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Tata Steel Foundation ने कराया CUJ के छात्रों को संवाद फेलोशिप से अवगत, विलुप्त होती भाषा के संरक्षण पर हुई चर्चा

रांची से वैद्य रितिका गौतम की रिपोर्ट 

Ranchi: झारखंड केंद्रीय विश्वविद्यालय के जनसंचार विभाग में आज टाटा स्टील फाउंडेशन (Tata Steel Foundation) द्वारा दिए जाने वाले संवाद फेलोशिप से विश्वविद्यालय के छात्रों को अवगत कराया गया। संवाद फेलोशिप के माध्यम से टाटा स्टील जनजातीय संस्कृति के संरक्षण में अपना योगदान देती है। इस फेलोशिप के माध्यम से टाटा स्टील विभिन्न जनजाति के लोगों को अपनी विलुप्त होती भाषा, संस्कृति, कला, अनुष्ठान, रीति-रिवाज़ इत्यादि के संरक्षण का अवसर प्रदान करती है।

इस कार्यक्रम में टाटा स्टील के नीरज चौधरी, अंशु सिंह के साथ संवाद फेलोशिप जूरी की सदस्य डॉ. मीनाक्षी मुंडा मौजूद थीं। कार्यक्रम में जनसंचार विभाग के प्रो. देवव्रत सिंह ने अतिथियों का स्वागत किया तथा डॉ. अमृत कुमार ने धन्यवाद ज्ञापन दिया। विश्वविद्यालय के शोधार्थी विभांशु कुमार ने कार्यक्रम का संचालन किया। इस दौरान विभाग के सहायक आचार्य डॉ. सुदर्शन यादव एवं विभिन्न विभाग के विद्यार्थी एवं शोधार्थी मौजूद थे।

संवाद फेलोशिप को 2017 से संवाद के अंतर्गत लाया गया है जिससे अब तक देश के 13 राज्यों के 27 जनजातियों के 30 लोग जुड़ चुके हैं। इस फेलोशिप के माध्यम से जनजातीय लोक गीत, खान-पान के संरक्षण से लेकर गड़िया-लोहार जनजाति के औजार निर्माण में महिलाओं की भूमिका जैसे विषयों पर कार्य किये जा रहे हैं। टाटा स्टील फाउंडेशन के इस फेलोशिप के लिए किसी भी जनजाति के 18-40 वर्ष के लोग आवेदन कर सकते हैं। फेलोशिप में चयन हेतु फ़ाउंडेशन द्वारा प्रस्ताव आमंत्रित किये जाते हैं। प्रस्ताव मिलने के पश्चात एक विशेष टीम द्वारा इसकी स्क्रूटिनी की जाती है। सर्वश्रेष्ठ प्रस्ताव को जूरी के पास भेजा जाता है। चयनित अभ्यर्थियों को संवाद के 4 दिवसीय कार्यक्रम में आमंत्रित किया जाता है और वहीं जूरी अपना फैसला सुनाती है जिसके बाद फेलोशिप के लिए अभ्यर्थियों का चयन किया जाता है। इस वर्ष संवाद फेलोशिप के लिए आवेदन करने की अंतिम तिथि 5 अक्टूबर है। फेलोशिप के लिए चयनित अभ्यर्थियों की जानकारी 19 नवंबर को दी जाएगी।

बता दें कि संवाद एक अखिल भारतीय जनजातीय सम्मेलन है जिसे टाटा स्टील फाउंडेशन द्वारा प्रतिवर्ष 15-19 नवंबर को जमशेदपुर में आयोजित किया जाता है। यह भारत में जनजातीय समुदायों के विचारों के आदान-प्रदान का एक मंच है।

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