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CM Biplab Resigns: एक और चुनावी राज्य में भाजपा के मुख्यमंत्री का इस्तीफा, जानें 10 कारण बिप्लब ने क्यों छोड़ी कुर्सी

CM Biplab Resigns: एक और चुनावी राज्य में भाजपा के मुख्यमंत्री का इस्तीफा हो गया है। इस बार त्रिपुरा के मुख्यमंत्री बिप्लब कुमार देब ने अपनी कुर्सी छोड़ने का फैसला किया है। दरअसल, 2018 में भाजपा ने राज्य में सत्ता हासिल की थी। यहां अगले साल यानी 2023 में विधानसभा चुनाव होने हैं। बिप्लब के अचानक इस्तीफे ने सियासी गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। आइए 10 पॉइंट में समझते हैं बिप्लब के सीएम पद की कुर्सी छोड़ने की पूरी कहानी।

अमित शाह से मुलाकात के बाद हुआ फैसला
बिप्लब कुमार देब ने बीते दिन यानी शुक्रवार को गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की थी। यहीं से उनके इस्तीफे की अटकलों को जोर मिलने लगा था। देब ने खुद ट्वीट कर शाह से मिलने की बात की जानकारी दी थी।

शनिवार शाम दिया इस्तीफा
इसके बाद बिप्लब कुमार देब ने शनिवार शाम करीब साढ़े चार बजे सीएम पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने अपना त्यागपत्र राज्यपाल को सौंप दिया। इस्तीफे के बाद उन्होंने कार्यकर्ता के रूप में पार्टी को मजबूत करने की बात कही।

पीएम मोदी का भी जिक्र किया
इस्तीफे के बाद बिप्लब ने कहा कि मैंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बात की है। उन्हें इस बारे में जानकारी है। मेरे लिए पार्टी का फैसला सर्वोपरि है।

इस्तीफे की वजह क्या बताई?
बिप्लब ने कहा कि पार्टी और आलाकमान चाहता था कि मुझे इस्तीफा दे देना चाहिए। इसलिए मैंने भी उनका फैसला मानते हुए पद छोड़ने का फैसला किया। अब अगले चुनाव के लिए दम लगाकर काम करूंगा।

आगे क्या?
बिप्लब ने इस्तीफे के बाद इस ओर भी इशारा किया। उन्होंने कहा कि पार्टी को मजबूत करने के लिए काम करता रहूंगा। राज्य में अगले साल चुनाव होने हैं। इसके लिए काम करूंगा, ताकि पार्टी एक बार फिर भारी मतों से विजयी बने।

अगला सीएम कौन?
केंद्रीय मंत्री और भाजपा नेता भूपेंद्र यादव और भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव विनोद तावड़े केंद्रीय पर्यवेक्षक के रूप में त्रिपुरा में हैं। बिप्लब कुमार देब की जगह लेने वाले नए नेता की घोषणा आज शाम की जाएगी।

क्या विधायकों की नाराजगी भी वजह?
बिप्लब देब के खिलाफ सालभर से कई विधायकों की नाराजगी चल रही थी। पिछले साल जून में विधायकों का एक समूह बिप्लब देब के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने दिल्ली आया था। हालांकि, तब हाईकमान ने हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया था और राज्य प्रभारी विनोद सोनकर से इस मुद्दे को हल करने के लिए कहा गया था।

2018 के चुनाव में भाजपा को मिली थी बंपर जीत
2018 के विधानसभा चुनावों में माणिक सरकार के नेतृत्व वाली कम्युनिस्ट सरकार को उखाड़ फेंकने के बाद भाजपा ने राज्य में सत्ता हासिल की थी। 60 सदस्यीय त्रिपुरा विधानसभा में सत्तारूढ़ गठबंधन में भाजपा के 36 विधायक हैं और इंडिजिनस पीपुल्स फ्रंट ऑफ त्रिपुरा (आईपीएफटी) के 8 विधायक हैं।

2023 में होने हैं चुनाव
त्रिपुरा में मौजूदा विधानसभा का कार्यकाल अगले साल यानी 2023 में समाप्त हो रहा है। इसका मतलब अगले साल यहां विधानसभा चुनाव कराए जाएंगे। बिप्लब ने भी कहा कि अगले साल होने वाले चुनाव के लिए वे कार्यकर्ता के रूप में पार्टी को मजबूती प्रदान करने के लिए काम करेंगे।

माणिक साहा नए सीएम
ऐसा नहीं है कि भाजपा ने सिर्फ त्रिपुरा में ही सीएम बदला है। इससे पहले भाजपा ने कर्नाटक, गुजरात और उत्तराखंड में भी ऐसा ही किया था। उत्तराखंड में तो भाजपा ने एक से ज्यादा बार सीएम बदले थे और अंत में पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में चुनाव लड़ा और बहुमत के साथ सत्ता में वापसी की। त्रिपुरा में भाजपा अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद माणिक साहा को नया सीएम बनाया गया है।

 

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