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झारखंड की ही बिजली नहीं है गुल, पूरे देश का है हाल बेहाल, कई राज्यों की हालत बहुत बुरी

There is no 'electricity failure' of Jharkhand, the condition of the whole country is poor

न्यूज डेस्क/ समाचार प्लस – झारखंड-बिहार

बिजली गुल होने की समस्या सिर्फ झारखंड की नहीं है। पूरे देश में बिजली की स्थिति बेहद खराब है। चूंकि गर्मी का चरम अभी बाकी है, इसलिए इसमें सुधार की बजाय स्थिति के और डांवाडोल होने की संभावना है। यह स्थिति हर साल बनती है। गर्मियों में बिजली की हालत खराब होने के पीछे की सबसे बड़ी वजह मांग का अचानक बहुत बढ़ जाना होता है। बिजली उत्पादन के लिए कोयले की जरूरत होती है इसलिए उत्पादन बढ़ने के साथ इसकी कमी का हो जाना आम समस्या है। लेकिन सिर्फ कोयले की आपूर्ति करके ही बिजली की दशा को सुधारा नहीं जा सकता है। मांग के अनुरूप बिजली उत्पादन करने का दबाव ताप विद्युत संयंत्रों पर पड़ता है, इसके कारण कई तरह की तकनीकी खराबी इन संयंत्रों में आ जाती है जो स्थिति को और विकट बना देती है। यानी गर्मी की लहर से लेकर, कोयले की कमी, संयंत्रों की क्षमता और तकनीकी खराबी बिजली की कमी में सब एक दूसरे के पूरक का काम करते हैं।

पिछले सप्ताह की बिजली की स्थिति के आकलन का निष्कर्ष यही है कि भारत में कुल बिजली की कमी 62.3 मिलियन यूनिट तक पहुंच गई। झारखंड, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, पंजाब, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, बिहार, आंध्र प्रदेश और संघ सहित राज्यों में बिजली की बढ़ती मांग को पूरा करने में राज्यों को कई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। देश के बड़े हिस्से में भीषण गर्मी के बीच अखिल भारतीय बिजली मांग 201 गीगावॉट के रिकॉर्ड स्तर को पार कर गई। जिसमें 120 मिलियन यूनिट ऊर्जा की मांग पूरी नहीं की जा सकी है।

बिजली की कमी से कौन-कौन से राज्य हैं सबसे अधिक प्रभावित

झारखंड – झारखंड में पीक आवर्स में 1,800-2,100 मेगावाट बिजली की खपत होती है। अभी यह मांग बढ़कर 2,500-2,600 मेगावाट हो गयी है।

जम्मू और कश्मीर – जम्मू-कश्मीर में बिजली की मांग 3,000 मेगावाट है, लेकिन आपूर्ति आधे से भी कम है। यहां बिजली की स्थिति इतनी दयनीय है कि कई हिस्सों में 15-16 घंटे तक की लोड शेडिंग की जा रही है।

राजस्थान – 2021 में अप्रैल महीने में राजस्थान में दैनिक बिजली की मांग लगभग 2,131 लाख यूनिट थी। लेकिन एक साल में रोजाना की यह मांग लगभग 2,800 लाख यूनिट तक पहुंच गयी है।

हरियाणा – हरियाणा करीब 3,000 मेगावाट की कमी का सामना कर रहा है। बिजली की दशा सुधारने के लिए राज्य सरकार ने अदाणी पावर लिमिटेड से बात की है कि वह मुंद्रा पावर प्लांट से आपूर्ति बहाल करे, लेकिन अडाणी पावर ने गर्मी की लहर और इसके कारण बुनियादी ढांचे पर पड़ रहे असर का हवाला देकर असमर्थता जाहिर की है।

पंजाब – पंजाब में बुधवार को बिजली की मांग 7,800 मेगावाट थी और उपलब्धता करीब 7,000 मेगावाट। बिजली की इस कमी के कारण घरेलू क्षेत्रों में 2 से 5 घंटे तक बिजली कटौती हो रही गयी। यहां भी बिजली के कम उत्पादन का कारण कोयले की कमी और संयंत्रों की तकनीकी खराबी बताया जा रहा है।

ओडिशा – ओडिशा को प्रतिदिन लगभग 400 मेगावाट की कमी का सामना करना पड़ रहा है, जबकि पीक आवर्स के दौरान इसकी औसत जरूरत 4,150 मेगावाट है। ओडिशा की अधिकतम मांग 4,450 मेगावाट है। बिजली विभाग के अधिकारी बता रहे हैं कि बिजली की यह कमी अस्थायी है और एक सप्ताह के भीतर इसे सुधार लिया जायेगा।

महाराष्ट्र – महाराष्ट्र में बिजली की पीक डिमांड 25000 मेगावाट से अधिक हो गई है, जो पिछले साल की तुलना में लगभग 2500 मेगावाट अधिक है। महाराष्ट्र कोयला कंपनियों के बड़े बकाया वाले राज्यों में से एक है और केंद्र इसे भुगतान न करने के लिए दोषी ठहरा रहा है।

बिहार – बिहार प्रतिदिन 200-300 मेगावाट बिजली की कमी का सामना कर रहा है। राज्य की खपत 6,000 मेगावाट प्रतिदिन और उपलब्धता विभिन्न स्रोतों से करीब 5,000-5,200 मेगावाट है।

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