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UP Election 2022: भाजपा चुनावी रणनीति बनाने में व्यस्त, विपक्षी एक दूसरे की टांग खींच कर मस्त

UP Election

न्यूज डेस्क/ समाचार प्लस – झारखंड-बिहार

दिल्ली में भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक चल रही है। बैठक को बुलाने का मकसद साफ है। अगले साल होने वाले पांच राज्यों में विधानसभा चुनावों के लिए आत्म मंथन। इन राज्यों में भाजपा के लिए सबसे अहम राज्य उत्तर प्रदेश है। क्योंकि देश की राजनीति भी इसी राज्य से होकर गुजरती है। फिर दूसरी पार्टियां भी यूपी में अपने चुनावी दांव-पेंच में लगी हुई हैं। इन पार्टियों में एक दूसरे से आगे बढ़ने की होड़ लगी है। इसे आगे बढ़ना न कहा जाये तो बेहतर होगा, ये पार्टियां एक दूसरे को धक्का देकर आगे निकलने की कोशिश कर रही हैं।

यूपी का विधानसभा चुनाव सबके लिए महत्वपूर्ण

यूपी का 2022 का चुनाव सभी पार्टियों के लिए महत्वपूर्ण है। भले ही भाजपा यूपी में थोड़ी बेहतर स्थिति में है, फिर भी वह यहां कोई चूक नहीं होने देना चाहती है, क्योंकि उत्तर प्रदेश का समर जीतने के बाद ही वह 2024 में देश की सत्ता की तैयार कर पायेगी। सपा-बसपा के लिए यूपी का चुनाव जीवन-मरण का प्रश्न बना हुआ है। क्योंकि दोनों ही पार्टियां यहां पहले सत्ता में रह चुकी हैं। इसलिए दोनों ही पार्टियां यूपी की सत्ता एक बार फिर से हासिल करना चाहेंगी। कांग्रेस तो यूपी में अपना अस्तित्व बचाने में ही लगी हुई है। यहां तो उनका कोई खेवनहार भी नहीं है, इसलिए दोनों भाई-बहन (राहुल गांधी-प्रियंका गांधी) ने ही यहां की कमान खुद ही सम्भाल रखी है।

चुनावी समर में यहां दो तस्वीरें देखने को मिल रही हैं। एक, सभी विपक्षी पार्टियां एक दूसरे से तो उलझी हुई हैं ही। दो, सभी भाजपा को अपना सबसे बड़ा प्रतिद्वन्द्वी मान रही हैं। सभी विपक्षी दलों की लड़ाई मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ उनकी सरकार तथा मोदी सरकार से ही है, लेकिन वह एक दूसरे को काटने से भी परहेज नहीं कर रही हैं।

अभी तक नहीं बना है कोई गठबंधन

चुनाव को लेकर सभी पार्टियों, खासकर विपक्षी दलों में बेचैनी बढ़ी हुई है। आगामी चुनाव के लिए इस समय चार ध्रुव बने हैं। भाजपा, कांग्रेस, सपा और बसपा। चुनाव की तिथियों की भले ही घोषणा नहीं हुई है, लेकिन चुनाव का समय नजदीक आता जा रहा है। फिर भी आगामी चुनाव को लेकर किसी गठबंधन की सुगबुगाहट अभी तक नहीं हुई  है। सभी पार्टियां अपने-अपने बूते मैदान में हैं। सपा बसपा से गठबंधन नहीं कर कर सकती, क्योंकि पिछले विधानसभा चुनाव में उसे गठबंधन के कारण नुकसान उठाना पड़ा था। सपा और बसपा कांग्रेस से गठबंधन नहीं करना चाहतीं, क्योंकि उन्हें लगता है कि  यह उनके लिए घाटे का सौदा हो जायेगा। भाजपा से इन तीनों पार्टियों का गठबंधन वैसे सम्भव तो नहीं है, लेकिन इतना भर संकेत जरूर है कि अगर सम्भावना बनी तो बसपा भाजपा के साथ जा सकती है। ऐसा बसपा की ओर से आये एक बयान के आधार पर कहा जा सकता है। बता दें, हाल में बसपा प्रमुख मायावती ने कहा था कि सपा को वह किसी भी सूरत में सत्ता तक आने नहीं देगी। भले ही उसे रोकने के लिए उसे भाजपा से हाथ क्यों न मिलाना पड़े। उधर सपा है कि वह अब चुनाव के लिए हर पैतरे आजमाने में लग गयी है। उसका ‘जिन्नावाद’ इसी का नतीजा है।

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