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Voting: धीरे-धीरे पुरुषों से आगे निकल गयीं महिलाएं, 1971 के मुकाबले 235% बढ़ीं महिला मतदाता

Women Voters

न्यूज डेस्क/ समाचार प्लस – झारखंड-बिहार

आजादी के बाद से, देश में सात दशकों और 17 आम चुनावों के बाद महिलाओं की भागीदारी पुरुषों की तुलना में अधिक हो गयी है। वैसे तो भारत में आजादी के बाद से ही महिलाओं को भी पुरुषों के बराबर वोट देने का अधिकार था, लेकिन महिलाओं ने वोट देने के लिए घर से निकलने में वर्षों लगा दिये। आज स्थिति यह है कि महिलाओं वोट देने में पुरुषों की तुलना में आगे हैं। लोकतंत्र के महापर्व चुनावों में महिलाओं ने कदम आगे तो वह पुरुषों से भी आगे निकल गयीं। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि 1971 के चुनावों के बाद से महिला मतदाताओं में 235.72 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। 2019 के आम चुनाव में तो उनकी भागीदारी 67 प्रतिशत से अधिक दर्ज की गयी जो पुरुषों के प्रतिशत से ज्यादा है। यह जानकारी भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) सुशील चंद्रा ने दी।

लगातार आगे बढ़ती गयी भागीदारी

मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) सुशील चंद्रा ‘महिलाओं, दिव्यांगों और वरिष्ठ नागरिकों की चुनावी भागीदारी में वृद्धि’ विषय पर एक अंतरराष्ट्रीय वेबिनार को संबोधित कर रहे थे। इस वेबिनार में 24 देशों के लगभग सौ प्रतिनिधियों ने भाग लिया। सुशील चंद्रा ने कहा कि भारत में 1971 के चुनावों के बाद से महिला मतदाताओं में बड़ी वृद्धि देखी गयी है। उन्होंने कहा कि लैंगिक अंतर एक महत्वपूर्ण मानदंड है, जो 1962 में शून्य से 16.71 प्रतिशत नीचे था, लेकिन 2019 में यह 0.17 प्रतिशत से अधिक हो गया। चंद्रा ने यह भी कहा कि जनजागरूकता के साथ यह चुनाव आयोग के प्रयासों का परिणाम भी है। चुनाव आयोग ने महिलाओं, दिव्यांगों, वरिष्ठ नागरिकों और ट्रांसजेंडर लोगों की भागीदारी बढ़ाने के लिए विशेष प्रयास किये हैं।

कई देशों में तो महिलाओं को वोट का अधिकार भी नहीं था

बता दें कि ज्यादातर देशों में महिलाओं को वोट देने का अधिकार टुकड़ों में मिला है। अमेरिका ने तो महिलाओं को समान मताधिकार देने में 144 साल लगा दिये। हालांकि भारत में आजादी के साल से ही महिलाओं को मत देने का अधिकार हासिल था, लेकिन महिलाओं ने वोट देने के लिए घर से निकलने में वर्षों लगा दिये। परन्तु इस तथ्य की अनदेखी नहीं की जा सकती कि कई भारतीय महिलाओं ने मतदान के समान अधिकार के लिए अभियान भी चलाया।

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