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Weather: दक्षिणी-पश्चिमी हवाएं दिलायेंगी गर्मी से राहत, झारखंड में भी दिखेगा असर

Weather: South-west winds will bring relief from heat, effect will also be seen in Jharkhand

न्यूज डेस्क/ समाचार प्लस – झारखंड-बिहार

अभी तो गर्मी पूरे देश को झुलसा रही है। झारखंड इस बार गर्मी से कुछ ज्यादा परेशान है। झारखंड में पलामू में तो पारा 45 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया है। रांची में पारा 40 डिग्री सेल्सियस को छूने वाला है। बुधवार को राजधानी रांची में पारा 39.8 डिग्री तक पहुंच चुका है। झारखंड के दूसरे जिले भी गर्मी से त्राहिमाम कर रहे हैं। इस तापमान से झारखंड को राहत मिलता तो नहीं दिख रहा है, लेकिन मौसम विभाग ने एक राहत भरी खबर अवश्य दी है। आईएमडी बता रहा है कि देश में पश्चिमी विक्षोभ और दक्षिण-पश्चिम क्षोभमंडल के सक्रिय होने से थोड़ी राहत मिल सकती है। जहां पश्चिमी विक्षोभ असर से देश के उत्तर और पश्चिम भारत यानी राजस्थान, गुजरात, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, हिमाचल और जम्मू कश्मीर में मौसम में बदलाव देखने को मिलेगा। वहीं दक्षिण-पश्चिमी हवाएं पूर्वोत्तर के राज्यों को राहत दिलायेंगी।

बंगाल की खाड़ी से पूर्वोत्तर भारत तक तेज दक्षिण-पश्चिमी हवाओं के कारण निचले क्षोभमंडल के प्रभाव से उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और आठ पूर्वी राज्यों में अगले पांच-छह दिनों के दौरान व्यापक रूप से बारिश होने की संभावना है। इस दौरान असम, मेघालय और अरुणाचल प्रदेश में भारी से बहुत भारी वर्षा होने की संभावना है। उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम में भी भारी बारिश की संभावना मौसम विभाग ने जतायी है।

इसी क्षोभमंडल का कुछ असर झारखंड पर भी नजर आयेगा। 16 अप्रैल से पाकुड़, गोड्डा, साहिबगंज, दुमका, देवघर में बादलों का आना-जाना शुरू होगा और वज्रपात के साथ हल्के से मध्यम दर्जे की बारिश हो सकती है। यह क्रम चार से पांच दिनों तक चलेगा। हालांकि राज्य के दूसरे जिलों में इसका ज्यादा असर नहीं दिखेगा, लेकिन आसमान में बादल छाने और वज्रपात की घटनाएं राज्य के कई जिलों में देखने को मिलेंगी। राज्य के उत्तर-पूर्वी हिस्सों में जहां मौसम का बदलाव दिखेगा, वहीं राज्य के उत्तर-पश्चिमी हिस्से, जैसे- गढ़वा, पलामृ, लातेहार में मौसम का यह बदलाव कम नजर आयेगा, लेकिन बादल छाने और थंडरिंग की घटनाएं इन जिलों में भी हो सकती हैं।

इसके अलावा दक्षिण तमिलनाडु पर मध्य क्षोभमंडल स्तर के चक्रवाती परिसंचरण के प्रभाव से दक्षिण भारत के कुछ राज्यों में अगले पांच दिनों के दौरान पुडुचेरी, कराईकल, तटीय आंध्र प्रदेश और तटीय और आंतरिक कर्नाटक और 13 व 14 अप्रैल को उन्हीं क्षेत्रों में भारी होने की संभावना है।

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