चाईबासा। पश्चिमी सिंहभूम जिले के चाईबासा में जंगली हाथियों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। मंगलवार देर रात जगन्नाथपुर प्रखंड के कई गांवों में एक दंतैल हाथी ने जमकर उत्पात मचाया। हाथी ने न केवल तीन घरों को क्षतिग्रस्त कर दिया, बल्कि एक ग्रामीण की जान भी ले ली। इस घटना के बाद पूरे इलाके में भय का माहौल है। ग्रामीणों का आरोप है कि कई बार सूचना देने के बावजूद वन विभाग की टीम समय पर नहीं पहुंची, जिसके कारण यह दर्दनाक हादसा हुआ।

घटना जगन्नाथपुर प्रखंड के बुढ़ाकमान, मुगादिघिया, तेंतोड़ीपोसी और लुतुसाई गांव की है, जहां देर रात हाथी के घुसने से अफरा-तफरी मच गई। हाथी ने घरों को नुकसान पहुंचाने के साथ खेतों में लगी फसलों को भी रौंद डाला और घरों में रखा अनाज भी नष्ट कर दिया।

हाथी को भगाने के दौरान गई ग्रामीण की जान

मृतक की पहचान बुढ़ाकमान गांव निवासी 35 वर्षीय चंद्रमोहन सिंकू के रूप में हुई है। स्थानीय लोगों के अनुसार, देर रात गांव में दंतैल हाथी के प्रवेश की सूचना मिलते ही ग्रामीण उसे गांव से बाहर भगाने के लिए जुट गए। इसी दौरान चंद्रमोहन सिंकू हाथी की चपेट में आ गए।

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, हाथी ने पहले उन्हें सूंड से उठाकर जमीन पर पटक दिया और फिर पैरों से कुचल दिया। गंभीर रूप से घायल चंद्रमोहन को तत्काल जगन्नाथपुर सदर अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

तीन घरों को किया क्षतिग्रस्त

हाथी ने गांव में जमकर उत्पात मचाते हुए तीन घरों को पूरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया। कई घरों की दीवारें और छप्पर टूट गए। घरों में रखा खाद्यान्न भी हाथी ने खा लिया या बर्बाद कर दिया।

इसके अलावा खेतों में लगी फसलों को भी हाथी ने रौंद दिया, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि लगातार हाथियों के हमलों के कारण उनकी आजीविका पर संकट गहराता जा रहा है।

ग्रामीणों में दहशत का माहौल

घटना के बाद पूरे इलाके में दहशत का माहौल है। लोगों का कहना है कि पिछले कई दिनों से एक दंतैल हाथी गांवों के आसपास घूम रहा है। शाम ढलते ही लोग घरों से निकलने से डर रहे हैं और बच्चों तथा बुजुर्गों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते वन विभाग प्रभावी कार्रवाई करता, तो इस तरह की घटना को रोका जा सकता था।

वन विभाग पर लापरवाही का आरोप

ग्रामीणों ने वन विभाग पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि हाथी की गतिविधियों की सूचना कई बार विभाग को दी गई, लेकिन हाथी भगाने वाली टीम गांव नहीं पहुंची।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि वन विभाग की निष्क्रियता के कारण ही एक व्यक्ति की जान चली गई। ग्रामीणों ने मांग की है कि प्रभावित क्षेत्रों में स्थायी निगरानी व्यवस्था की जाए और हाथियों को आबादी वाले इलाकों से दूर रखने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।

वन विभाग ने दिया मुआवजे का आश्वासन

घटना की सूचना मिलने के बाद बुधवार सुबह वन विभाग की टीम अस्पताल पहुंची। अधिकारियों ने मृतक के परिजनों से मुलाकात की और सरकारी प्रावधानों के अनुसार मुआवजा उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया।

साथ ही विभाग ने प्रभावित गांवों का निरीक्षण कर नुकसान का आकलन शुरू कर दिया है। अधिकारियों का कहना है कि हाथियों की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है और स्थिति को नियंत्रित करने के प्रयास किए जा रहे हैं।

कोल्हान में लगातार बढ़ रहा मानव-हाथी संघर्ष

कोल्हान क्षेत्र में पिछले कुछ वर्षों से मानव-हाथी संघर्ष की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। जंगलों के सिकुड़ने, भोजन और पानी की कमी तथा हाथियों के पारंपरिक मार्गों में बाधा आने के कारण जंगली हाथी आबादी वाले इलाकों की ओर रुख कर रहे हैं।

इसका सबसे अधिक असर चाईबासा, सरायकेला-खरसावां और आसपास के इलाकों में देखने को मिल रहा है, जहां हर साल फसलों, मकानों और मानव जीवन को नुकसान पहुंचने की घटनाएं सामने आती हैं।

विशेषज्ञों की राय

वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि मानव-हाथी संघर्ष को रोकने के लिए केवल राहत और मुआवजा पर्याप्त नहीं है। इसके लिए हाथियों के पारंपरिक कॉरिडोर की सुरक्षा, जंगलों का संरक्षण, प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली और ग्रामीणों को जागरूक करने जैसे दीर्घकालिक उपाय जरूरी हैं।