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दूसरी बार बढ़ा झारखंड पंचायती राज संस्थाओं का कार्यकाल, नये राज्यपाल रमेश बैस ने दी मंजूरी

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रांची : जैसी की उम्मीद थी, नये राज्यपाल रमेश बैस ने झारखंड के त्रिस्तरीय पंचायती राज संस्थाओं के कार्यकाल को 6 माह बढ़ाने की मंजूरी दे दी। दूसरी बार पंचायती राज संस्थाओं का कार्यकाल बढ़ाया गया है। राज्य मंत्रिपरिषद की मंजूरी के लिए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने इस पर पहले ही अपनी सहमति दे दी थी। बस राज्यपाल की मंजूरी का इंतजार था। पंचायती राज संस्थाओं के कार्यकाल को बढ़ाने के अध्यादेश पर राज्यपाल रमेश बैस ने अपनी मंजूरी दे ही। इसके बाद त्रिस्तरीय अर्थात जिला परिषद, पंचायत समिति और ग्राम पंचायतों की अवधि का विस्तार अगले 6 महीने के लिए हो गया।

उल्लेखनीय है कि कोरोना महामारी के मद्देनजर झारखंड में ग्राम सरकार के गठन के लिए चुनाव सम्पन्न नहीं कराया जा सका है। इस कारण छह माह के लिए पंचायती राज संस्थाओं का कार्यकाल बढ़ाया गया था।  यह कार्यकाल भी 15 जुलाई को समाप्त हो रहा था, लेकिन नये राज्यपाल ने अध्यादेश को मंजूरी देकर इसका कार्यकाल को फिर से 6 महीने का विस्तार दे दिया। अंतिम ग्राम पंचायत चुनाव 2015 में हुआ था और इसकी 5 साल की अवधि 15 जनवरी को ही समाप्त हो गयी थी।

चुनाव आयोग तलाश रहा चुनावी प्रक्रिया शुरू करने की सम्भावनाएं

त्रिस्तरीय पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव दिसंबर में कराने की तैयारी राज्य सरकार कर रही है। एक ओर कोरोना महामारी, वहीं दूसरी ओर प्रदेश में राज्य निर्वाचन आयुक्त का पद रिक्त होने के कारण भी पंचायती चुनाव में दिक्कत आयी। राज्य निर्वाचन आयुक्त की नियुक्ति होने के बाद  सचिव का पद बहुत लंबे समय तक खाली पड़ा रहना भी पंचायती चुनाव नहीं हो पानी की एक और वजह है। राज्य में अभी दोनों पदों के भरे होने से पंचायत चुनाव की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। अब एक बाधा कोरोना वायरस की तीसरी लहर की है। यह लहर नहीं आई तो दिसंबर में पंचायत चुनाव संपन्न कराए जाने की संभावना है।

राज्य सरकार तय करेगी कैसे चलेगी ग्राम सरकार

अब जबकि अध्यादेश को गवर्नर से मंजूरी मिल गयी है तब  राज्य सरकार यह तय करेगी कि ग्राम पंचायत, पंचायत समितियों और जिला परिषदों में पहले कार्यकाल विस्तार के दौरान बनाई गई समिति ही इस काम को करती रहेगी या फिर नई समिति बनायी जायेगी। महत्वपूर्ण बात यह भी है कि केंद्र सरकार द्वारा पंचायतों के लिए जो राशि दी गयी है, उसे खर्च करना भी आवश्यक है। 15वें वित्त आयोग की सिफारिश पर मिली राशि गांवों के विकास योजनाओं पर खर्च करनी है।

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