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Tejashwi Yadav Bihar: अपने पिता के ‘चरण चिह्नों’ पर तेजस्वी, तिरंगे का सम्मान करना कब सीखेगा लालू परिवार

Tejashwi Yadav Bihar

तेरा प्रदर्शन, मेरा प्रदर्शन की सोच रखता है राजद

Tejashwi Yadav Bihar: तिरंगे का ‘अपमान नहीं करना’ भी तिरंगा का अपमान है। ऐसा इसलिए कि तिरंगा सिर्फ और सिर्फ सम्मान के लिए है। लेकिन लगता है लालू परिवार तिरंगे को ‘अपमान नहीं’ करने को ही उसका सम्मान मानता है। ऐसा ही तिरंगे का ‘अपमान नहीं’ लालू प्रसाद भी कर चुके हैं, और अब उनके छोटे बेटे को तिरंगे के सम्मान और अपमान में फर्क समझ नहीं आ रहा है। लालू मुख्यमंत्री रहते हुए एक कार्यक्रम राष्ट्रगान के वक्त टांग पर टांग धरे कुर्सी पर बैठे रह गये, तिरंगे के सम्मान में खड़ा होना भी उन्होंने गवारा नहीं था। इस घटना को ‘राष्ट्रीय ध्वज का अपमान नहीं’ माना गया। इसी तरह एक समारोह में वह तिरंगे के साथ फोटो खिंचवा रहे थे, लेकिन उनके हाथ में जो झंडा था वह तिरंगा जैसा तो था, लेकिन तिरंगा नहीं था। अब उनके बेटे और बिहार के डिप्टी सीएम प्रदर्शनकारियों से पूछ रहे हैं कि तिरंगा लेकर प्रदर्शन करने की क्या जरूरत थी। तो क्या तेजस्वी भूल गये अग्निपथ योजना का प्रदर्शन?

तो इसी सवाल का जवाब दे दें तेजस्वी

अभी ज्यादा दिन नहीं हुए बिहार में अग्निपथ योजना को लेकर तथाकथित विद्यार्थियों ने बवाल मचा दिया। सैकड़ों करोड़ रुपयों की रेलवे की सम्पत्ति स्वाहा कर दी। तब तेजस्वी के मुंह से एक ‘बकार’ नहीं फूटा। लगता है देश की सम्पत्ति नष्ट हो जाने का उनकी नजर में कोई मायने नहीं। फिर, उस समय नीतीश कुमार ने उन पर तो लाठियां कहां बरसायी थीं? अगर उस समय लाठियां नहीं बरसाना सही था तो आज इन प्रदर्शनकारियों पर लाठियां क्यों बरस गयीं। आपकी नजर में तो यह बवाल है तो वह भी बवाल था। यहां भी तो ये नौकरियों की मांग कर रहे थे। यह भी याद दिला दें, बिहार के जिस डिप्टी सीएम ने तिरंगे को लेकर प्रदर्शन करने पर उंगली उठायी, उसी ने 10 लाख + 10 लाख नौकरियों की बड़ा (या झूठा) वादा किया था। तो लाठियां भंजवाने से पहले अपना वचन तो याद कर लेते। एक बात और, अग्निपथ योजना को लेकर हुए प्रदर्शन में तिरंगे भी खूब लहराये थे। उन्हीं ‘तिरंगधारियों’ ने देश की सम्पत्ति ट्रेनों को आग के हवाले किया था, तब तो एक सच्चा जनप्रतिनिधि होने का धर्म तेजस्वी यादव ने नहीं निभाया। उस समय तो यह नहीं कहा कि तिरंगा लेकर क्यो प्रदर्शन कर रहे हैं प्रदर्शनकारी। तेजस्वी ही नहीं, उनकी राजद को इस प्रदर्शन में साजिश की बू नजर आ रही है। कहीं ये प्रदर्शनकारी एबीवीपी के तो नहीं थे? और अग्निपथ के प्रदर्शनकारी कोई और…? तेजस्वी यादव को अपनी ‘बेरोजगारी’ दूर करने की चिंता है, बिहार की नहीं।

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