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आज World Tourism Day, झारखंड के हर जिले में पर्यटन की है असीम संभावनाएं

झारखंड के हर जिले में पर्यटन की है असीम संभावनाएं

न्यूज़ डेस्क/समाचार प्लस झारखंड -बिहार

जिस तरह सूचना के लेन देन से दो लोगों के बीच एक रिश्ता जुड़ता है वैसे ही पर्यटन से भी दो देश एक दूसरे के साथ जुड़ते है. पर्यटन के माध्यम से हमें दूसरे स्थानों, सभ्यताओं और संस्कृतियों के बारे में पता चलता है. आज यानी 27 सितंबर 2021 को पूरी दुनिया वर्ल्ड टूरिज्म डे मना रही है. बता दें कि हर साल 27 सितंबर को विश्व पर्यटन दिवस के रूप में मनाया जाता है.
गौरतलब है कि दुनिया में सबसे ज्यादा नौकरी देने वाले सेक्टर पर्यटन ही है. लेकिन, कोरोना महामारी के कारण इस सेक्टर पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ा है और लोग इसे छोड़ने को मजबूर हो गए हैं.

विश्व पर्यटन दिवस का इतिहास

संयुक्त राष्ट्र विश्व पर्यटन संगठन (World Tourism Organization) की स्थापना आज के दिन साल 1980 में की गई थी. साल 1970 में विश्व पर्यटन संस्था ने विश्व पर्यटन दिवस की शुरुआत की थी. इसके बाद साल 1980 में 27 सितंबर को पहली बार को विश्व पर्यटन दिवस मनाया गया था. इसे स्थापित करने के पीछे यह कारण था कि इससे दुनिया-भर में सामाजिक, सांस्कृतिक, राजनीतिक और आर्थिक मूल्यों और अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के भीतर पर्यटन की भूमिका को बढ़ाया जा सके. विश्व पर्यटन संस्था की ओर से कहा गया कि पर्यटन के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए इस दिन को मनाया जाना बेहद जरूरी है.

विश्व पर्यटन दिवस 2021 की थीम

इस साल विश्व पर्यटन दिवस 2021 के मौके पर ‘इंक्लूसिव ग्रोथ के लिए पर्यटन’ की थीम रखी गई है. इस थीम के माध्यम से पर्यटन क्षेत्र से जुड़े लोगों को हर संभव मदद करने का प्रयास किया जाएगा. यूएनडब्ल्यूटीओ (UNWTO) ने इस साल विश्व पर्यटन दिवस के मौके पर पर्यटकों, संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों, सदस्य राज्यों और गैर-सदस्यों से आग्रह किया है कि वह यूनिक तरीके से इस खास दिन को मनाने की कोशिश करें.

रांची में घूमने और देखने लायक कई जगहें हैं

झारखंड की राजधानी रांची में घूमने और देखने लायक कई जगहें हैं. यदि आपको प्राकृतिक नजारे लुभाते हैं तो आप दशम, जोनहा और हुंडरू जलप्रपात देख सकते हैं. हुंडरू फॉल 320 फीट की ऊंचाई से गिरता है. रांची का रॉक गार्डन भी काफी मशहूर है. साहित्य से जुड़े लोगों के लिए टैगोर हिल का खास महत्व है. टैगोर हिल रवींद्रनाथ के बड़े भाई ज्योतिंद्रनाथ का आश्रम था. अल्बर्ट एक्का चौक से करीब तीन किमी दूर इस हिल से सूर्योदय और सूर्यास्त देखना अच्छा लगता है. इतिहास में रुचि रखने वालों के लिए पहाड़ी मंदिर खास हैं. यूं तो पहाड़ी मंदिर भगवान शिव को समर्पित है लेकिन पहले इसे फांसी टोंगरी के नाम से जाना जाता था. आजादी के पहले यहां स्वतंत्रता सैनानियों को फांसी दी जाती थी.

झारखंड के पर्यटन स्थल

हज़ारीबाग़ की पाषाणकालीन गुफाएं : हजारीबाग के बड़कागांव प्रखंड में अवस्थित इन पाषाणकालीन गुफाओं में प्राचीन चित्रकारी के नमूने अब भी लोगों को चकित कर देते हैं.

हुंडरू जलप्रपाप्त, रांची : रांची-मुरी मार्ग में स्वर्णरेखा नदी पर स्थित यह झरना प्रकृति का अनुपम उपहार है। हुंडरू जलप्रपात झारखंड में सर्वाधिक ऊँचाई से गिरने वाला प्रपात है.

जोन्हा जलप्रपात, रांची : यह रांची-मुरी रोड पर है, जिसकी सुंदरता देखते बनती है.

दशम जलप्रपात : रांची-जमशेदपुर रोड पर स्थित बुंडू कस्बे में यह मनोहारी झरना है.

पंचघाघ जलप्रपात : छोटा नागपुर पठार के प्रदेश का यह जलप्रपात रांची-चाईबासा के बीच खूंटी-चकरधरपुर इलाके में पड़ता है.

बेतला अभयारण्य : पलामू का बेतला राष्ट्रीय उद्यान देश की प्रमुख बाघ और हाथी परियोज़ना के रूप में भी मशहूर है. इस परियोज़ना ने एक और जहाँ वन्य प्राणियों को आश्रय प्रदान किया है, आसपास के इलाकों जैसे नेतरहाट आदि को प्रसिद्ध कर दिया है। बेतला का पार्क हाथियों के सरंक्षण के अलावा सैलानियों के आकर्षण का भी केंद्र है.

नेतरहाट का पहाड़ और सनसेट प्वाइंट : गर्मियों में भी नेतरहाट का मौसम बेहद सुकून भरा रहता है, यहां मंगोलिया पॉइन्ट, पाइन फारेस्ट, नेतरहाट स्कूल दर्शनीय स्थल हैं.

दलमा अभयारण्य: रांची-जमशेदपुर मार्ग पर अवस्थित यह दलमा अभयारण्य सैकड़ों वन्य प्राणियों का प्राकृतिक आश्रय स्थल है.

बिरसा जैविक उद्यान, ओरमांझी: रांची-हज़ारीबाग़ रोड पर स्थित यह उद्यान सैलानियों के आकर्षण का केंद्र है.

संजय गांधी जैविक उद्यान, हज़ारीबाग़ : कभी हजारीबाग को हज़ार बागों का शहर कहा जाता था, यह जैविक उद्यान उसी कड़ी का एक हिस्सा है.

प्रमुख धार्मिक स्थलें

बाबा टांगीनाथ धाम: डुमरी गुमला झारखंड के प्राकृतिक सौंदर्य के बीच बाबा टांगीनाथ धाम पहाड़ी पर स्थित है बाबा टांगीनाथ धाम शैव स्थल होने के साथ-साथ शक्ति तथा सूर्य एवं वैष्णव धर्म समूह के प्राचीन मूर्तियां देखने को मिलती है. इनके साथ यहां का विशेष आकर्षण अद्भुत अद्वितीय अक्षय त्रिशूल जो कि खुले आकाश के नीचे लगभग चौथी से छठी शताब्दी के आसपास से यहां पर बिना जंग के खुले आसमान के नीचे अपना सीना तान खड़ी है यहां महाशिवरात्रि तथा श्रावण मास कार्तिक पूर्णिमा में हजारों लाखों श्रद्धालु एवं भक्त पूजा के लिए आते हैं.

वैद्यनाथ धाम, देवघर : देवघर में हर साल सावन के महिने में और महाशिवरात्रि में लाखों श्रद्धालु भगवान शिव लिंग को जल अर्पित करने कई राज्यों से आते हैं। बैद्यनाथ ज्‍योतिर्लिंग स्थित होने के कारण इस स्‍थान को देवघर नाम मिला है.

वासुकीनाथ मंदिर, दुमका : देवघर के शिवालय के अलावा हिन्दू श्रद्धालु इसके दर्शन के लिए भी आते हैं। वैद्यनाथ मन्दिर की यात्रा तब तक अधूरी मानी जाती है जब तक दुमका जिला के वासुकीनाथ मंदिर में दर्शन नहीं किये जाते.

दुमका: मंदिरों का गांव मलूटी


रजरप्पा का छिन्मस्तिका मंदिर : इसे देश का प्रमुख शक्तिपीठ माना जाता है.

जगन्नाथ मंदिर और मेला, रांची : उड़ीसा के पुरी जगन्नाथ रथ की तरह यहां भी रथ मेला लगता है और मंदिर भी पुरी धाम की अनुकृति है.

इटखोरी का बौद्ध अवशेष और काली काली मंदिर : इस जगह पर बुद्ध परंपरा के प्राचीन अवशेष हैं और पास में ही भद्रकाली का भव्य मंदिर है.

पहाड़ी मंदिर, रांची : शहर के मध्य में स्थित शिव का यह मंदिर बेहद लोकप्रिय है.

सूर्य मंदिर, बुंडू : भगवान सूर्य की आराधना के लिए समर्पित यह मंदिर बेहद मनोहारी है.

दिउड़ी मंदिर, तमाड़ : यहां देवी दुर्गा की प्राचीन प्रतिमा है, जो बहुत से लोगों को आकर्षित करती है.

पारसनाथ स्थल : श्री समेद शिखरजी तीर्थस्थल जैनियों का पवित्र स्थल है.


जीइएल चर्च, रांची : गोस्सनर एवंजलिकल चर्च रांची के सबसे पुराने गिरिजाघर में से एक है.

संत मारिया रोमन कैथोलिक चर्च : रांची में स्थित यह रोमन कैथोलिक चर्च कामिल बुल्के पथ पर मौजूद है, जो सबसे प्रमुख मसीही संस्थान है.

प्रमुख दर्शनीय स्थल
मैक्लुस्कीगंज, रांची : एंग्लो-इंडियन समुदाय के एकमात्र गांव को एक इंग्लिश अफसर मैक्लुस्की ने देश भर के एंग्लो-इंडियन को बुलाकर बसाया था, हालांकि पहले वाली बात नहीं रही और ना उस संख्या में एंग्लो इंडियन समुदाय, पर अब भी कई कॉटेज, हवेली यहां मौजूद हैं, जिसे देखने लोग आते हैं.

टैगोर हिल, रांची : कवीन्द्र रवीन्द्र नाथ टैगोर फुर्सत के पलों में अपने रांची प्रवास के दौरान यहां आया करते थे। मोरहाबादी इलाके की इस पहाड़ी का नामकरण उनकी याद में किया गया है.

झारखण्ड वार मेमोरियल, रांची : यह सैनिकों की अदम्य वीरता की याद कायम करने के लिए दीपाटोली में स्थापित किया गया है.

नक्षत्र वन. रांची : राजभवन यानि गवर्नर हाउस में इसे औषधीय पौंधों और फूलों के बगीचे के साथ इसे बनाया गया है.

रातू का किला : छोटानागपुर महाराजा का इस्टेट और महल रांची से कुछ ही दूरी पर है, जो कई समारोह का केंद्र बनता है.

जुबली पार्क, जमशेदपुर : टाटा कंपनी के सौजन्य से यह पार्क जमशेदपुर में बनाया गया है, जो शहर की शान है.
इन प्रमुख पर्यटन स्थलों के अलावा भी झारखंड रिति-रिवाजों और खान-पान के लिए मशहूर हैं. चाहे आप भक्ति रस में यकीन रखते हैं या रोमांचक अनुभव पाना चाहते हों, झारखंड का पर्यटन आपको ताउम्र याद रहेगा.

झारखंड में टूरिज्म के कई आयाम हो रहे हैं विकसित 

झारखंड में टूरिज्म के कई आयाम विकसित हो रहे हैं। धार्मिक पर्यटन के अलावा, इको टूरिज्म, क्रूज टूरिज्म, खनन टूरिज्म, आदिवासी और एडवेंचर टूरिज्म की हमारे यहां काफी गुंजाइश है. बस जरूरी है सरकारी और सामाजिक प्रतिबद्धता की. यहां के गांवों और ग्रामसभाओं के परामर्श को प्राथमिकता देनी होगी. गांवों की विरासत के साथ छेड़छाड़ न हो, इसके लिए पंचायतों की राय को सर्वोपरि स्थान देना होगा. ऐसा हुआ तो फिर एक स्वस्थ टूरिज्म विकसित किया जा सकता है.  जिससे सरकार को तो रेवेन्यू मिलेगा ही मिलेगा, स्थानीय लोग भी संपन्न हो सकते हैं।कोशिश यह होनी चाहिए कि झारखंड के पर्यटन स्थलों को लोग यहां के प्राकृतिक सौंदर्य और सांस्कृतिक समृद्धि के लिए जानें.

क्या कहते हैं आंकड़े

मार्च 2020 में कोरोना के दस्तक के बाद वैसे तो हर सेक्टर प्रभावित हुआ है, फिर भी आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2000 में राज्य में विदेशी पर्यटकों की संख्या केवल 172 थी, जो वर्ष 2019 में बढ़कर 1,76,043 हो गई. यह आंकड़ा साल-दर-साल बढ़ता ही जा रहा है भारत पर्यटन सांख्यिकी 2019 की रिपोर्ट के अनुसार, राज्य में विदेशी पर्यटकों की संख्या में वृद्धि के कारण राज्य की रैंकिंग में भी वृद्धि हुई है. इसी तरह घरेलू पर्यटकों के आगमन के मामले में, राज्य की राष्ट्रीय रैंकिंग, जहां यह 13 थी, अप्रत्याशित रूप से बढ़ी है, इसमें देश में राज्य की रैंकिंग 9 है.

घरेलू पर्यटकों की संख्या बढ़ी है 

राज्य स्थापना अवधि 2000 तक आने वाले घरेलू पर्यटकों की संख्या केवल 23991 थी. इसी समय विदेशी पर्यटकों की संख्या केवल 172 थी. लेकिन 20 साल बाद राज्य में आने वाले घरेलू पर्यटकों की संख्या 3,55,80,768 है. वर्ष 2011 में, 1,45,80,387 घरेलू पर्यटकों ने राज्य का दौरा किया था. यहां आने वाले विदेशी पर्यटकों की संख्या 87,521 थी. वर्ष 2017 में राज्य में 3,37,23,185 घरेलू और 1,70,987 विदेशी पर्यटक आए. वर्ष 2018 में 3,54,08,822 घरेलू और 1,75,801 विदेशी पर्यटक आए.

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