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National Herald Case: ईडी को 90 करोड़ के लेन-देन और मोतीलाल के वित्तीय फैसला लेने पर शक क्यों?

Why is ED suspicious of 90 crore transactions and Motilal's financial decisions?

सोनिया गांधी और राहुल गांधी के ‘लोकतंत्र’ का सच

न्यूज डेस्क/ समाचार प्लस – झारखंड-बिहार

कांग्रेस के शीर्ष नेता सोनिया गांधी और राहुल गांधी के ‘लोकतंत्र’ का काम बिना खाता बही के चलता है। यह हम नहीं, प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) कह रहा है। क्योंकि एसोसिएटेड जर्नल लिमिटेड (एजेएल) को जिस 90 करोड़ रुपये देने की बात कही गयी है, उसके दस्तावेज का अता-पता नहीं है।

देशभर में ‘नेशनल हेराल्ड’ मामला गर्म है। अपने शीर्ष नेताओं की फंसी गर्दन देखकर कांग्रेस लाल है। लेकिन सच यह है कि जिस सच को लेकर कांग्रेस ‘सत्याग्रह’ किये जा रही है, उस सच का जवाब खुद उसके पास नहीं है। पूछताछ में ‘वोरा-वोरा’ खेलने वाले सोनिया गांधी और राहुल गांधी के मोतीलाल वोरा द्वारा वित्तीय फैसला लिये जाने का कोई सुबूत ईडी को नहीं मिला है। ईडी का कहना है कि जांच में स्वर्गीय मोतीलाल वोरा ने जो भी वित्तीय फैसले लिए उसके दस्तावेज नहीं हैं। यही नहीं, ईडी को लेन-देन के फैसले के कोई दस्तावेज भी नहीं मिले हैं।

जांच में कई फर्जी कम्पनियां जरूर मिलीं

नेशनल हेराल्ड मामले में कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खडगे से भी ईडी ने पूछताछ की है, क्योंकि खडगे यंग इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के एक मात्र कर्मचारी हैं। सूत्र बता रहे हैं कि मामले में जांच के दौरान ईडी को कई फर्जी कंपनियों की भी जानकारी मिली जिनसे यंग इंडिया का लेनदेन हुआ है। फिर भी जांच में ईडी को कंपनी के 90 करोड़ की लेनदेन पर शक है। ईडी यह जानने का प्रयास कर रहा है कि 90 करोड़ के लोन चुकाने के लिए ट्रांजेक्शन हुआ था या नहीं। ईडी को 50 लाख रुपये कोलकाता की एक कंपनी से यंग इंडिया प्राइवेट लिमिटेड को आने का जरूर पता चला है।

यह भी पढ़ें: कांग्रेस की ‘काली’गरी! महंगाई पर ड्रामेबाजी करने वाली कांग्रेस भूल गयी इंदिरा गांधी के राज का वह महंगाई वाला गाना

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