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Atal Bihari Vajpayee: ‘अटल जी के नेतृत्व में देश प्रगति की राह पर आगे बढ़ा’, पुण्यतिथि पर इस तरह पीएम मोदी ने किया याद

'The country moved forward on the path of progress under the leadership of Atal ji', PM remembered on his death anniversary

Atal Bihari Vajpayee: पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की पुण्यतिथि पर आज देश कर रहा नमन। बुधवार को सुबह-सुबह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अटल समाधि स्थल पहुंचे और पूर्व पूर्व प्रधानमंत्री को श्रद्धांजलि देकर उनके नेतृत्व में किये गये कार्यों को स्मरण किया। इस दौरान उनके साथ राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ और लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला समेत कई दिग्गज नेता भी मौजूद थे। सबने अटल बिहारी वाजपेयी की समाधि पर श्रद्धासुमन अर्पित कर उन्हें अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की। श्रद्धांजलि देने से पहले पीएम मोदी ने अपने ट्विटर अकाउंट पर एक ट्वीट कर अटल बिहारी वाजपेयी को याद किया और उनके नेतृत्व की सराहना की।

पीएम मोदी ने ट्वीट कर लिखा, “मैं अपने भारत देश के 140 करोड़ की आवाम के साथ मिलकर पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि देता हूं। उनके (अटल बिहारी वाजपेयी) नेतृत्व ने भारत को काफी लाभ पहुंचाया। वाजपेयी जी के नेतृत्व ने देश की प्रगति को बढ़ावा दिया और कई क्षेत्रों में इसे 21वीं सदी में ले जाने में अहम भूमिका निभाई।”

 

देश के प्रिय नेता थे अटल बिहारी वाजपेयी

अटल बिहारी वाजेपयी का निधन आज ही के दिन यानी 16 अगस्त को 2018 में हुआ था। अटल बिहारी वाजपेयी की गिनती सियासत के उन चंद नेताओं में होती है जो कभी दलगत राजनीति के बंधन में नहीं बंधे। पक्ष हो या विपक्ष, लेफ्ट हो या राइट, उन्‍हें हमेशा ही सभी पार्टियों से भरपूर प्‍यार और सम्‍मान मिला।

बचपन से प्रतिभा के धनी थे अटल
अटल बिहारी का जन्म 25 दिसंबर, 1924 को मध्यप्रदेश के ग्वालियर के शिंके के बाड़ा मुहल्ले में हुआ था। उनके पिता पंडित कृष्ण बिहारी वाजपेयी अध्यापन का कार्य करते थे और माता कृष्णा देवी घरेलू महिला थीं। अटल जी अपने माता-पिता की सातवीं संतान थे। वाजपेयी बचपन से ही अंतर्मुखी और प्रतिभा संपन्न थे। उनकी प्रारंभिक शिक्षा बड़नगर के गोरखी विद्यालय में हुई। यहां से उन्होंने आठवीं कक्षा तक की शिक्षा प्राप्त की।

वाजपेयी का राजनीतिक सफर 
अटल बिहारी वाजपेयी के राजनीतिक सफर की शुरुआत स्वतंत्रता आन्दोलन के साथ हुई। 1942 में ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ में भाग लेने के कारण वह अन्य नेताओं के साथ गिरफ्तार हुए। इसी समय उनकी मुलाकात श्यामा प्रसाद मुखर्जी से हुई, जो भारतीय जनसंघ यानी बीजेएस के नेता थे। श्यामा प्रसाद के राजनीतिक एजेंडे में वाजपेयी ने सहयोग किया। मुखर्जी के निधन के बाद बीजेएस की कमान वाजपेयी ने संभाली और इस संगठन के विचारों और एजेंडे को आगे बढ़ाया।

1957 में पहली बार बने थे सांसद
अटल बिहारी वाजपेयी सन 1957 में बलरामपुर सीट से संसद सदस्य निर्वाचित हुए थे। छोटी उम्र के बावजूद वाजपेयी के विस्तृत नजरिए और जानकारी ने उन्हें राजनीति जगत में सम्मान और स्थान दिलाने में मदद की। 1977 में जब मोरारजी देसाई की सरकार बनी, वाजपेयी को विदेश मंत्री बनाया गया।

तीन बार बने प्रधानमंत्री
साल 1996 में अटल बिहारी वाजपेयी ने महज 13 दिन में ही प्रधानमंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया था। 1998 चुनाव में बीजेपी एक बार फिर विभिन्न पार्टियों के सहयोग वाला गठबंधन नेशनल डेमोक्रेटिक अलायन्स (एनडीए) के साथ सरकार बनाने में सफल रही और वाजपेयी को फिर पीएम बनाया गया। इस बार वह 13 महीने पीएम रहे। फिर तीसरी बार 1999 से 2004 तक भारत के प्रधानमंत्री रहे। तब उन्होंने पांच साल का कार्यकाल पूरा किया।

वाजपेयी सरकार की मुख्‍य उपलब्‍धियां

  • एक सौ साल से भी ज्यादा पुराने कावेरी जल विवाद को सुलझाया।
  • संरचनात्मक ढांचे के लिए कार्यदल, सॉफ्टवेयर विकास के लिए सूचना एवं प्रौद्योगिकी कार्यदल, विद्युतीकरण में गति लाने      के लिए केन्द्रीय विद्युत नियामक आयोग आदि का गठन किया।
  • राष्ट्रीय राजमार्गों एवं हवाई अड्डों का विकास, नयी टेलीकॉम नीति तथा कोकण रेलवे की शुरुआत करके बुनियादी                    संरचनात्मक ढांचे को मजबूत करने वाले कदम उठाये।
  • राष्ट्रीय सुरक्षा समिति, आर्थिक सलाह समिति, व्यापार एवं उद्योग समिति भी गठित की।
  • ओडिशा के सर्वाधिक गरीब क्षेत्र के लिए सात सूत्रीय गरीबी उन्मूलन कार्यक्रम शुरू किया।
  • आवास निर्माण को प्रोत्साहन देने के लिए अर्बन सीलिंग एक्ट समाप्त किया।
  • ग्रामीण रोजगार सृजन एवं विदेशों में बसे भारतीय मूल के लोगों के लिए बीमा योजना शुरू की।

न्यूज डेस्क/ समाचार प्लस – झारखंड-बिहार

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Adani
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