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World Polio Day: पोलियो मुक्त होने के बाद भारत में ‘दो बूंद जिंदगी की’ क्यों है जरूरी?

World Polio Day

न्यूज डेस्क/ समाचार प्लस – झारखंड-बिहार

पोलियो से लड़ाई में ‘दो बूंद जिंदगी के’ ने पूरी दुनिया में साबित किया कि मानव स्वास्थ्य को खतरनाक बीमारी से बचाने के लिए ये दो बूंद कितनी महत्वपूर्ण है। इसलिए हर साल 24 अक्टूबर को पूरे विश्व में ‘विश्व पोलियो दिवस’ (World Polio Day) मनाया जाता है। वैसे तो आधिकारिक तौर पर भारत में 2014 से अभी तक एक भी पोलियो का केस सामने नहीं आया है। लेकिन भारत में दोबारा पोलियो का प्रवेश न हो सके, इसके लिए देशव्यापी पल्स पोलियो अभियान समय-समय पर चलाया जाता है। बता दें, साल 2014 में ही विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने भारत को पोलियो मुक्त घोषित किया था।

गौरतलब है कि दक्षिण-पूर्व एशिया सहित भारत को वर्ष 2014 में पोलियो-मुक्त घोषित किया गया था। पोलियो-मुक्त होने के बावजूद भारतीय नीति-निर्माताओं द्वारा पोलियो पर इतना ध्यान इसलिए दिया जा रहा है, क्योंकि पोलियो वायरस के भारत में वापस आने का खतरा है।

पोलियो यानी पोलियोमाइलिटिस

पोलियो एक संक्रामक रोग है। यह एक ऐसे वायरस से उत्‍पन्‍न होता है, जो गले तथा आंत में रहता है। पोलियोमाइलिटिस एक ग्रीक शब्‍द पोलियो से आया है जिसका अर्थ है ‘भूरा’, माइलियोस का अर्थ है मेरु रज्‍जु और आइटिस का अर्थ है प्रज्‍वलन। यह आम तौर पर एक व्‍यक्ति से दूसरे व्‍यक्ति में संक्रमित व्‍यक्ति के मल के माध्यम से फैलता है। यह नाक और मुंह के स्राव से भी फैलता है। हालांकि, यह मुख्यतः एक से पांच वर्ष की आयु के बच्चों को ही प्रभावित करता है, क्योंकि उनमें रोग प्रतिरोधक क्षमता पूरी तरह विकसित नहीं हुई होती है।

भारत में पल्स पोलियो अभियान की आवश्यकता
  • भारत में पल्स पोलियो अभियान की आवश्यकता इसलिए है, क्योंकि पाकिस्तान और अफगानिस्तान में अभी भी पोलियो वायरस सक्रिय है। यह पोलियो वायरस इन देशों से आने वाले वयस्कों के माध्यम से आसानी से भारत में प्रवेश कर सकता है।
  • WHO के मुताबिक, 2016 में पाकिस्तान ने 20 वन्य पोलियो वायरस के मामले दर्ज किये जबकि अफगानिस्तान में 13 मामले सामने आये थे। WHO ने यह भी कहा है कि अंतरराष्ट्रीय यात्रियों से वायरस फैलने का खतरा अधिक रहता है।
  • चीन के पोलियो मुक्त होने के 10 साल बाद 2011 में झिंजियांग प्रांत में लकवाग्रस्त पोलियो के 21 मामले और दो मौतों की खबरें सामने आई थी। अनुसंधान में पता चला कि चीन में यह वायरस पाकिस्तान के रास्ते प्रवेश किया था।
  • वर्तमान में अन्य देशों से पोलियो वायरस के खिलाफ भारत का एकमात्र बचाव इसका सशक्त और सुस्पष्ट टीकाकरण कार्यक्रम है। नवजात शिशुओं के बीच टीकाकरण का अल्प अंतराल भी भारत में इस विषाणु के प्रवेश के लिए पर्याप्त हो सकता है।
  • पल्स अभियान एक ही बार में पूरी आबादी को वैक्सीन की एक ‘पल्स’ देने का प्रयास रहता है। नियमित टीकाकरण विकसित देशों में सफल रहा, क्योंकि वहा के लोगों में टीकाकरण को लेकर जागरूकता का उच्च स्तर रहा है। लेकिन भारत की सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियों को देखते हुए यहां एक अलग रणनीति की जरूरत है।

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