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नभः स्पृशं दीप्तम: बार-बार दुश्मनों के छक्के छुड़ाने वाली भारतीय वायुसेना का 89वां स्थापना दिवस आज

बार-बार दुश्मनों के छक्के छुड़ाने वाली भारतीय वायुसेना का 89वां स्थापना दिवस आज

न्यूज डेस्क/ समाचार प्लस – झारखंड-बिहार

भारतीय वायुसेना आज अपना 89वां स्थापना दिवस मना रही है। भारतीय वायुसेना की स्थापना ब्रिटिश शासनकाल में 8 अक्तूबर, 1932 को हुई थी। तब इसका नाम था- ‘रॉयल इंडियन एयरफोर्स’। ‘रॉयल इंडियन एयरफोर्स’ को अपनी स्थापना के बाद 1945 में ही पराक्रम दिखाने का अवसर मिला। द्वितीय विश्वयुद्ध में ‘रॉयल इंडियन एयरफोर्स’ ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। शुरुआत में वायुसेना पर आर्मी का ही नियंत्रण था। इंडियन एयरफोर्स के पहले कमांडर-इन-चीफ सर थॉमस डब्ल्यू एल्महर्स्ट का इसे एक स्वतंत्र इकाई का दर्जा दिलाने में बड़ा योगदान था। ‘रॉयल इंडियन एयरफोर्स’ की स्थापना के समय इसके बेड़े में केवल चार एयरक्राफ्ट थे और इन्हें संभालने के लिए कुल 6 अधिकारी और 19 जवान थे। मगर आज वायुसेना में डेढ़ लाख से भी अधिक जवान और हजारों एयरक्राफ्ट्स शामिल हैं। स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात् वायुसेना को अलग पहचान 1950 में मिली। ‘रॉयल इंडियन एयरफोर्स’ का नाम बदलकर ‘इंडियन एयरफोर्स’ कर दिया गया। एयर मार्शल सुब्रतो मुखर्जी इंडियन एयरफोर्स के पहले भारतीय प्रमुख थे।

भारतीय वायुसेना के बेड़े में एक से बढ़कर एक नगीने

राफेल, सी-17 ग्लोबमास्टर, सी-130जे सुपर हरक्युलिस, मिराज, जगुआर, सुखोई, मिग-21 बायसन, मिग-29, चिनूक, अपाचे तथा कई अन्य अत्याधुनिक लड़ाकू विमान, हेलीकॉप्टर और मिसाइलें इस समय भारतीय वायुसेना की बेमिसाल ताकत बने हुए हैं। आने वाले वर्षों में वायुसेना की ताकत और बढ़ेगी, क्योंकि -4 वर्षों में तेजस, कॉम्बैट हेलीकॉप्टर, ट्रेनर एयरक्राफ्ट सहित कई और ताकतवर हथियार वायुसेना की अभेद्य ताकत बनेंगे। दो वर्षों में राफेल तथा एलसीए मार्क-1 स्क्वाड्रन पूरी ताकत के साथ शुरू हो जाएगी।

भारतीय वायुसेना ने बार-बार दिखाया अपना पराक्रम

वायुसेना ने एक नहीं, अनेकों बार अपने पराक्रम से भारत को गौरवान्वित किया है। अब तक भारतीय वायुसेना चीन के साथ 1 और  पाकिस्तान के साथ 4 युद्धों में शामिल हो चुकी है। 1947 में भारत-पाकिस्तान युद्ध, कांगो संकट, ऑपरेशन विजय, 1962 में भारत-चीन तथा 1965 और 1971 में भारत-पाक युद्ध, ऑपरेशन मेघदूत, ऑपरेशन पूमलाई, ऑपरेशन पवन, ऑपरेशन कैक्टस, 1999 में कारगिल युद्ध इत्यादि में वायुसेना ने साबित किया कि वह हर विकट परिस्थितियों में भारत की आन-बान की रक्षा करने में सक्षम है।

चीन के मुकाबले भारतीय वायुसेना कहां?

यह सही है कि भारत के मुकाबले चीन की वायुसेना ज्यादा बड़ी दिखती है। भारत के मुकाबले में चीन के पास दोगुने लड़ाकू और इंटरसेप्टर विमान हैं और भारत से दस गुना ज्यादा रॉकेट प्रोजेक्टर हैं। इसके बावजूद रक्षा विश्लेषक मानते हैं कि संख्या में ज्यादा होने से ऐसा नहीं है कि चीन हमसे बेहतर है। मजबूत दिखने के बावजूद चीनी वायुसेना के मुकाबले भारत का पलड़ा भारी है। ऐसा इसलिए, क्योंकि भारतीय लड़ाकू विमान चीन के मुकाबले ज्यादा प्रभावी हैं। गिनती और तकनीकी मामले में भले ही चीन सहित कुछ देश हमसे आगे हो सकते हैं, लेकिन संसाधनों के सटीक प्रयोग और बुद्धिमता के चलते दूसरे देश सदैव भारतीय वायुसेना से डरते हैं। ऑल-वेदर मल्टीरोल विमान मिराज-2000, और एसयू-30, मिग-29, सी-17 ग्लोबमास्टर, सी-130जे सुपर हरक्यूलिस, सुखोई-30, सी-17 ग्लोबमास्टर जैसे लड़ाकू विमानों के साथ ब्रह्मोस और अन्य घातक मिसाइलें भारतीय वायुसेना की ताकत को बढ़ाते हैं और जबकि इसकी मारक क्षमता से दुश्मन देश थर्राते हैं।

यह भी पढ़ें: भारतीय सीमा में फिर घुसा चीन! अरुणाचल के तवांग में घुसे 200 चीनी सैनिकों को भारतीय सैनिकों ने खदेड़ा

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