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क्या रघुवर की राह में रोड़ा बनेगा झारखंड लोकतांत्रिक मोर्चा? प्रेशर पॉलिटिक्स का ऐसा है नया गेम प्लान

jharkhand loktantrik morcha

झारखंड लोकतांत्रिक मोर्चा (jharkhand loktantrik morcha)के गठन का एलान हो चुका है. इस तीसरे मोर्चे में आजसू पार्टी, एनसीपी और निर्दलीय विधायक शामिल हैं। इस मोर्चा में फिलहाल पांच विधायक हैं। सुदेश महतो ने इसका औपचारिक एलान करते हुए कह चुके हैं  कि झारखंड लोकतांत्रिक मोर्चा विधानसभा में एक साथ राज्य हित से जुड़े सवाल उठाएगा। हालांकि  यह मोर्चा आगे मिलकर चुनावी मैदान में उतरेगा,  इस पर कोई फैसला अभी नहीं हुआ है।

रघुवर दास की बढ़ सकती है टेंशन
दरअसल झारखंड में सुदेश महतो (Sudesh Mahato) के नेतृत्व में 5 विधायकों के साथ तीसरा मोर्चा गठन के बाद से ही प्रदेश में सियासत तेज हो गई है. राजनीतिक जानकारों के अनुसार राज्यसभा की दो सीटों पर चुनाव होने हैं. अभी वर्तमान में बीजेपी के दो सांसद राज्यसभा में  हैं. मुख्तार अब्बास नकवी और महेश पोद्दार का कार्यकाल पूरा हो रहा है. अगर संख्या बल की बात करें तो जेएमएम के लिए बहुत बड़ी चुनौती नहीं होगी.लेकिन, तीसरा मोर्चा के गठन के बाद से बीजेपी को राज्यसभा में सदस्य भेजने में चुनौती का सामना करना पड़ सकता है. बीजेपी के पास जो संख्या बल है, उसके अनुसार दो विधायकों की कमी हो रही है. अब देखना यह है कि यह तीसरा मोर्चा का क्या रूख  होगा. विश्वस्त सूत्रों की मानें तो आने वाले राज्यसभा चुनाव में बीजेपी रघुवर दास को राज्यसभा भेजना चाहती है. लेकिन, सरयू राय हर हाल में उन्हें रोकना चाहेंगे. विधानसभा चुनाव में भी सरयू राय ने रघुवर दास को करारी शिकस्त दी थी. सुदेश महतो से भी रघुवर दास का 36 का आंकड़ा है.

राज्यसभा चुनाव में गुट की भूमिका अहम रहेगी

अप्रैल में होने वाले राज्यसभा चुनाव में इस गुट की भूमिका अहम रहेगी.यहां 81 विधानसभा सदस्य हैं. हर दो साल में 2 खाली सीट पर चुनाव होता है. ऐसे में जीतने के लिए 28 मतों की जरूरत होती है. सत्तापक्ष के पास 1 सीट निकाल ले जाने के लिए पर्याप्त मत हैं. BJP के पास 26 विधायक हैं. ऐसे में इस गुट का मत नहीं मिला तो उसे मुश्किल हो सकती है.

प्रेशर पॉलिटिक्स का नया गेम प्लान!

दावा किया जा रहा है कि नए झारखंड लोकतांत्रिक मोर्चा के बैनर तले राज्‍य के विकास और जनहित मुद्दों को मजबूती से उठा सकेंगे. लेकिन 1932 खतियान, स्‍थानीय नीति और नियोजन नीति जैसे झारखंडी मुद्दों आजसू के सुदेश महतो, कमलेश सिंह, अमित यादव और सरयू राय के विचार नहीं मिलते हैं. फिर भी इस बात कि बहुत संभावना है कि झारखंड बीजेपी में मोर्चा दबाव समूह की भूमिका में तो होगा ही साथ ही सत्ताधारी दल पर भी दबाव बनाने की स्थिति में होगा .

 

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