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मीराबाई चानू की अनसुनी कहानियां : उस दिन अमेरिकी राष्ट्रपति ने खा लिया चानू  का जूठा चावल – Part 1

mirabai chanu

ऐसी कहानियां ‘एनसीईआरटी’ कोर्स में शामिल की जानी चाहिए

आज देश में हर ओर भारतीय पावरलिफ्टर मीराबाई चानू की चर्चा है। देश तो खुश है ही, प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति, खेल मंत्रालय समेत कई राज्यों के मुख्यमंत्री चानू को बधाई देते नहीं थक रहे हैं। चानू ने कारनामा ही ऐसा किया है। चानू ने ओलम्पिक में वेटलिफ्टिंग के 21 वर्षों के पदकों का सूखा जो खत्म किया था। 2000 सिडनी ओलम्पिक में कर्णम मल्लेश्वरी ने वेटलिफ्टिंग का कांस्य पदक जीता था। लेकिन मीराबाई चानू ने कर्णम मल्लेश्वरी से एक कदम आगे निकलकर रजत पदक जीता और देश का गौरव बढ़ाया।

कहा जाता है कि पूत की प्रतिभा पालने में। चानू जब 10 वर्षों की थीं, तभी उनकी प्रतिभा की झलक मिल गयी थी। देश का गौरव बढ़ाने वाली मीराबाई चानू आज युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं। मीराबाई चानू तो युवाओं की प्रेरणा हैं ही, उनके जीवन से जुड़ी कहानियां भी अपने आप में प्रेरणा हैं। ये कहानियां जितनी रोचक, मार्मिक और दिल को छू लेने वाली हैं, उतनी ही प्रेरणादायक भी। अमेरिकी राष्ट्रपति के द्वारा उनका झूठा चावल खाने का प्रसंग इतना मार्मिक है कि दिल को छू लेगा।

मीराबाई चानू की प्रेरक कहानियों को सभी को जानना चाहिए। अगर इन कहानियों को ‘एनसीआरटी’ की किताबों में जगह मिल जायें तो सोने पे सुहागा हो जायेगा। पाठ्य-पुस्तकों में इन कहानियों को पढ़कर बच्चे प्रेरणा भी ले सकेंगे।

अमेरिकी राष्ट्रपति मीराबाई चानू से मंत्रमुग्ध

मीराबाई चानू ने टोक्यो ओलम्पिक में स्वर्ण पदक जीतने से पहले भी देश के भाल को ऊंचा किया है। यह प्रसंग 2017 में विश्व भारोत्तोलन चैम्पियनशिप का है। जो संयुक्त राज्य अमेरिका के अनाहाइम, कैलीफोर्निया में आयोजित हुआ था। इस चैम्पियनशिप में भाग लेने के लिए चानू अमेरिका गयी हुई थीं। चैम्पियनशिप से एक दिन पहले एक सहभोज का आयोजन किया गया था। अमेरिकी राष्ट्रपति इस सहभोज के मुख्य अतिथि थे। भोज के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति को यह देखकर बड़ा आश्चर्य हुआ कि मीराबाई को उन्हीं के सामने पुराने बर्तनों में चावल परोसा गया, जबकि बाकी सभी होटल के शानदार बर्तनों में शाही भोजन का आनन्द ले रहे थे।

यह देख राष्ट्रपति हुए और पूछा, ‘क्या हमारा देश इतना गरीब है कि एक खिलाड़ी के लिए बर्तन कम पड़ गया। ऐसा भेदभाव क्यों, क्या यह कोई अछूत है?’

तब अमेरिकी राष्ट्रपति को बताया गया कि यहां किसी से कोई भेदभाव नहीं किया जा  है। दरअसल, जो लड़की पुराने बरतन में चावल खा रही है, वह सिर्फ अपने देश का चावल ही खाती है। वह जहां जाती है, अपने देश का चावल ले जाती है और उसे ही उबाल कर खाती है। इस समय वह जो भोजन कर रही है, उसने उसे खुद उबाला है।

अपने देश का चावल ही खाती हैं चानू

राष्ट्रपति आश्चर्यचकित हुए। उन्होंने चानू से सवाल किया- ‘तुम ऐसा क्यों करती हो?’

इस पर चानू का मासूम जवाब था- ‘महामहिम, मेरे देश का अन्न खाने के लिए तो देवता भी तरसते हैं, इसलिए मैं हमेशा अपने देश का ही अन्न खाती हूं।’

अपनी पोटली में कराया अपने देश का दर्शन

राष्ट्रपति भावुक हो उठे, बोले- ‘धन्य है वह देश, जहां तुमने जन्म लिया है। तुम जैसे देशभक्त ने जहां जन्म लिया है, उस देश और उस गांव के दर्शन अवश्य करना चाहूंगा।’

तब चानू ने कहा- ‘महामहिम इसके लिए आपको मेरे गांव जाने की क्या जरूरत है। आप यहीं उसके दर्शन कर सकते हैं। क्योंकि मेरा गांव मेरे साथ है। आप यहीं उसके दर्शन कर लीजिए।’

पहले तो राष्ट्रपति ने इसे चानू की कोई मूर्खता समझी। लेकिन इसके बाद चानू ने जो किया, वह अमेरिकी राष्ट्रपति को अभिभूत कर गया।

मीराबाई ने अपने हैंडबैग से एक पोटली निकाली। पहले उसे अपने माथे से लगाया फिर राष्ट्रपति को दिखाते हुए बोली, ‘यह है मेरा पावन गांव और महान देश।’

‘यह मेरे गांव की पावन मिट्टी है, इसमें मेरे देश के देशभक्तों का लहू मिला हुआ, सरदार भगत सिंह, रामप्रसाद बिस्मिल, चंद्रशेखर आजाद का लहू इस मिट्टी में मिला हुआ है, यह मिट्टी नहीं, मेरा सम्पूर्ण भारत है।’

राष्ट्रपति की आंखें नम! उन्होंने अगला सवाल किया- ‘ऐसी शिक्षा तुमें कहां से मिली है?’

मैकाले की नहीं, गुरु के चरणों में मिलती है शिक्षा

इस पर चानू का जो जवाब था, वह किसी भी भारतीय अंग्रेजी दां के लिए शर्म से डूब मरने वाला था। जवाब था-

‘महामहिम ऐसी शिक्षा विश्वविद्यालय में नहीं दी जाती, विश्वविद्यालय में तो मैकाले की शिक्षा दी जाती है, ऐसी शिक्षा तो गुरु के चरणों में मिलती है, मुझे आर्य समाज में हवन करने वाले बाबा से यह शिक्षा मिली है, मैं उन्हें ‘सत्यार्थ प्रकाश’ पढ़कर सुनाती थी, वहीं से ​मुझे देशभक्ति की प्रेरणा मिली।’

चानू के मुंह से ऐसी विलक्षण बातें सुनकर अब तक अमेरिकी राष्ट्रपति पूरे भावुक हो चुके थे। इसके बाद जो हुआ वह मात्र मीराबाई चानू के लिए ही नहीं, पूरी दुनिया के सामने भारतवर्ष का मान बढ़ाने वाला था।

‘गोल्ड तुम्हीं जीतोगी, कल हनुमानजी भी तुम्हें नहीं हरा सकते’

राष्ट्रपति बोल उठे- ‘कल गोल्ड मैडल तुम्हीं जितोगी। मैंने पढ़ा है, भगवान हनुमानजी ने पहाड़ हाथों पर उठा लिया था, लेकिन कल यदि तुम्हारे मुकाबले हनुमानजी भी आ जाएं तो भी तुम ही जितोगी…तुम्हारा भगवान भी कल तुमसे हार जाएगा।’

‘शोध करो, ‘सत्यार्थ प्रकाश’ ने कैसे भर दी इतनी देशभक्ति’

राष्ट्रपति ने ‘सत्यार्थ प्रकाश’ एक अधिकारी को देकर आदेश दिया, ‘इस किताब को अनुसंधान के लिए भेज दो ताकि यह पता चल सके कि आखिर इस किताब में क्या है, जिसने इस लड़की में इतनी देशभक्ति भर दी है कि अपनी ही धरती के चावल हमारे देश में खा रही है।

चानू की प्लेट से एक दाना खाकर ‘तृप्त’ हुए राष्ट्रपति

तब तक चानू अपना भोजन समाप्त कर चुकी थीं। उनकी प्लेट में चावल का एक दाना पड़ा रह गया था। अमेरिकी राष्ट्रपति ने प्लेट से वह चावल चुपके से उठाया, और अपने मुंह में डाल लिया। शायद इस उम्मीद में कि अगर उनकी देशभक्ति थोड़ी कम भी हो तो ‘देवभूमि’ का अन्न खाकर वह भी उस लड़की की तरह देशभक्त बन जायेंगे।

इसके बाद अमेरिकी राष्ट्रपति के मुंह से जो शब्द निकला, सही साबित हुआ- ‘यकीनन कल गोल्ड तो यही जीतेगी, क्योंकि यह देवमूमि का अन्न खाती है।’

अगले दिन मीराबाई चानू स्वर्ण पदक जीत भी गयीं। चानू ने 86 किलोग्राम स्नैच में और 110 किलोग्राम क्लीन एण्ड जर्क में उठा कर स्वर्ण पदक जीता था। यही नहीं, उन्होंने अपने 48 किग्रा वजन वर्ग में अपने प्रदर्शन से राष्ट्रमण्डल खेलों का रिकॉर्ड भी तोड़ दिया।

यह घटना इसलिए भी ज्यादा महत्वपूर्ण थी, क्योंकि एक दिन पहले ही पूरा अमेरिका यह जान चुका था कि गोल्ड कौन-जीतेगा। यही नहीं, चानू के गोल्ड जीतने से पहले ही बीबीसी की यह लीड खबर प्रसारित कर दी थी।

जारी…

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