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Corona Virus और Black Fungus की तबाही के बाद Zika Virus की Entry, हो जाएं सावधान, लापरवाही पड़ सकती है भारी 

zika virus

Zika Virus:  कोरोना वायरस से भारत उबर भी नहीं पाया है कि “Zika Virus ” ने इंडिया में Entry ले ली है. जीका वायरस ने आते ही तबाही के संकेत दे दिये है. इस वायरस से लोगों के बीच डर का माहौल बनने लगा है. दिन प्रतिदिन जीका वायरस के केस में वृद्धि होती दिख रही है. बात करें इंडिया की, तो केरल राज्य की राजधानी तिरुवनंतपुरम में पिछले सप्ताह से जीका वायरस के 19 मामले सामने आ चुके हैं. इसमें एक गर्भवती महिला भी शामिल है जिसकी उम्र 24 साल बताई जा रही है. केरल के सभी जिलों में मच्छरों से बचने के लिए फॉगिंग और अस्पतालों में खास जांचें शुरू कर दी गई हैं. कोरोना से लड़ रहें भारत के लिए जीका वायरस एक बड़ी चुनौती है.

इस जीका वायरस की वजह से ही पिछले कुछ सालों में दुनिया के कई देशों में बेहद छोटे सिर और अविकसित मस्तिष्क वाले बच्चों ने जन्म लिया हैं. केरल में बढ़ रहें जीका वायरस की खबर को गंभीरता से लेते हुए पड़ोसी राज्य कर्नाटक और तमिलनाडु के साथ मध्यप्रदेश में अलर्ट जारी कर दिया गया है.

Zika Virus
Zika Virus

क्या है Zika Virus

जीका फ्लेविवाइरिडे फैमिली का एक वायरस है. यह डेंगू, यलो फीवर, दिमागी बुखार और वेस्ट नाइल वायरस फैलाने वाले एडीज प्रजाति के मच्छरों के काटने से फैलता है.

क्या है इसके लक्षण

जीका वायरस से संक्रमित कई लोगों में कोई लक्षण दिखाई नहीं देता हैं. कुछ लोगों में बेहद हल्के लक्षण होते हैं, जिससे उन्हें अस्पताल में भर्ती करने की जरूरत नहीं पड़ती. इस वायरस से संक्रमित लोगों के मौत की आशंका भी काफी कम होती है. इसी वजह से जीका के संक्रमण का पता नहीं चल पाता है. यह मच्छरों के काटने से होने वाली दूसरी बीमारी जैसे डेंगू और चिकनगुनिया जैसे ही होती है.

जीका वायरस में सिरदर्द, चकत्ते, आखों का लाल होना, बुखार, मांसपेशियों और जोड़ो में दर्द जैसे लक्षण आमतौर पर पाए जाते है.

Zika Virus का इतिहास

इसका नाम युगांडा के जीका जंगलों के नाम पर पड़ा है. 1947 में जीका जंगल में पहली बार बंदरों को आइसोलेट किया गया था. पांच साल बाद 1952 में युगांडा और तंजानिया में यह पहली बार इंसानों में पाया गया. 2007 में फेडरेटेड स्टेट्स ऑफ माइक्रोनेशिया के आइलैंड यप में जीका वायरस पहली बार फैला. इसके बाद 2013 में जीका वायरस बड़े स्तर पर फ्रेंच पॉलीनेशिया और उसके आसपास छोटे-छोटे देशों में फैला था.

बात करें भारत की तो इस वायरस से संक्रमित लोग पहली बार 1952-53 में पाए गए थे. इससे पहले 2018 में राजस्थान में जीका वायरस के 80 केस मिले थे. वहीं मई 2017 में गुजरात के अहमदाबाद जिले के बापूनगर इलाके में तीन मामले सामने आए थे. इसी तरह जुलाई 2017 में तमिलनाडु के कृष्णागिरी जिले में भी एक संक्रमित पाया गया था.

Zika Virus
Zika Virus

अब तक नहीं बनी है वैक्सीन

जीका वायरस के लिए अभी तक कोई वैक्सीन नहीं बनी है. मच्छरों के जरिए इस वायरस का फैलाव होता है. इसलिए इससे बचने के लिए मच्छरों से बचना ही सबसे अच्छा उपाय है.

Zika Virus से बचने के उपाय

  • मच्छरों से बचने के लिए फुल आस्तीन की शर्ट और पैंट पहनें.
  • ऐसी जगहों पर रहें जहां AC हो और खिड़की, दरवाजों और रोशनदान में जाली लगी हो.
  • घर के भीतर मच्छरों से बचने के लिए तरीकों को अपनाएं.
  • गर्भवती महिलाओं और नवजातों को दूध पिलाने वाली महिलाओं के लिए सुरक्षित मॉस्किटो रैपलेंट (mosquito repellents) का इस्तेमाल करें.
  • दो महीने से कम उम्र के नवजातों और बच्चों के लिए रैपलेंट्स का इस्तेमाल न करें.
  • छोटे बच्चों के लिए मच्छरदानी का इस्तेमाल करें.
  • किसी भी ऐसी जगह यात्रा न करें जहां जीका वायरस के केस मिल रहे हों.

अगर आपको जीका हो जाए तो क्या करें?

  • जीका वायरस की सटीक दवा नहीं. इसके लक्षणों का इलाज किया जाता है.
  • पूरी तरह आराम करें.
  • डिहाइड्रेशन से बचने के लिए भरपूर पानी पिएं.
  • बुखार और दर्द को कम करने के लिए पैरासिटामॉल ले सकते हैं.
  • एस्प्रिन और कोई दूसरी नॉन स्टेरोइडल एंटी इंफ्लेमेटरी ड्रग (NSAID) न लें.
  • अगर आप किसी और बीमारी के लिए दवा लेते हो तो डॉक्टर की सलाह से कोई दवा लें.
  • मच्छरों के काटने से खुद को बचाएं.

संक्रमित की देखभाल करने वाले और आसपास के लोग इससे कैसे बचें?

  • किसी संक्रमित के बॉडी फ्लूड जैसे खून, स्लाइवा, सीमन आदि से दूर रहें.
  • किसी से भी असुरक्षित शारीरिक संबंध न बनाएं.
  • घर में अगर कोई गर्भवती है तो वो मच्छरों से बचें

मरीजों के परिजन खुद को संक्रमण से कैसे बचाएं?

  • संक्रमित के खून और दूसरे बॉडी फ्लूड्स नंगे हाथ से न छुएं.
  • उन जगहों को भी बिना दस्ताने के न छुएं, जहां खून या दूसरे बॉडी फ्लूड्स गिरे हों.
  • देखभाल के तुरंत बाद साबुन और पानी से अच्छी तरह हाथ धोएं.
  • अगर आपके कपड़ों पर संक्रमित का खून या दूसरे बॉडी फ्लूड्स लग जाएं तो उन्हें फौरन उतारकर डिटरजेंट या साबुन से धो दें.
  • ऐसे कपड़ों को धोने के लिए ब्लीच का इस्तेमाल जरूरी नहीं.
  • जिस सतह पर संक्रमित का खून या दूसरे बॉडी फ्लूड गिरे हों, उसे तुरंत क्लीनर या डिसइन्फेक्टेंट से साफ कर दें.

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