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UP Election:  सबको चाहिए महिला वोट! महिला वोटों का चुनावों पर प्रभाव, प्रत्याशी बनाने में पार्टियां लापरवाह

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न्यूज डेस्क/ समाचार प्लस – झारखंड-बिहार

इस समय देश में हिजाब का मुद्दा जोरों पर गर्म है। एक आम मुसलमान इसे अपनी संस्कृति पर हस्तक्षेप मान रहा है, वहीं एक आम भारतीय इसे मुस्लिम महिलाओं को गुलाम समझने की मुसलमानों की मानसिकता समझ रहा है। लेकिन एक भारतीय मानसिकता भी इससे अलग कहां है? इसे चुनावों में सभी पार्टियों द्वारा महिलाओं को दी जाने वाले (नहीं दिये जाने वाले) प्रतिनिधित्व से अच्छी तरह समझा जा सकता है।

यह निर्विवाद सत्य है कि चुनाव आते ही हर राजनीतिक दल का फोकस महिलाओं पर सबसे ज्यादा रहता है। बड़े से बड़ा नेता घर-घर जाकर महिलाओं के सामने हाथ जोड़कर वोट मांगता नजर आता है। महिलाओं के लिए चुनावी वादे किए जाते हैं। लेकिन यह उनके वोट हासिल किये जाने तक ही सीमित है। लेकिन जब उन्हें प्रतिनिधित्व देने की बारी आती है, तो पार्टियां इससे कन्नी काटने लगती हैं। उत्तर प्रदेश के अब तक हुए तीन चरण के मतदान हो चुके हैं, इनमें मिली महिलाओं को हिस्सेदारी से इस बात को आसानी से समझा जा सकता है।

इस समय पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव प्रक्रिया जारी है। तीन राज्यों पंजाब, उत्तराखंड और गोवा के चुनाव सम्पन्न हो चुके हैं। उत्तर प्रदेश में आज चौथे चरण का मतदान चल रहा है। उत्तर प्रदेश में तीन चरण का मतदान और शेष है। जबकि मणिपुर में दो चरणों में मतदान होना बाकी है। सभी चुनावों में दो बातें कॉमन हैं। एक, चुनावों पर महिलाओं के वोट से पड़ने वाला प्रभाव और दो, महिलाओं को प्रतिनिधित्व देने में पार्टियां बेपरवाह।

यूपी में अब तक के तीन चरणों में महिलाओं को हिस्सेदारी देने में पार्टियां कंजूस

यूपी में तीन चरणों का मतदान सम्पन्न हो चुका है। इन सभी चरणों में पुरुष प्रत्याशियों की तुलना में महिला प्रत्याशियों की संख्या नगण्य रही है।

  • पहला चरण – 10 फरवरी
  • पार्टी        महिला उम्मीदवार
  • कांग्रेस     28%
  • भाजपा     12%
  • बसपा       07%
  • सपा          07%
  • दूसरा चरण – 14 फरवरी
  • पार्टी          महिला उम्मीदवार
  • कांग्रेस       37%
  • भाजपा      09%
  • बसपा        07%
  • सपा          06%
  • आरएलडी 00%
  • तीसरा चरण – 20 फरवरी
  • पार्टी        महिला उम्मीदवार
  • कांग्रेस      45%
  • भाजपा     16%
  • बसपा       12%
  • सपा          09%
मतदान में महिला वोटर्स बढ़-चढ़कर लेती हैं हिस्सा

भले ही महिलाओं को टिकट देने में राजनीतिक दल काफी पीछे रहे, लेकिन मतदाता सूची में महिलाओं की हिस्सेदारी करीब-करीब बराबर होती है और वे मतदान करने में भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लेती हैं। इस बार के चुनाव के पहले चरण में कुल 2.28 करोड़ मतदाताओं  में 1.24 करोड़ पुरुष और 1.04 करोड़ महिला वोटर्स थे। दूसरे चरण में 2.02 करोड़ मतदाताओं में 1.07 करोड़ पुरुष, और 93 लाख वोटर्स महिलाएं थे। जबकि तीसरे चरण में 2.15 करोड़ मतदाताओं में 1.16 करोड़ पुरुष और 99 लाख महिला वोटर्स थे। यही वजह है कि पार्टियां भी महिला वोटरों को लुभाने में बढ-चढ़कर आगे रहते हैं। इसे आंकड़ों से भी समझा जा सकता है।

  • विधानसभा चुनाव 2007
  • बीएसपी – 32%
  • सपा – 26%
  • बीजेपी – 16%
  • कांग्रेस – 8 फीसदी
  • विधानसभा चुनाव 2012
  • सपा – 31%
  • बीएसपी – 25%
  • बीजेपी – 14%
  • कांग्रेस – 12%
  • विधानसभा चुनाव 2017
  • बीजेपी 41%
  • बीएसपी – 23%
  • सपा – 20%
  • कांग्रेस – 05%
विधानसभा चुनावों में महिलाओं का वोट प्रतिशत

महिलाओं वोट डालने भी पुरुषों से पीछे नहीं रहती हैं। आइये नजर दौड़ाते हैं उत्तर प्रदेश के पिछले कुछ चुनावों पर-

  • विधानसभा चुनाव 2002
  • 56.72% – पुरुषों ने किया मतदान
  • 50.25% – महिलाओं ने किया मतदान
  • विधानसभा चुनाव 2007
  • 49.35% – पुरुषों ने किया मतदान
  • 41.92% – महिलाओं ने किया मतदान
  • विधानसभा चुनाव 2012
  • 58.68% – पुरुषों ने किया मतदान
  • 60.28% – महिलाओं ने किया मतदान
  • विधानसभा चुनाव 2017
  • 59.15% – पुरुषों ने किया मतदान
  • 63.31% – महिलाओं ने किया मतदान

यह भी पढ़ें: Jharkhand: मुख्यमंत्री हेमंत ने साहिबगंज में जनता की सुनीं समस्याएं, सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने की अपील की

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