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UGC: अब बिना NET- PhD के भी बन सकेंगे प्रोफेसर, इस तरह होगी सीधी नियुक्ति

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UGC: अब बिना अकादमिक डिग्री भी विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में प्रोफेसर बन सकेंगे।विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस (Professor of Practice) प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इसके तहत विभिन्न क्षेत्रों के expert शैक्षिक योग्यता के बिना भी प्रोफेसर बनकर दो साल तक सेवाएं दे सकेंगे। इसमें गायक, नृतक, उद्योग, समाजसेवी से लेकर अन्य क्षेत्रों के विशेषज्ञ शामिल होंगे।

आईआईटी और आईआईएम में पहले से लागू है योजना

आईआईटी और आईआईएम में पहले से प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस योजना लागू है। इसके लिए औपचारिक पात्रता एवं प्रकाशन से जुड़ी अर्हताएं अनिवार्य नहीं होंगी। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) की पिछले सप्ताह हुई 560वीं बैठक में यह फैसला लिया गया। ‘प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस’ (पेशेवर प्रोफेसर) योजना के अगले महीने नोटिफिकेशन किए जाने की संभावना है।

नेट और पीएचडी के बगैर प्रोफेसर बन्ने का रास्ता खुला 

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की 18 अगस्त को यूजीसी की बैठक आयोजित हुई थी। इसमें तीन प्रस्ताव को मंजूरी मिली है। इसमें सबसे प्रमुख प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस है। प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस को मंजूरी के बाद अब विश्वविद्यालयों में नेट और पीएचडी के बगैर भी प्रोफेसर बनकर सेवाएं देने का रास्ता खुल गया है।

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आगामी शैक्षणिक सत्र से लागू होने की संभावना

आयोग द्वारा मंजूर इस योजना के मसौदा दिशा निर्देश के अनुसार इंजीनियरिंग, विज्ञान, मीडिया, साहित्य, उद्यमिता, सामाजिक विज्ञान, ललित कला, लोक सेवा, सशस्त्र बल आदि क्षेत्रों के विशेषज्ञ इस श्रेणी में नियुक्ति के पात्र होंगे। मसौदे के अनुसार जिन लोगों ने विशिष्ट पेशों में विशेषज्ञता साबित हो या जिनका सेवा या अनुभव कम से कम 15 वर्षो का हो, विशेष रूप से वे वरिष्ठ स्तर पर हों, वे प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस श्रेणी के लिए पात्र होंगे। अगर उनका शानदार पेशेवर अनुभव या कार्य हो, तब इसके लिए औपचारिक अकादमिक पात्रता अनिवार्य नहीं होगी। इसके आगामी शैक्षणिक सत्र से लागू होने की संभावना है।

आवश्यक होगा जरूरी कौशल 

इसमें कहा गया है कि इन विशेषज्ञों को प्रोफेसर स्तर पर शिक्षक संकाय के रूप में नियुक्ति के लिए निर्धारित प्रकाशन एवं अन्य पात्रता दिशानिर्देशों से छूट होगी। दिशा निर्देशों के अनुसार, हालांकि उनके लिए कर्तव्यों एवं जिम्मेदारियों को पूरा करने के लिए जरूरी कौशल आवश्यक होगा।

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अधिकतम तीन वर्ष की सेवा अवधि

शुरुआत में इन पदों पर एक वर्ष के लिए नियुक्ति की जाएगी। प्रारंभिक अवधि पूरा होने के बाद उच्च शिक्षण संस्थानों द्वारा मूल्यांकन के बाद अवधि को बढ़ाने के बारे में निर्णय लिया जा सकता है। उच्च शिक्षण संस्थान मूल्यांकन एवं अवधि विस्तार के लिए अपनी प्रक्रिया तय कर सकते हैं। ऐसे पदों की सेवा अवधि तीन वर्षों से अधिक नहीं हो सकती। असाधारण परिस्थितियों में इसे एक वर्ष के लिए बढ़ाया जा सकता है।

नामांकनों पर चयन समिति विचार करेगी

कुलपति या निदेशक ‘प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस’ के लिए जाने माने विशेषज्ञों से नामांकन आमंत्रित कर सकते हैं। इन नामांकनों पर चयन समिति विचार करेगी जिसमें उच्च शिक्षण संस्थानों के दो वरिष्ठ प्रोफेसर और एक जाने माने बाहरी सदस्य शामिल होंगे।

अभी नेट और पीएचडी होना जरूरी है

अभी तक यूजीसी से मान्यता प्राप्त केंद्रीय विश्वविद्यालय, राज्यों के विश्वविद्यालयों समेत डीम्ड -टू-बी यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर बनने के लिए शैक्षिक योग्यता में नेट और पीएचडी होना जरूरी है। हालांकि, इस प्रस्ताव के बाद अपने-अपने क्षेत्रों के विशेषज्ञ भी पढ़ाई करवा सकेंगे। हालांकि उनकी नियुक्ति के लिए यूजीसी ने मानक तय किए हैं।

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