चलकर ग्राहकों को दिए जाने वाले लोन की ब्याज दरों पर पड़ सकता है।
मसलन, अगर किसी ग्राहक ने 50 लाख रुपये का होम लोन 25 साल के लिए 7.50% ब्याज दर पर लिया है, तो उसकी EMI करीब 36,950 रुपये बैठती है। अगर ब्याज दर 0.25 फीसदी बढ़कर 7.75% हो जाती है, तो EMI करीब 37,766 रुपये हो सकती है।
यानी हर महीने करीब 817 रुपये ज्यादा चुकाने पड़ सकते हैं। सालाना हिसाब से यह अतिरिक्त बोझ करीब 9,800 रुपये हो सकता है। हालांकि वास्तविक असर बैंक की रीसेट डेट, लोन की शर्तों और ब्याज दर में हुए वास्तविक बदलाव पर निर्भर करेगा।
कुछ बैंक EMI बढ़ाने के बजाय लोन की अवधि बढ़ा सकते हैं। वहीं, फिक्स्ड रेट वाले लोन पर तत्काल असर सीमित रह सकता है।
कार और पर्सनल लोन भी हो सकते हैं महंगे
रेपो रेट बढ़ने का असर केवल होम लोन तक सीमित नहीं रह सकता। कार लोन, टू-व्हीलर लोन और पर्सनल लोन की ब्याज दरों पर भी असर पड़ सकता है।
खासकर नए कर्ज लेने वाले ग्राहकों को बढ़ी हुई ब्याज दरों का सामना करना पड़ सकता है। वहीं मौजूदा फ्लोटिंग रेट वाले ग्राहकों की EMI बढ़ सकती है या लोन की अवधि लंबी हो सकती है।
FD कराने वालों के लिए राहत की उम्मीद
जहां रेपो रेट बढ़ने से कर्ज लेने वालों पर अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है, वहीं FD और बचत करने वालों के लिए यह फैसला राहत वाला हो सकता है।
अगर बैंक अपनी जमा दरों में बढ़ोतरी करते हैं, तो नई FD कराने वाले ग्राहकों को पहले की तुलना में बेहतर ब्याज मिल सकता है।
उदाहरण के तौर पर, अगर कोई व्यक्ति 10 लाख रुपये की 1 साल की FD 7% ब्याज दर पर करता है तो उसे करीब 70 हजार रुपये ब्याज मिलेगा। वहीं ब्याज दर 7.25% होने पर ब्याज करीब 72,500 रुपये हो सकता है। यानी करीब 2,500 रुपये अतिरिक्त ब्याज मिल सकता है।
हालांकि पहले से चल रही FD की ब्याज दर आमतौर पर नहीं बदलती। बढ़ी हुई दर का लाभ नई FD कराने या मैच्योरिटी के बाद FD को नई दर पर रिन्यू कराने पर मिल सकता है।
रियल एस्टेट सेक्टर पर क्या होगा असर?
रेपो रेट में बढ़ोतरी का असर रियल एस्टेट सेक्टर पर भी पड़ सकता है। होम लोन महंगा होने की स्थिति में कुछ खरीदार अपने घर खरीदने के फैसले को आगे बढ़ा सकते हैं। खासकर मिड-इनकम वर्ग के खरीदारों पर बढ़ी हुई EMI का असर देखने को मिल सकता है।
हालांकि, आगामी त्योहारी सीजन और घरों की मजबूत मांग को देखते हुए रियल एस्टेट सेक्टर में गतिविधियां जारी रहने की उम्मीद जताई जा रही है।
Signature Global के चेयरमैन प्रदीप अग्रवाल ने क्या कहा?
सिग्नेचर ग्लोबल (इंडिया) लिमिटेड के फाउंडर और चेयरमैन प्रदीप अग्रवाल ने RBI के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि मौजूदा चुनौतीपूर्ण मैक्रो-इकोनॉमिक परिस्थितियों के बीच रेपो रेट में बढ़ोतरी कीमतों में स्थिरता बनाए रखने की RBI की प्राथमिकता को दर्शाती है।
उनके मुताबिक बढ़ती आय, शहरीकरण और घर खरीदने की बढ़ती इच्छा के कारण आवासीय मांग मजबूत बनी हुई है। हालांकि, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव, मुद्रा पर दबाव और महंगाई के जोखिम RBI के लिए चुनौती बने हुए हैं।
प्रदीप अग्रवाल ने यह भी कहा कि लोन की लागत बढ़ने से खासकर मिड-इनकम खरीदारों का उत्साह कुछ समय के लिए प्रभावित हो सकता है। हालांकि मजबूत आधार और आगामी त्योहारी सीजन को देखते हुए उन्होंने रियल एस्टेट सेक्टर में मजबूती बने रहने की उम्मीद जताई।
आम लोगों के लिए क्या समझें?
कुल मिलाकर RBI के इस फैसले का असर लोन लेने वालों और FD कराने वालों पर अलग-अलग तरीके से पड़ सकता है। फ्लोटिंग रेट वाले कर्ज महंगे होने की संभावना है, जबकि बैंक डिपॉजिट रेट बढ़ाते हैं तो नई FD पर बेहतर ब्याज मिल सकता है।
ध्यान रखें: EMI का वास्तविक बदलाव आपके बैंक, लोन की ब्याज दर, रीसेट डेट और लोन की बाकी शर्तों पर निर्भर करेगा।