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World Tribal Day 2022: पूरी दुनिया को आदिवासियों की चिंता, पर नहीं बदल पा रही बदहाल सूरत

World Tribal Day: The world is worried about the tribals, but the bad condition is not changing

World Tribal Day 2022: 1994 में “संयुक्त राष्ट्र संघ” की महासभा ने प्रतिवर्ष 9 अगस्त को “INTERNATIONAL DAY OF THE WORLD’S INDIGENOUS PEOPLE” मनाने का निर्णय लिया था। यही दिवस विश्व आदिवासी दिवस के रूप में स्थापित हो गया है। 24 अक्टूबर 1945 में अपने गठन के के 50 वर्षों बाद “संयुक्त राष्ट्र संघ” ने यह महसूस किया है कि विश्व के विभिन्न देशों में निवासरत जनजातीय (आदिवासी) समाज अपनी उपेक्षा, गरीबी, अशिक्षा, स्वास्थ्य सुविधा का अभाव, बेरोजगारी एवं बंधुआ मजदूर जैसे समस्याओं से ग्रसित हैं। इनके और इनकी समस्याओं के प्रति दुनिया का ध्यान आकर्षित करने के लिए वर्ष 1994 में “संयुक्त राष्ट्र संघ” के महासभा ने प्रतिवर्ष 9 अगस्त को “INTERNATIONAL DAY OF THE WORLD’S INDIGENOUS PEOPLE” मनाने का निर्णय लिया था। इसके पश्चात अमेरिकी महाद्वीप, अफ्रीकी महाद्वीप तथा एशिया महाद्वीप के आदिवासी बाहुल्य देशों में 9 अगस्त को “विश्व आदिवासी दिवस” मनाया जाना शुरू हुआ जिनमें भारत भी प्रमुखता से शामिल है।

आदिवासी दिवस भारत समेत दुनिया के आदिवासी समाज की अस्मिता की रक्षा के साथ उनकी भाषा–संस्कृति व स्वशासन-परम्परा के संरक्षण और विकास के साथ-साथ जल–जंगल–जमीन व खनिज के पारंपरिक अधिकार के लिए संकल्पबद्ध होने का दिवस हैI लेकिन सचाई यह कि भारत की पिछली सरकारों ने न तो इस दिवस की महत्ता के बारे में कभी न तो देश के आम नागरिकों बताया और न ही इस देश आदिवासियों को अपने अधिकारों के लिए कभी जागरूक और प्रोत्साहित करने का उपाय किया।  यह सच सिर्फ भारत का ही नहीं है, भारत समेत अनेकों देशों के लोकतान्त्रिक शासन में आज भी आदिवासियों की हालत ‘दोयम दर्जे’ की बनी हुई हैI प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आदिवासियों की स्थिति पर गौर किया और 2021 में पूरे भारत में जनजातीय महोत्सव मनाने की परम्परा की शुरुआत की। आज भी झारखंड समेत देशभर में जनजातीय महोत्सव मनाया जा रहा है।

राज्य और जनजातियां

भारत में जनजातीय समुदाय के लोगों की संख्या काफी बड़ी है। देश में 50 से भी अधिक जनजातियां निवास करती हैं। आदिवासियों की बड़ी संख्या रहने के बाद भी और इनका राजनीतिक फायदा लिये जाने के बाद भी ये देश में शोषितों के रूप में जीवन जीने को मजबूर हैं। जमीनें हड़पे जाने से लेकर धर्मांतरण का सबसे अधिक शिकार भी यही जनजातीय रहें। अब यही देखना है कि कितने आदिवासी दिवस मनाने के बाद इनकी तकदीर और बदहाल सूरत सुधरती है। देश की प्रमुख जनजातियां निम्नलिखित हैं-

  • आंध्र प्रदेश- चेन्चू, कोचा, गुड़ावा, जटापा, कोंडा डोरस, कोंडा कपूर, कोंडा रेड्डी, खोंड, सुगेलिस, लम्बाडिस, येलडिस, येरुकुलास, भील, गोंड, कोलम, प्रधान, बाल्मिक।
  • असम व नगालैंड – बोडो, डिमसा गारो, खासी, कुकी, मिजो, मिकिर, नागा, अबोर, डाफला, मिशमिस, अपतनिस, सिंधो, अंगामी।
  • झारखंड- मुण्डा,  संताल (संथाल, सौतार), उरांव, खड़िया, गोण्ड, कोल, कनबार, सावर, असुर, बैगा, बंजारा,  बथूड़ी, बेदिया, बिंझिया, बिरहोर, बिरजिया, चेरो, चिक बड़ाईक, गोराइत, हो, करमाली, खरवार, खोंड, किसान, कोरा, कोरबा, लोहरा, महली, माल पहाड़िया, पहाड़िया, सौरिया पहाड़िया, भूमिज।
  • महाराष्ट्र- भील, गोंड, अगरिया, असुरा, भारिया, कोया, वर्ली, कोली, डुका बैगा, गडावास, कामर, खडिया, खोंडा, कोल, कोलम, कोर्कू, कोरबा, मुंडा, उरांव, प्रधान, बघरी।
  • पश्चिम बंगाल- होस, कोरा, मुंडा, उरांव, भूमिज, संथाल, गेरो, लेप्चा, असुर, बैगा, बंजारा, भील, गोंड, बिरहोर, खोंड, कोरबा, लोहरा।
  • हिमाचल प्रदेश- गद्दी, गुर्जर, लाहौल, लांबा, पंगवाला, किन्नौरी, बकरायल।
  • मणिपुर- कुकी, अंगामी, मिजो, पुरुम, सीमा।
  • मेघालय- खासी, जयन्तिया, गारो।
  • त्रिपुरा – लुशाई, माग, हलम, खशिया, भूटिया, मुंडा, संथाल, भील, जमनिया, रियांग, उचाई।
  • कश्मीर- गुर्जर।
  • गुजरात- कथोड़ी, सिद्दीस, कोलघा, कोटवलिया, पाधर, टोड़िया, बदाली, पटेलिया।
  • उत्तर प्रदेश- बुक्सा, थारू, माहगीर, शोर्का, खरवार, थारू, राजी, जॉनसारी।
  • उत्तरांचल-  भोटिया, जौनसारी, राजी।
  • केरल- कडार, इरुला, मुथुवन, कनिक्कर, मलनकुरावन, मलरारायन, मलावेतन, मलायन, मन्नान, उल्लातन, यूराली, विशावन, अर्नादन, कहुर्नाकन, कोरागा, कोटा, कुरियियान, कुरुमान, पनियां, पुलायन मल्लार, कुरुम्बा।
  • छत्तीसगढ़-  कोरकू, भील, बैगा, गोंड, अगरिया, भारिया, कोरबा, कोल, उरांव, प्रधान, नगेशिया, हल्वा, भतरा, माडिया, सहरिया, कमार, कंवर।
  • तमिलनाडु- टोडा, कडार, इकला, कोटा, अडयान, अरनदान, कुट्टनायक, कोराग, कुरिचियान, मासेर, कुरुम्बा, कुरुमान, मुथुवान, पनियां, थुलया, मलयाली, इरावल्लन, कनिक्कर, मन्नान, उरासिल, विशावन, ईरुला।
  • कर्नाटक-    गौडालू, हक्की, पिक्की, इरुगा, जेनु, कुरुव, मलाईकुड, भील, गोंड, टोडा, वर्ली, चेन्चू, कोया, अनार्दन, येरवा, होलेया, कोरमा।
  • ओडिशा- बैगा, बंजारा, बड़होर, चेंचू, गड़ाबा, गोंड, होस, जटायु, जुआंग, खरिया, कोल, खोंड, कोया, उरांव, संथाल, सआरा, मुन्डुप्पतू।
  • पंजाब- गद्दी, स्वागंला, भोट।
  • राजस्थान- मीणा, भील, गरासिया, सहरिया, सांसी, दमोर, मेव, रावत, मेरात, कोली।
  • अंडमान-निकोबार द्वीप समूह- औंगी आरबा, उत्तरी सेन्टीनली, अंडमानी, निकोबारी, शोपान।
  • अरुणाचल प्रदेश- अबोर, अक्का, अपटामिस, बर्मास, डफला, गालोंग, गोम्बा, काम्पती, खोभा, मिश्मी, सिगंपो, सिरडुकपेन।

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