चाईबासा: झारखंड के छोटे से शहर चाईबासा से शुरू हुआ एस.आर. रुंगटा ग्रुप अब राष्ट्रीय स्तर पर अपनी मजबूत पहचान बना चुका है। रुंगटा माइंस लिमिटेड के नंदलाल रुंगटा और मुकुंद रुंगटा फॉर्च्यून इंडिया की अमीर कारोबारियों की सूची में शामिल हुए हैं। समूह करीब 40 हजार करोड़ रुपये के नेटवर्थ के साथ देश के शीर्ष-100 अमीर कारोबारी समूहों में 61वें स्थान पर पहुंच गया है।

इस उपलब्धि को चाईबासा के साथ-साथ पूरे झारखंड के लिए गौरव का क्षण माना जा रहा है। खास बात यह है कि खनन क्षेत्र से शुरू हुआ रुंगटा परिवार का कारोबार आज खनन, स्टील, बिजली और सीमेंट जैसे कई क्षेत्रों तक फैल चुका है।

1962 में चाईबासा से शुरू हुआ सफर

एस.आर. रुंगटा ग्रुप की शुरुआत वर्ष 1962 में दिवंगत सीताराम जी रुंगटा ने की थी। झारखंड के तत्कालीन बिहार और ओडिशा के खनिज संपदा वाले क्षेत्रों में लौह अयस्क और मैंगनीज खनन से कारोबार की शुरुआत हुई। शुरुआती दौर में समूह मुख्य रूप से खनन कारोबार तक सीमित था।

बाद में दूसरी पीढ़ी में नंदलाल रुंगटा और मुकुंद रुंगटा ने कारोबार की कमान संभाली। बदलती औद्योगिक जरूरतों और बाजार की संभावनाओं को देखते हुए समूह ने खनन से आगे बढ़कर स्टील उत्पादन के क्षेत्र में कदम रखा।

खनन से स्टील तक बढ़ा कारोबार

समूह ने झारखंड के चालियामा और ओडिशा में मैन्युफैक्चरिंग प्लांट स्थापित कर अपने कारोबार का विस्तार किया। इसके तहत स्पंज आयरन, बिलेट्स, पिग आयरन, पेलेट्स, टीएमटी बार और डक्टाइल आयरन पाइप जैसे उत्पादों का निर्माण शुरू किया गया।

तीसरी पीढ़ी में सिद्धार्थ रुंगटा के नेतृत्व में ‘रुंगटा स्टील’ ने भी राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान मजबूत की। आज समूह का कारोबार खनन और स्टील के साथ-साथ पावर और सीमेंट सेक्टर में भी फैला हुआ है।

 

नेटवर्थ में 67 फीसदी का उछाल

फॉर्च्यून इंडिया की सूची में रुंगटा ग्रुप ने करीब 67 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज करते हुए 61वां स्थान हासिल किया है। समूह का नेटवर्थ अब करीब 40 हजार करोड़ रुपये बताया गया है।

देश के बड़े कारोबारी नामों में मुकेश अंबानी और गौतम अडाणी जैसे दिग्गज भी इस सूची में शामिल हैं। ऐसे में चाईबासा से निकले रुंगटा परिवार का देश के शीर्ष कारोबारी समूहों में जगह बनाना झारखंड के लिए भी महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

दशकों पहले चाईबासा से शुरू हुआ रुंगटा परिवार का कारोबार आज राष्ट्रीय स्तर के बड़े औद्योगिक घरानों के बीच अपनी जगह बना चुका है। यह उपलब्धि न केवल रुंगटा परिवार बल्कि चाईबासा की औद्योगिक पहचान के लिए भी अहम मानी जा रही है।