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सुप्रीम कोर्ट ने कर दी कांग्रेस की बोलती बंद, मनी लॉन्ड्रिंग पर चलता रहेगा ईडी का डंडा

Supreme Court stopped speaking of Congress, ED's baton will continue on money laundering

सुप्रीम कोर्ट की नजर में पीएमएलए कानून सही

न्यूज डेस्क/ समाचार प्लस – झारखंड-बिहार

PMLA (Prevention of Money Laundering Act) की धार कुंद नहीं होगी। क्योंकि सुप्रीम यह मानता है कि देश में कालेधन पर रोकथाम लगाने के लिए ईडी को दंतहीन नहीं कर सकते। इसलिए पीएलएमए कानून के खिलाफ दायर सैकड़ों याचिकाओं के सुप्रीम कोर्ट ने दरकिनार कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट मनी लॉन्ड्रिंग को लेकर ईडी द्वारा की जाने वाली कार्रवाइयों पर किसी तरह का अंकुश लगाने के लिए तैयार नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा कि ईडी किसी को भी मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों के तहत पूछताछ के लिए समन भेज सकती है, आरोपी को हिरासत में ले सकती है और जरूरत पड़ने पर उसे गिरफ्तार भी कर सकती है। जस्टिस एएम खानविलकर, जस्टिस सीटी रविकुमार और जस्टिस दिनेश माहेश्वरी की पीठ ने इस मामले की सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की है।

दरअसल, इस समय पूरे देश में काले धन और मनी लॉन्ड्रिंग के मामलों को लेकर ईडी ताबड़तोड़ कार्रवाइयां कर रही है। इससे राजनीतिक हलकों में बौखलाहट है। देश की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस कुछ ज्यादा ही बौखलाई हुई है, क्योंकि उसका शीर्ष नेतृत्व ही मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ईडी के दरवाजे तक जा पहुंचा है। कांग्रेस की सबसे बड़ी बौखलाहट यह है कि ईडी जो उसने जो हथियार दिये, वह अब उस पर ही चल गया है। कांग्रेस के साथ सारा विपक्ष लगातार आरोप लगा रहा है कि केंद्र की मोदी सरकार ने अपने विरोधियों की आवाज कुचलने के लिए ईडी को अपना पिट्ठू बना लिया है। इसीलिए मोदी राज में ईडी को जो मिली शक्तियों और अधिकार मिले हैं, उस पर सवाल उठाते हुए सुप्रीम कोर्ट में 242 याचिकाएं दायर की गईं थीं, लेकिन आज सुप्रीम कोर्ट ने ईडी को पीएमएलए के तहत ईडी को मिले अधिकार को जायज ठहरा कर विरोधी दलों की हवा निकाल दी है।

पीएमएलए पर सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

सर्वोच्च अदालत ने ईडी को शक्ति देने के लिए पीएमएलए कानून में जो बदलाव किये गये हैं, उसे जायज ठहराया है। राजनीतिक हलकों में हो रही गिरफ्तारी को लेकर ज्यादा हड़कम्प मचा हुआ है, ईडी की उसी गिरफ्तारी की शक्ति को भी सुप्रीम कोर्ट ने बिल्कुल जायज ठहराया है। यानी ईडी के पास जितने भी अधिकार हैं, उन सभी को सुप्रीम कोर्ट ने सही ठहराया है। शीर्ष अदालत का यह फैसला विपक्षी दलों के साथ कांग्रेस के लिए बड़ा झटका है।

कांग्रेस के शासन में ही लागू किया गया

बता दें, पीएमएलए को साल 2002 में अधिनियमित किया गया था और उसके बाद 2005 में कांग्रेस के शासनकाल में ही इसे लागू किया गया। इस कानून का उद्देश्य काला धन पर अंकुश, मनी लॉन्ड्रिंग की रोकथाम, अवैध गतिविधियों और आर्थिक अपराधों पर रोकथाम, गलत तरीके से हासिल संपत्ति को जब्त करना है। पीएमएलए के तहत अपराधों की जांच के लिए प्रवर्तन निदेशालय जिम्मेदार है। यानी पीएमएलए कानूनों में ऐसा कुछ भी नहीं जिस पर उंगली उठायी जा सके, लेकिन कांग्रेस के साथ विपक्ष इस पर उंगली उठाकर अपनी फजीहत करा रहा है।

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