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Vice-President Election: उपराष्ट्रपति चुनाव में BJP सबसे मजबूत, नहीं पड़ेगी किसी के साथ की जरूरत, ये है नंबर गेम

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Vice-President election : देश के मौजूदा उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू का कार्यकाल 11 अगस्त को समाप्त हो रहा है। ऐसे में हर किसी की नजर राष्ट्रपति चुनाव के साथ-साथ उपराष्ट्रपति चुनाव पर भी टिक गई है। दरअसल, राष्ट्रपति पद का चुनाव 18 जुलाई को होगा और 21 जुलाई को नतीजे आएंगे।

बीजेपी के पास है पर्याप्त वोट 

इन दिनों देश में राष्ट्रपति (President Election) के साथ-साथ उपराष्ट्रपति चुनाव (Vice-President Election) की चर्चा तेज हो गई है. ऐसा माना जा रहा है कि 21 जुलाई को राष्ट्रपति चुनाव के नतीजे आने के बाद उपराष्ट्रपति चुनाव की प्रक्रिया भी शुरू हो जाएगी. इसे लेकर राजनीतिक पार्टियों ने इसे लेकर प्रत्याशियों का मंथन शुरू कर दिया है. 18 जुलाई को होने वाले राष्ट्रपति चुनाव में बीजेपी जहां अन्य पार्टियों के समर्थन की जरूरत पड़ेगी, लेकिन उपराष्ट्रपति चुनाव में बीजेपी को अपने प्रत्याशी को जिताने के लिए पर्याप्त वोट हैं.

जीत के लिए BJP किसी अन्य पार्टियों के समर्थन की भी जरूरत नहीं

जैसे-जैसे उपराष्ट्रपति चुनाव नजदीक आ रहा है, सभी राजनीतिक पार्टियों ने इसे लेकर प्रत्याशियों का मंथन शुरू कर दिया है. वहीँ उपराष्ट्रपति चुनाव का गणित साफ तौर पर ये दिखा रहा है कि बीजेपी को इस चुनाव में कोई दिक्कत नहीं होगी. बीजेपी को जीतने के लिए किसी अन्य पार्टियों के समर्थन की भी जरूरत नहीं होगी.

लोकसभा में बीजेपी सांसदों की संख्या 303

उपराष्ट्रपति चुनाव में लोकसभा के 543 और राज्यसभा में 232 सांसद वोट करते हैं. इसी साल हुए राज्यसभा चुनाव में बीजेपी को 3 सीटों का नुकसान हुआ है. इसके बाद राज्यसभा में बीजेपी के पास केवल 92 सांसद बचे हैं. वहीं, निचले सदन लोकसभा में बीजेपी और NDA के पास बहुमत है. हाल ही में हुए उपचुनाव में बीजेपी को दो सीटें हासिल हुईं. इसके बाद लोकसभा में बीजेपी सांसदों की संख्या 303 हो गई.

बीजेपी के पास जरूरी वोट से 7 वोट ज्यादा

अगर बीजेपी के लोकसभा और राज्यसभा के कुल सांसदों की संख्या को जोड़ा जाए, तो ये 395 होती है. वहीं उपराष्ट्रपति चुनाव में जीत के लिए केवल 388 वोट चाहिए. यानी बीजेपी के पास जरूरी वोट से 7 वोट ज्यादा हैं. इस तरह ये कहा जा सकता है कि उपराष्ट्रपति चुनाव में बीजेपी की जीत तय है. बता दें कि चुनाव आयोग ने 2022 के उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए अधिसूचना जारी कर दी है. 6 अगस्त को इसके लिए मतदान होगा.

अलग-अलग वर्ग के प्रत्याशियों पर विचार कर रही है भाजपा 

वहीँ राजनीतिक विश्लेषकों का मानें तो उपराष्ट्रपति के मामले में भी भाजपा का फैसला थोड़ा हटकर हो सकता है. 2014 के बाद जब से देश की सत्ता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों में गई है, तब से वह हर काम करने की कोशिश हो रही है जो काफी पहले हो जाने चाहिए थे.  उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के नाम में भी इसकी झलक देखने को मिल सकती है. मौजूदा समीकरण को देखते हुए भाजपा तीन अलग-अलग वर्ग के प्रत्याशियों पर विचार कर रही है.

 अनुपातिक पद्धति से होती है वोटिंग

उप राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव इलेक्शन अनुपातिक प्रतिनिधि पद्धति (proportional representation) से किया जाता है. इसमें वोटिंग खास तरीके से होती है जिसे सिंगल ट्रांसफ़रेबल वोट सिस्टम कहते हैं.

इसमें मतदाता को वोट तो एक ही देना होता है मगर उसे अपनी पसंद के आधार पर प्राथमिकता तय करनी होती है.  वह बैलट पेपर पर मौजूद उम्मीदवारों में अपनी पहली पसंद को 1, दूसरी पसंद को 2 और इसी तरह से आगे की प्राथमिकता देता है.

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