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पेरिस में 2024 में मिलने के वादे के साथ Tokyo Olympics 2020 सम्पन्न, बजरंग पुनिया बने भारतीय दल के ध्वजवाहक

tokyo olympics closing

रंगारंग कार्यक्रम के साथ टोक्यो ओलंपिक 2020 का विधिवत समापन हो गया। समापन समारोह में कुश्ती प्रतियोगिता का कांस्य पदक जीतने वाले बजरंज पुनिया भारतीय दल के ध्वजवाहक बने। वह क्लोजिंग सेरेमनी के दौरान हाथों में तिरंगा लेकर आगे-आगे चल रहे थे। उद्घाटन समारोह की तरह ही टोक्यो ओलंपिक के समारोह में कम खिलाड़ियों को मार्च पास्ट में शामिल होने की अनुमति मिली थी। मार्च पास्ट में भारत के 10 खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया। टोक्यो ओलंपिक के समापन के बाद ओलंपिक खेलों का अब अगला पड़ाव पेरिस होगा। 2024 में पेरिस में ओलंपिक खेलों का आयोजन होगा। यानी तीन वर्षों बाद दुनियाभर के खिलाड़ियों का एक बार फिर यहां जमघट लगेगा।

समापन समारोह की शुरुआत आतिशबाजी के साथ हुई। पूरे ओलंपिक स्टेडियम को दुल्हन की तरह सजाया गया था। ओलंपिक आयोजकों ने ‘अनगिनत व्यक्तियों के लिए आभार व्यक्त किया’ जिन्होंने ओलंपिक खेलों को समापन समारोह तक पहुंचाने में मदद की। इसके बाद जापान के क्राउन प्रिंस अकिशिनो और अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति के अध्यक्ष थॉमस बाक आधिकारिक स्टैंड में उपस्थित थे। समारोह का मुख्य संदेश था- ‘खेल एक उज्ज्वल भविष्य के दरवाजे खोलेंगे’।

टोक्यो ओलंपिक में 17 दिनों तक पदकों के लिए दुनियाभर से आये खिलाड़ी अपना सबकुछ झोंकते रहे और अब खेलों के इस महाकुंभ की खट्टी-मीठी यादें लेकर वे अपने-अपने देशों को लौट जायेंगे। टोक्यो ओलंपिक 2020 में ही होने थे, लेकिन कोरोना वायरस के कारण इसे टाल दिया गया था।

भारत का अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन

टोक्यो ओलंपिक में भारत ने अपना अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया है। खेलों के इस महाकुम्भ में भारत ने 1 गोल्ड, 2 सिल्वर और 4 कांस्य पदक जीते। पदक तालिका में भी भारत इस बार काफी ऊपर रहा। भारत पदक तालिका में 48वें स्थान पर रहा। टोक्यो ओलंपिक की भाला फेंक स्पर्द्धा में नीरज चोपड़ा ने भारत को एक गोल्ड दिलाया। दो सिल्वर भारत को वेटलिफ्टिंग और कुश्ती में मिले। मीराबाई चानू ने वेटलिफ्टिंग में भारत को सिल्वर मेडल दिलाया। यह टोक्यो ओलंपिक में भारत का पहला मेडल था। दूसरा सिल्वर रवि दहिया ने कुश्ती में दिलाया। बजरंग पूनिया ने कुश्ती में, शटलर पीवी सिंधु ने बेडमिन्टन, और लवलीना बोरगोहेन ने बॉक्सिंग की व्यक्तिगत स्पर्द्धाओं में ब्रॉन्ज दिलाये। भारत को एक ब्रॉन्ज पुरुष हॉकी स्पर्द्धा में मिला।

टोक्यो ओलंपिक में भारत के कुछ खिलाड़ी पदक के काफी नजदीक भी पहुंचे। ये पदक अगर भारत की झोली में आ जाते तो पदकों की संख्या 10 से पार हो सकती थी। बॉक्सिंग में मैरीकॉम पदक जीत सकती थीं, लेकिन जजों के विवादास्पद निर्णय के कारण उन्हें कोई पदक नहीं मिल सका। गोल्फ में अदिति अशोक पदक के काफी करीब पहुंच कर चूकीं।

भारतीय महिला हॉकी टीम शानदार प्रदर्शन करने के बावजूद पदक से दूर रह गयी। डिस्कस थ्रो के क्वालिफाइंग राउंड में बेहतरीन प्रदर्शन करने के बाद कमलप्रीत कौर आशा के अनुरूप प्रदर्शन नहीं कर पायीं और पदक का मौका गंवा दिया। निशानेबाजी में सौरभ चौधरी क्वालिफाइंग राउंड में शीर्ष पर रहने के बाद फाइनल मुकाबले में पिछड़ कर नौवें स्थान पर पहुंच गये। कुछ अन्य प्रतियोगिताओं में भी भारत के खिलाड़ियों के हाथ निराश लगी। लेकिन इसके बावजूद आज तक के ओलंपिक खेलों के प्रदर्शनों से तुलना करें तो भारतीय खिलाड़ियों का इस बार का प्रदर्शन अधिक संतोष दे रहा है। लगता है भारतीय खिलाड़ी बड़ी स्पर्द्धाओं में पदक कैसे जीता जाता है, जान चुके हैं।

अभिभावक की भूमिका में रहे पीएम मोदी

टोक्यो ओलंपिक में पहली बार लगा कि खिलाड़ियों का कोई अभिभावक हमेशा उनके साथ है। जब भी किसी खिलाड़ी ने कोई मेडल जीता उसे बधाई देने में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पीछे नहीं रहे। अगर कोई खिलाड़ी चूक भी गया तब भी पीएम ने उसकी हौसला अफजाई की। ट्वीट कर या फोन पर सीधी बात कर पीएम मोदी उनका हौसला बढ़ाते रहे।

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