समाचार प्लस
Uncategories झारखण्ड राँची स्वास्थ्य

रांची के बिरसा एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी में वर्ल्ड आटिज्म डे मनाया गया, डॉ. U. S. Verma ने बच्चों का किया निशुल्क जांच

2 अप्रैल 2022 को बिरसा कृषि विश्वविद्यालय अस्पताल में विश्व ऑटिज्म जागरूकता दिवस सफलता पूर्वक मनाया गया , इसे हिंदी में स्वलीनता या आत्मबीमोह कहा जाता है|

इस जागरूकता दिवस का उद्घाटन बिरसा कृषि विश्वविद्यालय, रांची के कुलपति डॉ ओ एन सिंह ने की , विश्वविद्यालय अस्पताल में कुलपति महोदय थोड़ा देर समय व्यतीत किए जांच की प्रक्रिया को देखा और बच्चों को आशीर्वाद देते हुए जल्द से जल्द स्वस्थ होने की कामनाएं की।विश्वविद्यालय के उच्च अधिकारी डॉक्टर एस कर्मकार, डॉक्टर नीरज, श्री एच एन दास, अशोक, संदीप शेखर, मेघनाथ, शिवकुमार नारायण, मुमताजआलम, दीपा वर्मा, कृष्णा श्रीवास्तव, कैशीला देवी, असुंता प्यारी एका, सरस्वती कुजूर , गीता कुमारी, उर्मिला एका ,, डॉक्टर सुचित्रा सिन्हा, डॉक्टर प्रेम प्रकाश वर्मा एवं विश्वविद्यालय के तथा अन्य 160 व्यक्ति इस शिविर में उपस्थित हुए।

ऑटिज्म से ग्रसित 20 बच्चों का जांच किया गया तथा निशुल्क औषधियां वितरण की गई। महेश कुमार उम्र 12 वर्ष कांके, रांची, नव्या उम्र 3 वर्ष रांची, आराध्या उम्र दो वर्ष कांके रोड, मे ऑटिज्म के सभी उग्र लक्षण मौजूद थे।विश्वविद्यालय के मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी डॉक्टर यू एस वर्मा सबका गहन पूर्वक जांच किए ‌ तथा इन बच्चों को एक माह में एक बार दिखाने के लिए परामर्श दिया गया।

डॉक्टर वर्मा ने सभी को सुझाव दिए कि यह एक कठिन रोग है और इसका इलाज भी आसान नहीं है ,परंतु सावधानीपूर्वक होम्योपैथिक दवा से इलाज कराने पर सुधार सब में हो जाएगा और कुछ लोग अपने पांव पर खड़े हो कर अपना कार्य शुरू कर सकेंगे।जोभी रोगी कुछ समय तक तत्परता के साथ इलाज कराते रहे उन सभी में लाभ देखा गया है।

इस जागरूकता दिवस पर प्रकाश डालते हुए डॉक्टर वर्मा ने बताया कि ऑटिज्म स्पेक्ट्रम जागरूकता दिवस मनाने का निर्णय संयुक्त राष्ट्र संघ ने 2 अप्रैल 2007 को पारित किया था ,तथा दोअप्रैल 2008 से संयुक्त राष्ट्र संघ के सभी सदस्य देश हर वर्ष इसे मनाते आ रहे हैं । इस शिविर को सफल बनाने में रांची विश्वविद्यालय के रेडियो खांची, सूर्यांश ट्रस्ट ने भी सहयोग किया। ऑटिज्म एक न्यूरो डेवलपमेंटल डिसऑर्डर है, इस व्याधि से ग्रसित बच्चे ना अपनी बात दूसरे से सही तरीके से कह पाते है ना दूसरे के बातों को समझ पाते है और ना उस से संवाद स्थापित कर पाते है ना समाज में मिलजुल कर रह सकते है। अपने ही दुनिया में खोए रहना, अपने इच्छा अनुसार कुछ-कुछ करते रहना, एक ही चीज को बार बार दोहराते रहना, नाम लेकर या इशारा से बुलाने पर भी ध्यान नहीं देना, आंख मिला कर बात नहीं कर पाना, या तो गुमसुम बने रहना या कभी-कभी चिखना चिलाना कभी-कभी सीजर का दौरा पढ़ना भी देखा जाता है।यह लक्षण बचपन में ही परिलक्षित होने लगते हैं तथा अटेंशन डिफिशिएंट सिंड्रोम, डिप्रेशन या अवसाद, शिजोफ्रेनिया इत्यादि से बिल्कुल ही अलग होता है।

यदि बच्चों को ठीक ढंग से इलाज किया जाए तो यह अपने कामकाज में पारंगत भी हो सकते हैं अन्यथा जीवन भर परिवार के लिए कठिनाइयां बनी रहती है। अंग्रेजी दवाओं में विटामिंस मिनरल्स के साथ-साथ रेसिपीडोन, तथा कुछ अन्य औषधियां दी जाती है। होम्योपैथिक दवाइयां अत्यंत सफल पाई गई है इसमें यूभी 29 गोल्ड, यूभी 25 गोल्ड,बेलाडोना, जेल‌सिमियम, हेलीबोरस, इग्नेशिया ,लाइकोपोडियम, कैलकेरिया कार्ब , काली फॉस, काली ब्रोम, सेलेनियम, कैमोमिला इत्यादि दवाइयां सर्वाधिक सफल होते देखी गई है।

इसके होने का कारणों में जेनेटिक, न्यूरोलोजिकल, अनुवांशिकी दोष एवं पर्यावरण दोष के कारण मानसिक विकास प्रभावित होना माना गया है। अधिक उम्र में गर्भधारण करने, कुछ हार्मोनल असंतुलन तथा अन्य अज्ञात कारणों मे एक कारण हो सकता है तथा बच्चियों की अनुपात में बच्चों को यह बीमारी अधिक होते देखा गया है 1 बरस से 3 बरस के बीच के बच्चों में यह लक्षण पूरी तरह से उभर कर आ जाते हैं मां पिता को बच्चे की मानसिक और शारीरिक स्थिति को देखकर या समझ में आने लगता है कि बच्चे का व्यवहार समझने की शक्ति आवाज देने पर ध्यान नहीं देना इत्यादि बातें सामने आ जाती है ऐसी स्थिति में मां पिता को चाहिए कि जितना जल्द हो सके ऑटिज्म इलाज करने वाले चिकित्सक के पास जाएं और उनसे अपने बच्चे को दिखाएं। चिकित्सक के बताए गए मार्गदर्शन के अनुसार स्पीच थेरेपी, सामाजिक मेलजोल से संबंधित थेरेपी ,फिजियोथेरेपी, व्यवहारिक शिक्षा देने का प्रयास करें ।जो कमजोर पक्ष है उसको मजबूत करने पर अधिक ध्यान दें।

बाग बगीचा में घुमाने का कोशिश करें , बच्चों के चाहत एवं पसंद का खेल खिलाने का प्रयास करें,और बच्चों के साथ से बैठा कर मेलजोल बढ़ाने की व्यवस्था करें, मां पिता परिवार के सदस्य बच्चे को व्यवहार कुशल बनाने का हर संभव कोशिश करें, चिकित्सकों द्वारा बताए गए औषधियों का प्रयोग करें। एक माह में कम से कम एक बार चिकित्सक से संपर्क करें, लक्षणों पर आधारित होम्योपैथिक औषधियां काफी सफल पाई जाती है और मेरे पास आने वाले प्राय सभी ऑटिज्म बच्चे मैं सुधार देखी गई है ।कुछ बच्चे ऐसे हैं जो अपने काम में पारंगत हो गए और अभी अपना कार्यकलाप सफलतापूर्वक कर रहे हैं ऑटिज्म बच्चे या व्यक्तियों में सबसे कम सक्रिय, औसत सक्रिय, अधिक सक्रिय के साथ साथ कभी-कभी अधिक विलक्षण प्रतिभा भी पा लेने मे सफल हुए लोग भी मिल जाते हैं।,कोशिश करते करते आइंस्टीन, न्यूटन, चार्ल्स डार्विन , प्रेम शंकर, दान एकवाइटजैसे महान व्यक्ति भी बन जाते हैं।

इसके लिए विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा बताए गए मार्गों पर सतत कोशिश करते रहना चाहिए। आगरेतर परामर्श के लिए। विश्वविद्यालय के मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी डॉक्टर यु एस वर्मा के मोबाइल संख्या 98351 677 43 पर संपर्क किया जा सकता है।

Related posts

JSLPS Recruitment 2022: JSLPS में 1000 से ज्यादा पदों पर निकली वैकेंसी, यहां देखें डिटेल

Manoj Singh

Farm Laws repeal: भीड़तंत्र ऊंचा या लोकतंत्र?

Annu Mahli

पेरवा जलप्रपात में बही गरिमा का शव मिला, सीएम ने जताया शोक

Manoj Singh