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भारत ने दिया पाकिस्तान-चीन को जोर का झटका!, अधूरी रह गयी तालिबान की UN महासभा जाने की इच्छा

अधूरी रह गयी तालिबान की UN महासभा जाने की इच्छा

न्यूज डेस्क/ समाचार प्लस – झारखंड-बिहार

संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) को संबोधित करने की तालिबानी आतंकियों की इच्छा पूरी नहीं हो पायेगी। तालिबान प्रतिनिधि यूएन महासभा को संबोधित कर सके, चीन और पाकिस्‍तान के इस प्रयास को भी झटका लगा है। पाकिस्‍तान और चीन की मंशा थी कि तालिबान को संयुक्‍त राष्‍ट्र सत्र को संबोधित करने का मौका मिल जाये, लेकिन भारत के विरोध के बाद तीनों के अरमानों पर पानी फिर गया है।

दरअसल, 27 सितंबर को अफगानिस्तान को महासभा में संबोधित करने की इजाजत मिली थी, हालांकि तब देश में अशरफ गनी की सरकार थी, लेकिन अब देश पर तालिबानियों की आतंकी सरकार काबिज है। अफगानिस्तान में लोकतांत्रित सरकार नहीं होने के कारण ही यह असमंजस की स्थिति बनी है। लेकिन अब तय हो चुका है कि तालिबान को यूएन में संबोधन नहीं करने दिया जाएगा।

तालिबान ने अफगानिस्तान पर कब्जा कर सरकार तो बना लिया। सरकार बनाने के बाद वह मान बैठा था कि दूसरे देशों की तरह वह मान्यता प्राप्त कर लेगा। तालिबान के इस सपने को चीन और पाकिस्तान ने हवा भी दी। तालिबान के आतंकी मान रहे थे कि वह चीन और पाकिस्तान की इशारे पर संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) सत्र में अपने प्रतिनिधित्व की मांग करेगा तो उसे सत्र को संबोधित करने का मौका दिया जाएगा, लेकिन उसका यह सपना, सपना ही रह गया।

बता दें कि तालिबान ने संयुक्त राष्ट्र के नये स्थायी प्रतिनिधि के रूप में मोहम्मद सुहैल शाहीन को चुना है। सुहैल शाहीन तालिबान के प्रवक्ता हैं और उन्होंने कतर शांति वार्ता में तालिबान का प्रतिनिधित्व किया था। संयुक्त राष्ट्र के सामने अब बड़ा सवाल है कि क्या तालिबान को अपनी बात रखने के लिए वैश्विक स्तर पर एक मंच दिया जाना चाहिए, अगर हां तो तालिबान को किस हद तक अभिव्यक्ति की आजादी देनी चाहिए?

बता दें, अभी भी संयुक्‍त राष्‍ट्र में अफगानिस्‍तान के राजनयिक मिशन पर पूर्ववर्ती अशरफ गनी सरकार के प्रतिनिधि का ही कब्‍जा है। अफगान दूत ने ही मंगलवार को अमेरिकी राष्‍ट्रपति जो बाइडन के सत्र में हिस्‍सा भी लिया।  पाकिस्तानी अखबार ‘डॉन’ ने एक सूत्र के हवाले से कहा, ‘अफगान सरकार के प्रतिनिधि तब तक संयुक्त राष्ट्र में मिशन पर कब्जा किए रहेंगे जब तक कि परिचय पत्र देने वाली कमिटी इस पर फैसला नहीं ले लेती है।’

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