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झारखंड में महिलाएं रच रही नया इतिहास: नैंसी सहाय

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर फिक्की झारखंड चैप्टर की ओर से आत्मनिर्भर भारत की दिशा में नारी शक्ति विषय पर वेबीनार का आयोजन किया गया। इसमें हजारीबाग की डीसी नैंसी सहाय,बिहार सरकार में एटीएस की डीआईजी किम ने मुख्य वक्ता के रूप में अपने विचार रखे।

2014 बैच की आईएएस अधिकारी नैंसी सहाय ने कहा कि आत्मनिर्भर भारत की दिशा में नारी शक्ति के योगदान में झारखंड की महिलाएं काफी तेजी से अपना कदम बढ़ा रही है,यहां की महिलाएं किसान उत्पादक समूह बनाकर जो नया प्रयोग कर रही है वह आने वाले दिनों में देश की इस आधी आबादी को नई दिशा प्रदान करेगा। उन्होंने कहा कि व्यक्तिगत अनुभव में उन्होंने यह पाया है की झारखंड में महिलाएं काफी कठिन परिश्रम करने वाली होती है।

हजारीबाग में डीसी के रूप में पदस्थापना के पूर्व जब झारखंड लाइवलीहुड प्रमोशन सोसायटी के सीईओ के रूप में काम करने का अवसर मिला था तो यह जानने का भी मौका मिला कि पिछले कुछ सालों में ग्रामीण स्तर पर महिलाओं की आर्थिक सामाजिक भागीदारी कैसे बढ़ी है और कितनी बढ़ रही है। महिलाओं की सहक्तिकरण की अवधारणा झारखंड में इसलिए और बेहतर नजर आती क्योंकि निर्णय लेने के अधिकार प्रयोग भी यहां की महिलाएं ज्यादा करती है।

वित्तीय अधिकार या निर्णय लेने की क्षमता जरूर बदलते समय में झारखंड में महिलाओं के विषय में ज्यादा अब तक नहीं हो पाया है क्योंकि इसकी पहुंच अब तक महिलाओं तक नही हो पाई है जिसके कारण ही एंटरप्रेन्योरशिप की अवधारणा भी झारखंड में कम नजर आती है।

हालाकि राजधानी रांची के पास में ही खूंटी के मुरहू में मौजूद किसान उत्पादक समूह की महिलाएं अब जब अपने दम पर 7 करोड़ के लगभग सालाना कारोबार कर रही है तो यह जरूर आत्मनिर्भर भारत के निर्माण की दिशा में झारखंड की महिलाओं का यह एक बड़ा क्रांतिकारी कदम है जो आने वाले दिनों में एक नई लकीर खींचेगा।

इससे पूर्व वेबीनार के विषय प्रवेश कराते हुए फिक्की झारखंड चैप्टर के रौशन राहुलेश ने कहा कि रौशन भारतीय संस्कृति में महिलाओं का विशेष स्थान है। ईश्वर के रूप में आराधना से लेकर परिवार के केंद्र में महिलाएं हमेशा से रही हैं…मां से लेकर बहन,पत्नी,दोस्त,नर्स घरेलू काम में मदद करने वाली के साथ साथ शिक्षक के रूप में भी महिलाओं का स्थान और भूमिका नजर आती है।

समाज में महिलाएं जब कामकाजी होती है तो फिर उन्हे दोहरी जिम्मेदारी निभानी पड़ती है,कार्यस्थल पर बेहतर करने के दबाव के साथ उन्हें घर के कामों को भी पूरी करने की जिम्मेदारी निभानी पड़ती है लेकिन बाबजूद इसके उन्हे इसके लिए कभी भी उचित सम्मान नही मिल पाता।

वहीं एमवे इंडिया के रीजनल मैनेजर संदीप मुखर्जी ने इस मौके पर कहा कि भारतीय उद्योग जगत में पिछले 2 दशकों में महिलाओं की भागीदारी काफी बढ़ी है विशेषकर डिस्ट्रीब्यूटर आधारित उद्योग में और इसके कारण उद्योग जगत को धीरे धीरे एक नया नजरिया भी मिल रहा है।

वर्तमान में भारतीय उद्योग जगत इस सेक्टर में महिलाओं की भागीदारी यदि 50 से 55 फीसदी फीसदी है लेकिन एमवे में इसकी भागीदारी लगभग 60 फीसदी है और इस पर हमें गर्व है कि आत्मनिर्भर भारत में नारी शक्ति के योगदान पर आज जब चर्चा हो रही है तो इसमें एमवे इंडिया की भागीदारी काफी बेहतरीन है और इसके लिए एमवे इंडिया नारी शक्ति की आभारी है।

इस मौके पर श्री शंकराचार्य टेक्निकल कैंपस की प्रेसिडेंट जया मिश्रा ने कहा कि यह बेहतर शिक्षा का ही नतीजा है की लोग अब महिलाओं को शीर्ष पदों पर देख और स्वीकार रहें हैं। भारत में युवाओं की तादाद ज़्यादा होने के कारण अगली सदी में देश ज़्यादा तरक़्क़ी कर सकती है।

इनमें से आधि आबादी महिलाओं की है उनकी भी भागीदारी महत्वपूर्ण है। इसके लिए पुरुषों को भी कहीं ना कहीं घर के काम काज में ज़िम्मेदारी उठाने की आवश्यकता है। वहीं लिट्ल येलो बिट्टल की फाउंडर मल्लिका बजाज ने फ़ेमिनिज़म के व्यवसायिकरण से बचने पर जोर देते हुए कहा कि इससे हम कई बार महिलाओं को सिर्फ एक पीड़ित के रूप में बांध देते हैं।

महिलाएं पहले से ही सशक्त हैं उन्हें बस अपना काम ईमानदारी से करने दें। आहना हेरिटेज फाउंडेशन की सहसंस्थापक अनिता झा ने अपने व्यक्तिगत अनुभव को शेयर करते हुए कहा कि मेरे काम में मैंने अक्सर देखा की सांस्कृतिक कलाओं की रखवाली लगभग हर समुदाय में महिलाओं के ज़िम्मे है। महिलाओं को समान अधिकार देने में पूरे समाज की भलाई है।

इसे भी पढ़ें: महिला दिवस पर सुनिए विभिन्न क्षेत्रों की में कार्यरत महिलाओं की कहानी

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