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Jharkhand के राजनीतिक आसमान में ‘तूफान‘ आने से पहले की खामोशी?

The silence before the 'storm' in the political skies of Jharkhand?

हेमंत गये तो क्या शिबू संभालेंगे कमान?

न्यूज डेस्क/ समाचार प्लस – झारखंड-बिहार

झारखंड की राजनीति में इन दिनों जो चल रहा है वह किसी तूफान के आने के पहले की शांति की तरह है। तूफान आने से पहले की यह खामोशी किसी बड़े राजनीतिक उथल-पुथल का संकेत तो नहीं है? झारखंड में एक साथ कई राजनीतिक घटनाएं घटी हैं और आने वाले दिनों में और घटनाओं के घटने की भी उम्मीद है। ये घटनाएं अलग-अलग भले दिखायी दें, लेकिन इनका सीधा सम्बंध राज्य की सत्ता को प्रभावित करने वाला है।

खुद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की कुर्सी दांव पर

खदान लीज मामले में मुख्‍यमंत्री हेमंत सोरेन की कुर्सी दांव पर लगी है। कारण, चुनाव आयोग ने उन्‍हें नोटिस थमाया है। दरअसल, जनप्रतिनिधित्‍व अधिनियम का हवाला देते हुए भारत निर्वाचन आयोग ने हेमंत को प्रथमदृष्टया दोषी माना है और पूछा है कि ‘क्यों न आप पर नियमों के उल्‍लंघन के लिए कानूनी कार्रवाई की जाये’। चुनाव आयोग ने खनन लीज प्रकरण में मुख्य सचिव सुखदेव सिंह के जवाब का इंतजार कर रहा है। सरकार का जवाब मिलने के बाद चुनाव आयोग यह तय करेगा कि खनन लीज का मामला ‘ऑफिस ऑफ प्रॉफिट’ के दायरे में आता है या नहीं। बता दें, भारत निर्वाचन आयोग ने यह कार्रवाई राज्यपाल की ओर से अनुशंसित पूर्व मुख्यमंत्री और बीजेपी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रघुवर दास के शिकायती-पत्र के आधार पर शुरू की है। इतना ही नहीं, खनन लीज मामले में सीएम हेमंत सोरेन के भाई बसंत सोरेन की गर्दन भी फंसी हुई है। हेमंत सोरेन की पत्नी कल्पना सोरेन का नाम भी जमीन खरीद मामले में आया है, जिसको लेकर सीएम हेमंत सोरेन पर आरोप लग रहे हैं।

कई विधायकों की विधायकी खतरे में

आय से अधिक संपत्ति मामले में हेमंत सोरेन सरकार में शामिल कांग्रेस के मांडर विधायक बंधु तिर्की की विधायकी जा चुकी है। भाजपा के कांके विधायक समरी लाल की विधायकी उनके ‘फर्जी’ जाति प्रमाण-पत्र के कारण खतरे में है। पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा विधायक बाबूलाल मरांडी दल-बदल कानून में फंसे हुए हैं। दल-बदल मामले में बाबूलाल मरांडी मामले की सुनवाई विधानसभा स्पीकर कोर्ट में आज पूरी हो चुकी है, स्पीकर ने फैसला फिलहाल सुरक्षित रख लिया है।

पेयजल एवं स्वच्छता मंत्री और झामुमो विधायक मिथिलेश ठाकुर पर लोक प्रतिनिधित्व कानून 1951 का उल्लंघन का आरोप लगा है। कांग्रेस ममता देवी रामगढ़ जिले के गोला में हुए गोलीकांड के मामले में अदालत में फंसी हुई हैं। घटना 21 अगस्त, 2016 की है। मधु कोड़ा कैबिनेट के दो पूर्व मंत्री रह चुके कमलेश सिंह और भानु प्रताप शाही के खिलाफ सीबीआई की विशेष अदालत में ट्रायल होना है। दोनों वर्तमान में भी विधायक हैं।

इन सबके साथ आईएएस पूजा सिंघल का कालाधन प्रकरण भी झारखंड की राजनीति में भूचाल खड़ा कर दे तो इसमें भी कोई आश्चर्य नहीं होगा।

हेमंत की विधायकी गयी तो कमान किसके हाथ?

इतनी सारी घटनाओं का एक साथ होना भले ही एक संयोग हो, लेकिन राजनीतिक चक्र में झारखंड की सरकार फंस गयी है। सत्ता परिवर्तन होगा या नही, इससे बड़ा सवाल यह है कि अगर बसंत सोरेन के साथ हेमंत सोरेन की विधायकी भी चली जाती है तो राज्य सरकार की बागडोर कौन सम्भालेगा? क्या राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव की पत्नी राबड़ी देवी की तरह कल्पना सोरेन झारखंड की गद्दी सम्भालेंगी? अगर ऐसा होता भी है तो क्या झामुमो का कुनबा उनको अपना मुखिया स्वीकार करेगा? किसी दूसरे नेता पर झामुमो ‘विश्वास’ शायद ना करे। अगर वाकई में ऐसा होता है तो एक विकल्प झामुमो के पास अब भी बचा हुआ है और वह विकल्प है – शिबू सोरेन। शिबू सोरेन झामुमो के सर्वमान्य नेता हैं। इनके नाम पर झामुमो में किसी को भी आपत्ति नहीं होगी और सरकार शेष बचे ढाई साल आसानी से निकाल लेगी। यही नहीं, कोरोना काल में सरकार के ढेरों काम जो अब तक नहीं हो पाये हैं, उनको भी वह आसानी से पूरा कर लेगी। लेकिन ये सारी बातें अभी सिर्फ अटकलें हैं और समय के गर्त में हैं। इसलिए समय का थोड़ा इंतजार करना बेहतर होगा।

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