रांची: सेंट जेवियर्स कॉलेज, रांची में 11 सितंबर 2026 को बायोटेक्नोलॉजी विभाग और आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन सेल (IQAC) के संयुक्त तत्वावधान में मलेरिया जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य छात्रों और शिक्षकों को मलेरिया के बदलते स्वरूप, संक्रमण की प्रक्रिया, बचाव के उपायों और आधुनिक चिकित्सा में हो रही प्रगति के प्रति जागरूक करना था।
कार्यक्रम की शुरुआत कॉलेज के प्राचार्य फादर डॉ. रॉबर्ट प्रदीप कुजूर एस.जे. के संबोधन से हुई। उन्होंने मलेरिया के ऐतिहासिक और वर्तमान प्रभावों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मलेरिया पीढ़ियों से एक गंभीर और घातक बीमारी के रूप में चुनौती बना हुआ है। झारखंड के विभिन्न क्षेत्रों में इसके प्रभाव का उल्लेख करते हुए उन्होंने बीमारी से निपटने के लिए जागरूकता और सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर जोर दिया।
ICMR-NIMR वैज्ञानिक ने मलेरिया पर दी विस्तृत जानकारी
कार्यक्रम के तकनीकी सत्र में डॉ. प्रवीण कुमार त्रिपाठी, वैज्ञानिक 'सी' एवं प्रभारी अधिकारी, भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद-राष्ट्रीय मलेरिया अनुसंधान संस्थान (ICMR-NIMR) फील्ड यूनिट, रांची ने विशेष व्याख्यान दिया।
उन्होंने वैश्विक स्तर पर मलेरिया उन्मूलन के प्रयासों और बीमारी के संक्रमण की बदलती परिस्थितियों पर विस्तृत वैज्ञानिक जानकारी दी। डॉ. त्रिपाठी ने एनोफिलीज मच्छर के जीवविज्ञान और प्लास्मोडियम परजीवी के जीवन चक्र को समझाते हुए मलेरिया के वैश्विक बोझ और इसके संचरण की प्रक्रिया पर चर्चा की।
उन्होंने आधुनिक चिकित्सा के सामने मौजूद चुनौतियों, खासकर आर्टेमिसिनिन-प्रतिरोधी मलेरिया स्ट्रेन के उभरने पर चिंता जताई। साथ ही, इस प्रतिरोध की पहचान और निगरानी के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले आनुवंशिक संकेतकों (Genetic Markers) के बारे में भी जानकारी दी।
RTS,S और R21/Matrix-M वैक्सीन पर भी चर्चा
डॉ. त्रिपाठी ने मलेरिया से बचाव के लिए विकसित किए गए आधुनिक टीकों पर भी विस्तार से चर्चा की। उन्होंने RTS,S और R21/Matrix-M जैसे टीकों की प्रभावशीलता, उनके उपयोग से जुड़ी चुनौतियों और शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली पर उनके प्रभाव की जानकारी दी।
इसके अलावा उन्होंने मलेरिया की पहचान के लिए विकसित हो रही उन्नत डायग्नोस्टिक तकनीकों और जैव-प्रौद्योगिकी आधारित नए हस्तक्षेपों के बारे में भी बताया।
सामुदायिक जागरूकता को बताया बेहद जरूरी
इस अवसर पर बायोटेक्नोलॉजी विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. संयुक्ता कुमार ने मलेरिया नियंत्रण के सामाजिक और पर्यावरणीय पहलुओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक अनुसंधान, नए टीके और आधुनिक उपचार मलेरिया उन्मूलन की दिशा में महत्वपूर्ण हैं, लेकिन इन प्रयासों की सफलता के लिए समुदाय की जागरूकता और आम लोगों की सक्रिय भागीदारी भी बेहद जरूरी है।
कार्यक्रम का समापन डॉ. शिव शंकर प्रसाद के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। कार्यक्रम में कॉलेज के उप-प्राचार्य फादर डॉ. अजय मिंज, रजिस्ट्रार फादर प्रभात सोरेंग, डॉ. अल्फ्रेड बेसरा, डॉ. अमित गौतम समेत कॉलेज प्रशासन के अधिकारी, शिक्षक और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।