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Jharkhand में मई-जून में तपाने के साथ राहत भी देगा मौसम, मध्य जून में सुनाई देगी मानसून की दस्तक

Weather will also give relief in Jharkhand in May-June, monsoon knock in mid-June

न्यूज डेस्क/ समाचार प्लस – झारखंड-बिहार

मौसम जिस तरह से रुला रहा है, सबकी आंखें आसमान पर लगी हुई हैं कि कब उमड़ते-घुमड़ते बादल राहत की बूंदें बरसाएंगे। वैसे अभी पारे का अपने सर्वोच्च शिखर पर पहुंचना शेष है, फिर भी राहत की बूंदें आने वाले मई और जून महीने में आपका इंतजार कर रही हैं। मौसम विभाग की मानें तो मई महीने में झारखंड में 43-44 डिग्री सेल्सियस तक तो छुएगा, लेकिन अधिकतम तापमान 22 डिग्री तक भी गिरेगा, ऐसा बीच-बीच में होने वाली बारिश के कारण होगा। मई महीने में 8 से 12 दिन बारिश की उम्मीद झारखंड के लोग कर सकते हैं। जून का महीना झारखंड वासियों के लिए ज्यादा राहत वाला होगा। ऐसा इसलिए क्योंकि इसी महीने झारखंड में मानसून की इंट्री होगी। मानसून की अभी जो गति है, उसके अनुसार 30 मई या 1 जून को मानसून केरल पहुंच जायेगा। 14 या 15 जून तक मानसून झारखंड को राहत पहुंचाने पहुंच जायेगा। मौसम विभाग ने जो सम्भावनाएं जताई हैं उसके अनुसार जून महीने में प्री मानसून और मानसूर की बारिश 15 से 22 दिनों तक हो सकती है। इस महीने में पारा भी नीचे गिरेगा। अधिकतम तापमान जहां 37 डिग्री सेल्सियस रहेगा, वहीं सबसे कम अधिकतम तापमान 26 डिग्री रहने का अनुमान है। उम्मीद कर सकते हैं कि मौसम विभाग की भविष्यवाणी सही साबित हो।

बिहार में भी 15-16 जून तक पहुंच जायेगा मानसून!

बिहार में इस बार भी मानसून के समय पर आने की उम्मीद है। पिछले साल राज्य में मानसून ने समय से पहले दस्तक दी थी और उस दौरान अच्छी बारिश भी हुई थी। इस बार भी मानसून के कुछ ऐसे ही रहने की उम्मीद है। भारत मौसम विज्ञान विभाग ने देश में सामान्य मानसूनी बारिश की भविष्यवाणी की है। मानसून के मौसम (जून से सितंबर) में पूरे देश के लिए 87 सेमी के दीर्घकालिक औसत का 99% होने की उम्मीद जतायी है। इस बार 15-16 जून तक बिहार में प्रवेश कर सकता है। पिछले साल, मानसून ने 12 जून को राज्य के उत्तर-पूर्वी हिस्सों में पूर्णिया के माध्यम से बिहार में प्रवेश किया था। हालांकि आईएमडी ने यह जरूर कहा है कि मई के अंतिम सप्ताह में दक्षिण-पश्चिम मानसून के लिए एक संशोधित देशव्यापी पूर्वानुमान जारी किया जायेगा। मौसम विज्ञान केंद्र के मुताबिक प्रशांत महासागर के ऊपर ला नीना की जो स्थिति बनी है वह देश में मानसून की धाराओं के समय पर संचलन में सहायक है। फिर भी, मानसून की अंतिम भविष्यवाणी अगले कुछ हफ्तों में मौसम की स्थिति की निगरानी के बाद ही की जा सकती है।

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