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उपचुनाव के डैमेज कंट्रोल पर क्या करेगी भाजपा, कल की राष्ट्रीय कार्यकारिणी बैठक में तय होगी रणनीति

BJP National Executive Meeting

न्यूज डेस्क/ समाचार प्लस – झारखंड-बिहार

रविवार को भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक काफी अहम होने वाली है। हाल में सात राज्यों के उपचुनाव के नतीजों से भाजपा को झटका लगा है। उपचुनाव के इन परिणामों ने भाजपा को अवश्य बेचैन कर दिया है। पांच राज्यों में होने वाले उपचुनाव से ठीक पहले मिली इस हार ने भाजपा को मंथन के लिए मजबूर कर दिया है। इनमें सबसे ज्यादा कष्टकर हिमाचल की पारम्परिक सीटों को गंवाना रहा है। अगले साल पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव है, इनमें उत्तर प्रदेश सबसे महत्वपूर्ण है। भाजपा इसी राज्य पर खुद को फोकस किये हुए है। भाजपा अपनी हार से जहां आहत है, वहीं विपक्षी दल में इसने ऊर्जा भरने का काम किया है।

हार पर मंथन के साथ पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों पर बनेगी रणनीति

रविवार को भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में हाल में मिली ताजा हार और आगामी विधानसभा चुनाव प्रमुख एजेंडे में होंगे। पदभार सम्भालने के बाद जेपी नड्डा के राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक की अध्यक्षता पहली बार करेंगे। भाजपा के एजेंडे में अगले साल की शुरुआत में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, मणिपुर और गोवा में होने वाले विधानसभा चुनाव रहेंगे। बैठक में इन पांच राज्यों में विधानसभा चुनावों के लिए पार्टी रणनीति और रोडमैप तैयार करेगी। लेकिन चर्चा के केन्द्र में 2 नवंबर को घोषित उपचुनाव के परिणाम भी होंगे। भाजपा का हिमाचल प्रदेश, राजस्थान और पश्चिम बंगाल में प्रदर्शन खराब रहा है। वहीं असम में इसका प्रदर्शन बेहतरीन रहा।

मायावती से हाथ मिलाने पर निश्चित रूप से होगी चर्चा

भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक की रणनीतिक चर्चा में मायावती की एंट्री निश्चित रूप से होगी। उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर कोई नया समीकरण अभी तक नहीं बना है, लेकिन चुनाव आते-आते कुछ नये समीकरण बन जायेंगे। हाल-फिलहाल में जो सम्भावनाएं बनती हुई दीख रही हैं। उनमें भाजपा और बसपा एक बार फिर से नजदीक आ सकते हैं। कुछ दिनों पहले मायावती ने जो कहा था, उससे इस सम्भावना को बल मिलता है। मायावती ने स्पष्ट रूप से कहा कि वह सपा को सत्ता में आने से रोकना चाहती हैं, अगर इसके लिए भाजपा से हाथ मिलाना पड़े, तो इसके लिए वह तैयार है। अब भाजपा को सोचना है कि वह अपने पूर्व के सहयोगियों के साथ ही चुनाव मैदान में उतरेगी या फिर बसपा को अपना नया सहयोगी बनायेगी। इस सम्भावना को बल इसलिए भी मिल रहा है, क्योंकि उपचुनावों में भाजपा को जो झटके लगे हैं, पार्टी यह नहीं चाहिए कि कोई मौका उसके हाथ से निकले। फिर, दो वर्षों के बाद भाजपा को लोकसभा चुनाव में भी उतरना है।

हार के बाद निकलते विपक्ष के सुर भाजपा को कर रहे बेचैन

सात राज्यों के उपचुनावों में मिली जीत (भाजपा की हार) ने विपक्ष में ऊर्जा भरने का काम किया है। इससे उत्साहित होकर विपक्ष की बयानबाजी भी तेज हो गयी है। केन्द्र की मोदी सरकार ने जब पेट्रोल और डीजल के दामों में कमी की तब विपक्ष ने इसे हार से मिला सबक करार दे डाला। कांग्रेस ने तो आंकड़े प्रस्तुत कर ईंधन की कीमतों में कमी को नाकाफी करार दे दिया। हालांकि भाजपा शासित राज्यों ने अपने हिस्से के राजस्व में कटौती कर पेट्रोल और डीजल के दाम और कम कर दिये। इससे विपक्ष, खासकर कांग्रेस, मुसीबत में आ गया। क्योंकि अभी गैर भाजपा शासित राज्य पेट्रोल-डीजल के दामों में कमी करने का साहस नहीं जुटा पा  रहे हैं। विपक्ष की इस तरह की सोच भी भाजपा को रणनीति बनाने का काम आसान करेगी। कल होने वाली राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में इस एंगल पर भी चर्चा हो सकती है।

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