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Lakhimpur-Khiri: अबकी बार ‘बटेर’ विपक्ष के ‘हाथ’, डैमेज कंट्रोल भी नहीं कर पा रहे योगी

Lakhimpur-Khiri मामले में डैमेज कंट्रोल भी नहीं कर पा रहे योगी

न्यूज डेस्क/ समाचार प्लस – झारखंड-बिहार

लखीमपुर-खीरी में किसानों समेत 8 लोगों की मौत के बाद उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने जिस तरह से आश्रितों के लिए मुआवजे और नौकरियों की घोषणा की, उससे लगा कि इस घटना से भाजपा का जो डैमेज हुआ था, उसे उन्होंने कंट्रोल कर लिया है। लेकिन विपक्षी दल योगी सरकार पर जिस प्रकार से फिलहाल हमलावर हैं, उससे नहीं लगता कि लखीमपुर-खीरी में लगी आग इतनी आसानी से बुझ पायेगी। माहौल भी चुनावी है, और विपक्ष को लग रहा है कि वोट का रास्ता लखीमपुर खीरी से होकर गुजरेगा।

विपक्ष की राजनीति अपनी जगह है, लेकिन सरकार का दोषियों के प्रति अब तक ठोस कदम नहीं उठाया जाना योगी आदित्यनाथ को कटघरे में खड़ा कर रहा है। उन पर तानाशाही रवैया अपनाये जाने के आरोप लगने लगे हैं। लखीमपुर-खीरी की घटना विकृत मानसिकता रखने वालों का एक क्रूर उदाहरण है। यह ऐसी हिंसा है जिसे कभी सहन नहीं किया जा सकता। मगर इस हिंसा का भी कोई जवाब हो सकता है, लेकिन जानबूझ कर अब फैलायी जा रही ‘राजनीतिक हिंसा’ का क्या उपाय हो सकता है?

योगी आदित्यनाथ क्यों हैं कटघरे में?

योगी आदित्यनाथ थोड़े ही दिनों के अंतर पर हुई दो घटनाओं के कारण बुरी तरह से घिरे हुए हैं। हाल ही में अपने साढ़े चार साल की उपलब्धियों की रिपोर्ट पेश करने वाले योगी आदित्यनाथ इन दो घटनाओं का समाधान ढूंढने में व्यस्त हैं। इन दो घटनाओं ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में हलचल मचा दी है। एक घटना तो मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गृह जनपद गोरखपुर की ही है। यह मामला एक होटल में कानपुर के एक कारोबारी की पुलिस की कथित पिटाई से हुई मौत से जुड़ा है। इस मामले में रामगढ़ताल थाने के प्रभारी, गोरखपुर के पुलिस अधीक्षक और जिलाधिकारी की भूमिका सवालों के घेरे में है। फिर भी व्यापारी की मौत के मामले को तो योगी ने तेजी से सम्भाल लिया था। व्यापारी की पत्नी को सरकारी नौकरी और 40 लाख रुपये की मदद देकर विपक्ष को इसे मुद्दा नहीं बनाने दिया। इसी बीच जिले के पुलिस अधीक्षक और जिलाधिकारी का समझौता कराने की कोशिशों वाला एक वीडियो वायरल हो गया। इस वीडियो के वायरल होने के बाद उम्मीद की जा रही थी कि इन अधिकारियों पर गाज गिरेगी, लेकिन हुआ कुछ नहीं।

लखीमपुर-खीरी की घटना योगी सरकार की गले की हड्डी

व्यापारी की हत्या का मामला तो मान लीजिये ‘हैंडल’ हो गया, लेकिन लखीमपुर खीरी में हुई हिंसा योगी सरकार के गले की फांस बनी हुई है। हालांकि योगी सरकार ने यहां भी मारे गये किसानों के परिवारों को 45-45 लाख रुपये का मुआवजा, सरकारी नौकरी देने के साथ घायलों को दस-दस लाख रुपये देने की घोषणा कर दी है। साथ ही घटना की न्यायिक जांच का आदेश भी दिया। लेकिन सारा मामला अटका हुआ है दोषी केंद्रीय गृह राज्यमंत्री अजय मिश्रा के बेटे के विरुद्ध कार्रवाई को लेकर। हालांकि अजय मिश्रा के बेटे के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कर ली गयी है, लेकिन अब तक उसके विरुद्ध कोई प्रत्यक्ष कार्रवाई नहीं किया जाना ही योगी आदित्यनाथ की कार्यशैली पर प्रश्न चिह्न लगा रहा है।

केशव प्रसाद मौर्य के विरोध-प्रदर्शन के दौरान घटना

घटना केंद्रीय गृह राज्यमंत्री अजय मिश्रा के गांव की है। अवसर था गांव में आयोजित वार्षिक कुश्ती प्रतियोगिता का। इसी कार्यक्रम में शामिल होने राज्य के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य पहुंचे थे, जिनके खिलाफ विरोध-प्रदर्शन किसान कर रहे थे। घटना के बाद किसानों ने आरोप लगाया कि अजय मिश्रा के समर्थकों की गाड़ी से किसानों की टक्कर मारी गयी जिससे छह किसानों की मौत हो गयी। किसानों का आरोप था कि अजय मिश्र के बेटे अभय मिश्र उर्फ मोनू ने जानबूझ कर किसानों को गाड़ी से कुचलने की कोशिश की। हालांकि गृह राज्यमंत्री अजय कुमार मिश्रा ने घटनास्थल के पास अपने बेटे की मौजूदगी से इनकार किया। इस हिंसा में कुल आठ लोगों की मौत हुई है। जिनमें चार किसान हैं और चार अन्य लोग हैं।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा है कि हम कारणों की विस्तार से जांच करेंगे और आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। लेकिन विपक्ष हाथ आयी ‘बटेर’ को अबकी बार नहीं छोड़ना चाहता। क्योंकि यह मौका चूकने का मतलब है आगामी विधानसभा चुनाव में बहुत बड़ा राजनीतिक नुकसान।

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